2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

काजीरंगा ESZ विवाद: CM हिमंत बिस्वा सरमा बोले — 'कांग्रेस को बोलने का अधिकार नहीं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
काजीरंगा ESZ विवाद: CM हिमंत बिस्वा सरमा बोले — 'कांग्रेस को बोलने का अधिकार नहीं'

सारांश

काजीरंगा का ESZ विवाद अब शुद्ध पर्यावरण बहस नहीं रहा — यह असम की राजनीति का नया अखाड़ा बन गया है। CM सरमा ने कांग्रेस को 'बोलने का अधिकार नहीं' कहकर जो पलटवार किया, वह दर्शाता है कि 10 किमी बफर जोन को 1-3 किमी तक घटाने का यह प्रस्ताव अब स्थानीय अधिकार, विकास और संरक्षण की त्रिकोणीय लड़ाई बन चुका है।

मुख्य बातें

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 सितंबर को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला — कहा, 'काजीरंगा की रक्षा इंस्टाग्राम पर नहीं होगी।' असम सरकार ने काजीरंगा के 10 किलोमीटर ESZ दायरे को घटाकर 1 से 3 किलोमीटर करने का प्रस्ताव रखा है।
APCC अध्यक्ष गौरव गोगोई ने अगस्त में कोहोरा में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और प्रस्ताव वापस लेने की माँग की।
कांग्रेस ने 29 अगस्त को सोनितपुर, लखीमपुर, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट में राज्यव्यापी पदयात्राएँ आयोजित कीं।
काजीरंगा के कई स्थानीय समूहों ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया और कांग्रेस की बड़े बफर जोन की माँग का विरोध किया।
गोगोई ने क्षेत्र में कथित अवैध खनन और राज्य वन्यजीव बोर्ड में नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार, 2 सितंबर को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) में प्रस्तावित कटौती को लेकर कांग्रेस के विरोध पर तीखा पलटवार किया। सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की रक्षा सोशल मीडिया पोस्ट या राजनीतिक धरने-प्रदर्शनों से नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से होगी।

मुख्यमंत्री का सीधा हमला

मुख्यमंत्री सरमा ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष गौरव गोगोई को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा, 'गौरव गोगोई काजीरंगा की रक्षा नहीं कर सकते। काजीरंगा की सुरक्षा इंस्टाग्राम पर नहीं होगी। स्थानीय लोगों को ही काजीरंगा की रक्षा करनी होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है और तीखी टिप्पणी में जोड़ा, 'अगर शर्म नहीं है तो कांग्रेस बोले।'

ESZ विवाद की पृष्ठभूमि

असम सरकार ने काजीरंगा के आसपास प्रस्तावित या मौजूदा 10 किलोमीटर के ESZ दायरे को घटाकर अलग-अलग क्षेत्रों में 1 से 3 किलोमीटर तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का तर्क है कि इससे स्थानीय निवासियों के अधिकारों और विकास की ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा। गौरतलब है कि काजीरंगा के आसपास रहने वाले कई स्थानीय समूहों ने सरकार के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और कांग्रेस की बड़े बफर जोन की माँग के खिलाफ बैठकें तथा विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।

कांग्रेस का विरोध और माँगें

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि ESZ में कटौती से काजीरंगा के आसपास पर्यावरण सुरक्षा कमज़ोर पड़ेगी और व्यावसायिक व विकास संबंधी दबाव बढ़ेगा। अगस्त में गौरव गोगोई ने कोहोरा में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था और सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की माँग की थी। गोगोई ने काजीरंगा से जुड़े क्षेत्रों में कथित अवैध खनन और राज्य वन्यजीव बोर्ड में कुछ सदस्यों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ESZ में बदलाव से पहले पर्यावरण और खनन से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।

राज्यव्यापी आंदोलन

कांग्रेस ने अपना आंदोलन काजीरंगा से आगे बढ़ाते हुए 29 अगस्त को सोनितपुर, लखीमपुर, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट समेत कई ज़िलों में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और पदयात्राएँ आयोजित कीं। पार्टी ने ESZ कम करने का प्रस्ताव वापस लेने की माँग दोहराई। यह ऐसे समय में आया है जब यह विवाद केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि संरक्षण, विकास और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को लेकर एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री सरमा के ताज़ा बयान से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार और कांग्रेस के बीच काजीरंगा के भविष्य को लेकर टकराव और तेज़ होने की संभावना है। ESZ प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और न्यायालयी दिशानिर्देशों के दायरे में होगा, जिससे यह मामला राज्य की सीमाओं से परे राष्ट्रीय महत्व का बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ESZ कटौती के पर्यावरणीय जोखिमों का जवाब नहीं देता। काजीरंगा में एक सींग वाले गैंडे की आबादी दशकों की संरक्षण नीति की देन है — और विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि बफर जोन को 10 किमी से घटाकर 1-3 किमी करना उस पारिस्थितिक ढाँचे को कमज़ोर कर सकता है। दूसरी ओर, स्थानीय समुदायों का समर्थन सरकार के पक्ष में एक वास्तविक राजनीतिक तर्क है जिसे कांग्रेस नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। असली परीक्षा यह है कि ESZ की नई सीमाएँ वैज्ञानिक आधार पर तय होंगी या चुनावी समीकरणों के आधार पर — और इसका जवाब केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अंतिम अधिसूचना में मिलेगा।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काजीरंगा इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) विवाद क्या है?
असम सरकार ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास मौजूदा या प्रस्तावित 10 किलोमीटर के ESZ दायरे को घटाकर 1 से 3 किलोमीटर करने का प्रस्ताव रखा है। कांग्रेस इसका विरोध कर रही है, जबकि कई स्थानीय समूह सरकार के साथ हैं।
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
CM सरमा ने कहा कि कांग्रेस को काजीरंगा पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है और APCC अध्यक्ष गौरव गोगोई इंस्टाग्राम पोस्ट से उद्यान की रक्षा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि काजीरंगा की असली रक्षा स्थानीय समुदायों के हाथ में है।
कांग्रेस ने ESZ कटौती का विरोध क्यों किया है?
कांग्रेस का कहना है कि ESZ घटाने से काजीरंगा के आसपास पर्यावरण सुरक्षा कमज़ोर होगी और व्यावसायिक दबाव बढ़ेगा। पार्टी ने यह भी माँग की है कि ESZ में बदलाव से पहले कथित अवैध खनन और वन्यजीव बोर्ड नियुक्तियों के मुद्दों का समाधान हो।
काजीरंगा के स्थानीय निवासियों का इस विवाद में क्या रुख है?
काजीरंगा के आसपास रहने वाले कई समूहों और निवासियों ने सरकार के ESZ कटौती प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि ESZ की सीमा तय करने में स्थानीय लोगों की अधिक भागीदारी होनी चाहिए और बड़े बफर जोन की माँग उनके हितों के खिलाफ है।
इस विवाद में आगे क्या होने की संभावना है?
ESZ प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और न्यायालयी दिशानिर्देशों के दायरे में होगा। CM सरमा के ताज़ा बयान के बाद BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले