3 अक्टूबर 2026
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काजीरंगा इको-सेंसिटिव जोन विवाद: CM हिमंत सरमा ने कांग्रेस को घेरा, 10 किमी जोन से बस्तियाँ उजड़ने की चेतावनी

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काजीरंगा इको-सेंसिटिव जोन विवाद: CM हिमंत सरमा ने कांग्रेस को घेरा, 10 किमी जोन से बस्तियाँ उजड़ने की चेतावनी

सारांश

काजीरंगा के आसपास 10 किमी ESZ बनाम स्थानीय आजीविका — यह सिर्फ पर्यावरण बनाम विकास की बहस नहीं है। CM सरमा ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश एकसमान 10 किमी जोन अनिवार्य नहीं करते, और कांग्रेस का विरोध बोकाखाट-कालियाबोर के हज़ारों निवासियों की जमीनी हकीकत से कटा हुआ है।

मुख्य बातें

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 अगस्त को काजीरंगा ESZ कटौती का विरोध करने पर कांग्रेस की आलोचना की।
वर्तमान डिफ़ॉल्ट ESZ 10 किलोमीटर है; प्रस्ताव इसे घटाकर 1 से 3 किलोमीटर करने का है।
बोकाखाट और कालियाबोर के निवासी पहले ही सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर चुके हैं।
सरमा ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने हर संरक्षित क्षेत्र के लिए एकसमान 10 किमी जोन अनिवार्य नहीं किया है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर निशाना — सरमा ने कहा, विरोधियों को जमीनी हकीकत समझनी चाहिए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार, 17 अगस्त को काजीरंगा नेशनल पार्क के आसपास प्रस्तावित इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) कटौती का विरोध करने पर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 10 किलोमीटर का एकसमान जोन लागू रहा, तो बोकाखाट और कालियाबोर जैसी घनी आबादी वाली बस्तियाँ और वहाँ के कारोबार गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।

मुख्य घटनाक्रम

सरमा ने कहा कि वर्तमान में डिफ़ॉल्ट रूप से 10 किलोमीटर तक फैले ESZ को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप घटाकर 1 से 3 किलोमीटर के बीच किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शीर्ष अदालत ने हर संरक्षित क्षेत्र के लिए एकसमान 10 किलोमीटर का जोन अनिवार्य नहीं किया है — प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर सीमाएँ तय की जा सकती हैं।

सरमा ने सवाल उठाया, 'अगर बोकाखाट से कालियाबोर तक इको-सेंसिटिव जोन 10 किलोमीटर का होगा, तो लोग वहाँ कैसे रहेंगे?' उन्होंने आगे चेतावनी दी, 'अगर इको-सेंसिटिव जोन 10 किलोमीटर का होगा, तो कालियाबोर और बोकाखाट के लोग भी उजड़ जाएंगे।'

स्थानीय समुदायों की चिंताएँ

सरमा ने बताया कि बोकाखाट और कालियाबोर के निवासियों ने इस मुद्दे पर पहले ही सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। स्थानीय समुदाय लंबे समय से आवासीय क्षेत्रों, आजीविका और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगने वाले प्रतिबंधों को लेकर चिंतित हैं। मुख्यमंत्री ने इस बहस को राजनीतिक चश्मे से न देखकर काजीरंगा के आसपास रहने वाले लोगों की जमीनी हकीकत के नज़रिए से देखने की अपील की।

कांग्रेस पर निशाना

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलाव का विरोध करने वालों को पहले निवासियों की चिंताओं और जमीनी स्थिति को समझना चाहिए। उनका तर्क था कि 10 किलोमीटर का ESZ बनाए रखने से पार्क के आसपास मौजूद बड़े आर्थिक प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढाँचे पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

सरकार का रुख

असम सरकार का स्पष्ट पक्ष है कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों व आजीविका के बीच संतुलन ज़रूरी है। सरमा के अनुसार, प्रस्तावित ESZ कटौती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संरक्षण के उपाय काजीरंगा के आसपास विकसित हुई बस्तियों और आर्थिक गतिविधियों पर अनावश्यक बोझ न डालें। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में संरक्षित वन क्षेत्रों के ESZ को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच तनाव बना हुआ है।

आगे क्या होगा

प्रस्तावित ESZ सीमाएँ सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप अंतिम रूप दी जाएंगी। गौरतलब है कि काजीरंगा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और यहाँ एक सींग वाले गैंडे की सबसे बड़ी आबादी निवास करती है — इसलिए किसी भी नीतिगत बदलाव पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नज़र रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काजीरंगा इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) क्या है और इसे क्यों घटाने की माँग हो रही है?
इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास का वह बफर क्षेत्र है जहाँ निर्माण, खनन और कुछ व्यावसायिक गतिविधियाँ प्रतिबंधित होती हैं। काजीरंगा के आसपास यह डिफ़ॉल्ट रूप से 10 किलोमीटर तक फैला है, जिससे बोकाखाट और कालियाबोर जैसी घनी बस्तियों में रहने वाले लोगों की आजीविका और आवास प्रभावित हो रहे हैं — इसीलिए इसे 1 से 3 किलोमीटर तक घटाने का प्रस्ताव है।
सुप्रीम कोर्ट ने ESZ को लेकर क्या निर्देश दिए हैं?
CM सरमा के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने हर संरक्षित क्षेत्र के लिए एकसमान 10 किलोमीटर का ESZ अनिवार्य नहीं किया है। अदालत ने स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लचीली सीमाएँ तय करने की गुंजाइश रखी है, और काजीरंगा की प्रस्तावित सीमाएँ इन्हीं दिशानिर्देशों के अनुरूप तय की जाएंगी।
CM सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की आलोचना क्यों की?
सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रस्तावित ESZ कटौती का विरोध करने वालों को बोकाखाट और कालियाबोर के निवासियों की जमीनी हकीकत और चिंताओं को समझना चाहिए। उनका तर्क था कि यह बहस राजनीतिक नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और आजीविका से जुड़ी है।
10 किमी ESZ बने रहने से बोकाखाट और कालियाबोर पर क्या असर होगा?
सरमा ने चेतावनी दी कि 10 किलोमीटर का ESZ बनाए रखने से बोकाखाट और कालियाबोर की बस्तियाँ व्यावहारिक रूप से उजड़ सकती हैं। इससे आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और पार्क के आसपास विकसित हुए बुनियादी ढाँचे पर गंभीर प्रतिबंध लग जाएंगे।
काजीरंगा ESZ विवाद में आगे क्या होने की संभावना है?
प्रस्तावित ESZ सीमाएँ सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप अंतिम रूप दी जाएंगी। चूँकि काजीरंगा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, किसी भी नीतिगत बदलाव पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नज़र रहेगी। स्थानीय निवासी पहले ही अदालत का रुख कर चुके हैं, इसलिए अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया से ही निकलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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