यूपीआई ट्रांजैक्शन जुलाई 2026 में 22% उछला, कुल मूल्य ₹29.88 लाख करोड़ के पार
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा 1 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 23.66 अरब हो गई। इन लेनदेनों का कुल मूल्य 19 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹29.88 लाख करोड़ तक पहुँच गया — जो भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य में एक नई ऊँचाई है।
मुख्य आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में प्रतिदिन औसतन 76.3 करोड़ UPI लेनदेन दर्ज किए गए। दैनिक औसत लेनदेन मूल्य ₹96,383 करोड़ रहा। इससे पिछले महीने, जून 2026 में, 22.72 अरब लेनदेन हुए थे — सालाना आधार पर 23 प्रतिशत की वृद्धि — और कुल मूल्य ₹28.92 लाख करोड़ था। जून में दैनिक औसत 75.7 करोड़ लेनदेन और ₹96,405 करोड़ का दैनिक मूल्य दर्ज हुआ था।
पाँच वर्षों की विकास यात्रा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वित्त वर्षों में UPI की वृद्धि उल्लेखनीय रही है। वित्त वर्ष 2021-22 में 4,595.61 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य ₹84.16 लाख करोड़ था। वित्त वर्ष 2022-23 में यह संख्या 8,371.44 करोड़ और मूल्य ₹1,39,15 लाख करोड़ हो गया।
वित्त वर्ष 2023-24 में 13,112.95 करोड़ लेनदेन और ₹1,99,95 लाख करोड़ का मूल्य दर्ज हुआ। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आँकड़ा 18,586.60 करोड़ लेनदेन और ₹2,60,56 लाख करोड़ के कुल मूल्य तक पहुँचा — जो चार वर्षों में लगभग चार गुना वृद्धि को दर्शाता है।
वैश्विक विस्तार की दिशा
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पिछले महीने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया था कि NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) — जिसकी स्थापना अप्रैल 2020 में NPCI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में हुई थी — भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर फैलाने के लिए विभिन्न देशों के साथ साझेदारी कर रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक फिनटेक क्षेत्र में भारत की साख तेज़ी से बढ़ रही है। इन साझेदारियों के ज़रिए भारतीय पर्यटक और प्रवासी भारतीय सीमा पार डिजिटल भुगतान सहजता से कर पा रहे हैं। साथ ही, साझेदार देशों को भी UPI जैसी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली और RuPay जैसी घरेलू कार्ड भुगतान व्यवस्था विकसित करने में सहायता मिल रही है।
किन देशों में उपलब्ध है UPI
फिलहाल UPI संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका सहित आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है। यह विस्तार वैश्विक फिनटेक मानचित्र पर भारत की स्थिति को और मज़बूत करता है। आने वाले वर्षों में इस नेटवर्क के और अधिक देशों तक पहुँचने की संभावना है।