मार्च में यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड, 22.64 अरब लेनदेन: एनपीसीआई
सारांश
Key Takeaways
- मार्च में यूपीआई ने 22.64 अरब लेनदेन का नया रिकॉर्ड बनाया।
- लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्धि।
- यूपीआई अब आठ से अधिक देशों में सक्रिय है।
- भारत में कुल भुगतान लेनदेन का 57 प्रतिशत यूपीआई के माध्यम से होता है।
- फोनपे, गूगल पे और पेटीएम यूपीआई ऐप्स में प्रमुख हैं।
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ने मार्च में एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए 22.64 अरब लेनदेन किए हैं। यह किसी एक महीने में यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने बुधवार को साझा की।
फरवरी में 20.39 अरब लेनदेन हुए थे, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 21.70 अरब था।
मार्च में लेनदेन की कुल वैल्यू में भी सालाना आधार पर 19 प्रतिशत का बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस दौरान यूपीआई के माध्यम से कुल 29.53 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। फरवरी में यह आंकड़ा 26.84 लाख करोड़ रुपए था। जनवरी में यूपीआई से किए गए लेनदेन की वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपए थी।
दैनिक लेनदेन की औसत संख्या में मार्च में हल्की वृद्धि हुई, जो फरवरी के 728 मिलियन से बढ़कर 730 मिलियन हो गई।
हालांकि, दैनिक लेनदेन का औसत मूल्य पिछले महीने के 95,865 करोड़ रुपए से घटकर 95,243 करोड़ रुपए रह गया।
यूपीआई ऐप्स में, फरवरी में लेनदेन की मात्रा के हिसाब से फोनपे का 45.5 प्रतिशत का दबदबा रहा। गूगल पे लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पेटीएम 7 से 8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे आठ से अधिक देशों में सक्रिय है, जिससे भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक लीडर के रूप में उभर रहा है। यूपीआई की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति से प्रेषण में वृद्धि हो रही है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है, और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है।
भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, यूपीआई अब भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बन चुका है, जो भारत में कुल भुगतान लेनदेन का 57 प्रतिशत है, जो नकद लेनदेन (38 प्रतिशत) से कहीं अधिक है। इसका मुख्य कारण उपयोग में आसानी और तेज धन हस्तांतरण की क्षमता है।