यूपीआई ने मई 2026 में तोड़े सभी रिकॉर्ड, 23.20 अरब ट्रांजैक्शन और ₹29.90 लाख करोड़ का लेनदेन
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के ज़रिए 23.20 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए — जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 24 प्रतिशत की वृद्धि है। कुल लेनदेन राशि ₹29.90 लाख करोड़ रही, जो सालाना आधार पर 19 प्रतिशत अधिक है। यह भारत के डिजिटल भुगतान इतिहास में एक नया मील का पत्थर है।
मुख्य आंकड़े एक नज़र में
एनपीसीआई ने 2 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए आंकड़ों में बताया कि मई 2026 में प्रतिदिन औसतन 748 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए। रोज़ाना औसतन ₹96,465 करोड़ का भुगतान यूपीआई प्लेटफॉर्म के ज़रिए किया गया। ये संख्याएँ दर्शाती हैं कि यूपीआई अब केवल छोटे लेनदेन का माध्यम नहीं रहा — बड़े मूल्य के भुगतान भी तेज़ी से डिजिटल हो रहे हैं।
मासिक तुलना: लगातार तीसरे महीने वृद्धि
मार्च 2026 में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 22.64 अरब और कुल राशि ₹29.53 लाख करोड़ रही थी। अप्रैल 2026 में यह बढ़कर 22.35 अरब ट्रांजैक्शन और ₹29.03 लाख करोड़ हो गई — और मई 2026 में दोनों मापदंडों पर नई ऊँचाई दर्ज की गई।
अप्रैल में दैनिक औसत 745 मिलियन ट्रांजैक्शन और ₹96,766 करोड़ का दैनिक लेनदेन था। मई में ट्रांजैक्शन संख्या में वृद्धि दर्ज हुई, जबकि दैनिक लेनदेन राशि लगभग इसी स्तर पर स्थिर रही — जो संकेत देती है कि नए उपयोगकर्ता छोटे-मध्यम मूल्य के भुगतान में यूपीआई अपना रहे हैं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) दोनों ही डिजिटल वित्तीय समावेशन को नीतिगत प्राथमिकता दे रहे हैं। यूपीआई की पहुँच अब छोटे किराना दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और ग्रामीण उपभोक्ताओं तक फैल चुकी है। आसान इंटरफेस, शून्य लेनदेन शुल्क और तत्काल निपटान इसकी लोकप्रियता के मुख्य कारण हैं।
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूपीआई की भूमिका
गौरतलब है कि यूपीआई को एनपीसीआई ने 2016 में लॉन्च किया था और तब से इसने नकदी-आधारित लेनदेन को तेज़ी से विस्थापित किया है। मई 2026 के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत वैश्विक स्तर पर रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में अग्रणी बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, यूपीआई की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता — जो अब सिंगापुर, UAE, फ्रांस सहित कई देशों में उपलब्ध है — आने वाले महीनों में लेनदेन संख्या को और बढ़ा सकती है।
क्या होगा आगे
आंकड़ों के अनुसार, यदि यही वृद्धि दर बनी रही तो वित्त वर्ष 2026-27 में यूपीआई का वार्षिक लेनदेन 270 अरब के पार जा सकता है। एनपीसीआई यूपीआई लाइट, क्रेडिट-ऑन-यूपीआई और ऑफलाइन भुगतान सुविधाओं के विस्तार पर काम कर रही है, जो अगले चरण की वृद्धि को गति दे सकती हैं।