यूपीआई से जुड़े 55.49 करोड़ यूजर, वित्त वर्ष 2025-26 में ₹314.23 लाख करोड़ के 24,161 करोड़ लेनदेन: संसद में सरकार
सारांश
मुख्य बातें
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से अब तक 55.49 करोड़ से अधिक यूजर जुड़ चुके हैं और वित्त वर्ष 2025-26 में इस प्लेटफॉर्म पर 24,161.69 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य ₹314.23 लाख करोड़ रहा। 20 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने यह आँकड़े सार्वजनिक किए। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन के पटल पर रखी।
पाँच वर्षों में यूपीआई की छलांग
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वित्त वर्षों में यूपीआई लेनदेन की मात्रा और मूल्य दोनों में लगातार तीव्र वृद्धि दर्ज हुई है। वित्त वर्ष 2021-22 में 4,595.61 करोड़ लेनदेन हुए और उनका कुल मूल्य ₹84.16 लाख करोड़ था। वित्त वर्ष 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ लेनदेन और ₹139.15 लाख करोड़ हो गई।
वित्त वर्ष 2023-24 में 13,112.95 करोड़ लेनदेन और ₹199.95 लाख करोड़ का मूल्य दर्ज हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में 18,586.60 करोड़ लेनदेन के साथ कुल मूल्य ₹260.56 लाख करोड़ रहा। गौरतलब है कि महज चार वर्षों में लेनदेन की संख्या पाँच गुना से अधिक हो गई है।
वैश्विक विस्तार की दिशा में कदम
वित्त राज्य मंत्री चौधरी ने बताया कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) — जिसे अप्रैल 2020 में एनपीसीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया था — विदेशी संस्थाओं के साथ साझेदारी कर भारत के डिजिटल भुगतान नेटवर्क का वैश्विक विस्तार कर रही है। इसके तहत विभिन्न देशों में यूपीआई और रुपे कार्ड जैसी भुगतान प्रणालियाँ लागू की जा रही हैं।
यूपीआई को कई देशों की भुगतान प्रणालियों से जोड़ा जा चुका है, जिससे व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) दोनों प्रकार के अंतरराष्ट्रीय भुगतान एवं धन प्रेषण संभव हो रहे हैं। इन साझेदारियों से भारतीय पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों को विदेशों में सहज डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल रही है।
सुरक्षा और पारदर्शिता के उपाय
सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने यूपीआई लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें धोखाधड़ी रोकने के लिए जोखिम-आधारित ट्रांजैक्शन सीमा, मोबाइल नंबर में अनधिकृत बदलाव से सुरक्षा, और एसएमएस-आधारित प्रमाणीकरण के दुरुपयोग पर अंकुश शामिल हैं।
एनपीसीआई ने कॉम्प्रिहेंसिव यूपीआई इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क (CUISF) 2025 और मोबाइल एप्लिकेशन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क भी जारी किया है, जिनके तहत यूपीआई ऐप्स के लिए उन्नत सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि की रिपोर्टें सामने आती रही हैं।
आम जनता पर असर
यूपीआई की बढ़ती पहुँच ने छोटे व्यापारियों से लेकर दूरदराज़ के ग्रामीण उपयोगकर्ताओं तक डिजिटल भुगतान को सुलभ बनाया है। 55.49 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर यह दर्शाते हैं कि भारत की लगभग 40% आबादी इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी है। साझेदार देशों को भी यूपीआई जैसी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली और रुपे जैसी घरेलू कार्ड व्यवस्था विकसित करने में सहयोग मिल रहा है।
आगे की राह
यूपीआई की वैश्विक स्वीकार्यता और घरेलू उपयोग दोनों में विस्तार जारी है। NIPL की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ भारत के डिजिटल भुगतान ढाँचे को एक वैश्विक मानक के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। आने वाले वर्षों में यूपीआई के लेनदेन आँकड़े और उपयोगकर्ता आधार में और तेज़ी से वृद्धि की संभावना है।