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भारत के डेटा सेंटर उद्योग में $200 अरब निवेश की संभावना: पीयूष गोयल का बड़ा दावा

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भारत के डेटा सेंटर उद्योग में $200 अरब निवेश की संभावना: पीयूष गोयल का बड़ा दावा

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया कि भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र 200 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित कर सकता है। 2026 की पहली छमाही में हाइपरस्केलर्स की 80% से अधिक हिस्सेदारी यह बताती है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की दावेदारी तेजी से मजबूत हो रही है।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 2 सितंबर को कहा कि भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में 200 अरब डॉलर तक का निवेश आने की संभावना है।
भारत की पहली तिमाही विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जो वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत आर्थिक स्थिति दर्शाती है।
2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर क्षमता खपत में हाइपरस्केलर्स की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक रही।
बैठक में क्लस्टर आधारित ट्रांसमिशन , दोहरे बिजली फीडर और राज्यों के पार नवीकरणीय ऊर्जा खरीद पर सहमति बनी।
सरकार का लक्ष्य डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के जरिए 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 2 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक सीईओ राउंडटेबल में कहा कि भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश 200 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारत दुनिया का सबसे अनुकूल गंतव्य बन चुका है।

राउंडटेबल का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

यह बैठक 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फॉर स्केलिंग इंडिया डेटा सेंटर इकोसिस्टम' विषय पर आयोजित की गई थी। यह उस पहले सीईओ राउंडटेबल की अगली कड़ी थी जो भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र के तीव्र और टिकाऊ विस्तार हेतु सक्षम इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए बुलाई गई थी। चर्चा में बिजली आपूर्ति, भूमि उपलब्धता, नियामकीय सुधार और राजकोषीय मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

गोयल ने वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती का हवाला देते हुए बताया कि देश की पहली तिमाही की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही। उन्होंने डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर उद्योग, एआई क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक स्तर के उत्पादों के लिए देश के विस्तृत विनिर्माण आधार की भी चर्चा की।

गोयल के अनुसार, ये क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक रफ्तार को और तेज करेंगे और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बुनियादी ढाँचे पर फोकस

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसमें क्लस्टर आधारित ट्रांसमिशन और सबस्टेशन की योजना, पहले दिन से स्वीकृत लोड, दोहरे बिजली फीडर और राज्यों की सीमाओं के पार नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद को सुगम बनाने जैसे उपाय शामिल रहे। डेटा सेंटर के लिए तैयार भूमि बैंक और पहले से चिन्हित बिजली-तैयार भूखंडों की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।

हाइपरस्केलर्स की बढ़ती हिस्सेदारी

आँकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में भारत में डेटा सेंटर की कुल क्षमता खपत में हाइपरस्केलर्स की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक रही। यह आँकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के वैश्विक गंतव्य के रूप में भारत तेजी से उभर रहा है।

आगे की राह

गोयल ने बताया कि पक्षकारों के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही और विभिन्न सरकारी विभागों तथा राज्यों के बीच समन्वित चर्चा से पहले ही कई बाधाओं का समाधान निकाला जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ भारत में अपना डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार करने की होड़ में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सरकार की अपेक्षा है — कोई हस्ताक्षरित प्रतिबद्धता नहीं। गौरतलब है कि भारत पिछले कई वर्षों से डेटा सेंटर हब बनने की घोषणाएँ करता रहा है, लेकिन बिजली की अनिश्चित आपूर्ति और भूमि अधिग्रहण की जटिलताएँ निवेशकों की सबसे बड़ी शिकायतें रही हैं — और इस राउंडटेबल में भी इन्हीं मुद्दों को हल करने की बात हुई। हाइपरस्केलर्स की 80% हिस्सेदारी यह भी बताती है कि घरेलू खिलाड़ी अभी भी हाशिये पर हैं, जो दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के लिए चिंता का विषय है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में 200 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद क्यों जताई जा रही है?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई इकोसिस्टम ने बड़े पैमाने पर निवेश के अवसर पैदा किए हैं। 2026 की पहली छमाही में हाइपरस्केलर्स की 80% से अधिक हिस्सेदारी इस रुझान को पुष्ट करती है।
सीईओ राउंडटेबल में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
राउंडटेबल में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, बिजली आपूर्ति, भूमि उपलब्धता, नियामकीय सुधार और राजकोषीय मुद्दों पर चर्चा हुई। क्लस्टर आधारित ट्रांसमिशन, दोहरे बिजली फीडर और नवीकरणीय ऊर्जा खरीद को सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
हाइपरस्केलर्स क्या हैं और भारत में इनकी भूमिका क्यों अहम है?
हाइपरस्केलर्स वे बड़ी तकनीकी कंपनियाँ हैं जो विशाल पैमाने पर क्लाउड और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर संचालित करती हैं। 2026 की पहली छमाही में भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता खपत में इनकी हिस्सेदारी 80% से अधिक रही, जो एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत के उभरने को दर्शाती है।
भारत का 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य डेटा सेंटर क्षेत्र से कैसे जुड़ा है?
गोयल के अनुसार, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देंगे और 2047 तक विकसित भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देंगे।
डेटा सेंटर के लिए बिजली और भूमि की समस्या कैसे हल होगी?
राउंडटेबल में पहले से चिन्हित बिजली-तैयार भूखंडों वाले भूमि बैंक और क्लस्टर आधारित ट्रांसमिशन योजना पर सहमति बनी। राज्यों की सीमाओं के पार नवीकरणीय ऊर्जा खरीद को सुगम बनाने के उपाय भी चर्चा में रहे।
राष्ट्र प्रेस
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