भारत के डेटा सेंटर उद्योग में $200 अरब निवेश की संभावना: पीयूष गोयल का बड़ा दावा
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 2 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक सीईओ राउंडटेबल में कहा कि भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश 200 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारत दुनिया का सबसे अनुकूल गंतव्य बन चुका है।
राउंडटेबल का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
यह बैठक 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फॉर स्केलिंग इंडिया डेटा सेंटर इकोसिस्टम' विषय पर आयोजित की गई थी। यह उस पहले सीईओ राउंडटेबल की अगली कड़ी थी जो भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र के तीव्र और टिकाऊ विस्तार हेतु सक्षम इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए बुलाई गई थी। चर्चा में बिजली आपूर्ति, भूमि उपलब्धता, नियामकीय सुधार और राजकोषीय मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
गोयल ने वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती का हवाला देते हुए बताया कि देश की पहली तिमाही की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही। उन्होंने डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर उद्योग, एआई क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक स्तर के उत्पादों के लिए देश के विस्तृत विनिर्माण आधार की भी चर्चा की।
गोयल के अनुसार, ये क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक रफ्तार को और तेज करेंगे और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बुनियादी ढाँचे पर फोकस
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसमें क्लस्टर आधारित ट्रांसमिशन और सबस्टेशन की योजना, पहले दिन से स्वीकृत लोड, दोहरे बिजली फीडर और राज्यों की सीमाओं के पार नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद को सुगम बनाने जैसे उपाय शामिल रहे। डेटा सेंटर के लिए तैयार भूमि बैंक और पहले से चिन्हित बिजली-तैयार भूखंडों की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।
हाइपरस्केलर्स की बढ़ती हिस्सेदारी
आँकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में भारत में डेटा सेंटर की कुल क्षमता खपत में हाइपरस्केलर्स की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक रही। यह आँकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के वैश्विक गंतव्य के रूप में भारत तेजी से उभर रहा है।
आगे की राह
गोयल ने बताया कि पक्षकारों के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही और विभिन्न सरकारी विभागों तथा राज्यों के बीच समन्वित चर्चा से पहले ही कई बाधाओं का समाधान निकाला जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ भारत में अपना डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार करने की होड़ में हैं।