9 जुलाई 2026
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एआई डेटा सेंटर की वैश्विक दौड़ में भारत तीसरे स्थान पर, गूगल-अदाणी का अरबों डॉलर का दांव

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एआई डेटा सेंटर की वैश्विक दौड़ में भारत तीसरे स्थान पर, गूगल-अदाणी का अरबों डॉलर का दांव

सारांश

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक होड़ में भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है — गूगल का $15 अरब और अदाणी ग्रुप का $100 अरब का दांव, मुंबई-चेन्नई-विशाखापट्टनम में हाइपरस्केल हब और 2047 तक टैक्स हॉलिडे जैसी सरकारी नीतियाँ मिलकर भारत को अमेरिका और चीन के बाद तीसरी बड़ी एआई ताकत बनाने की दिशा में धकेल रही हैं।

मुख्य बातें

गूगल ने भारत में $15 अरब और अदाणी ग्रुप ने 2035 तक $100 अरब के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की घोषणा की है।
अनुमान है कि इस दशक के अंत तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर 6.5 गीगावाट हो जाएगी।
प्रमुख हब मुंबई , चेन्नई और विशाखापट्टनम हैं; हैदराबाद व पुणे भी तेज़ी से विस्तार कर रहे हैं।
सरकार ने ग्रीन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रावधान किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में केवल अमेरिका और चीन से पीछे तीसरे स्थान पर है।

भारत एआई डेटा सेंटर की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक निर्णायक दावेदार के रूप में उभरा है। रिपोर्टों के अनुसार, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियाँ और देश के प्रमुख कारोबारी समूह मिलकर भारत में अगली पीढ़ी के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर अरबों डॉलर लगा रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, इस दशक के अंत तक भारत की परिचालन डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर लगभग 6.5 गीगावाट हो जाने का अनुमान है।

निवेश के प्रमुख केंद्र

अधिकांश निवेश फिलहाल मुंबई और चेन्नई के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जो समुद्र के नीचे बिछे अंडरसी केबल नेटवर्क के निकट होने के कारण हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स के लिए आदर्श स्थान माने जाते हैं। देश के पूर्वी तट पर आंध्र प्रदेश का विशाखापट्टनम तेज़ी से एक उभरते हब के रूप में पहचान बना रहा है। इसके अलावा, हैदराबाद और पुणे जैसे अंदरूनी प्रौद्योगिकी केंद्र भी अपने क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज़ी से विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारत की डिजिटल पहुँच तटीय सीमाओं से आगे बढ़ रही है।

दिग्गज कंपनियों का बड़ा दांव

गूगल ने भारत में 15 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं, अदाणी ग्रुप ने 2035 तक 5 गीगावाट का एआई प्लेटफॉर्म खड़ा करने के लिए 100 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी बढ़त बनाए रखने की होड़ में हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियाँ

इन सुविधाओं के संचालन के लिए अत्यधिक मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है, ताकि उच्च-ताप उत्पन्न करने वाले विशेष कंप्यूटिंग हार्डवेयर को ठंडा रखा जा सके। ये परियोजनाएँ मज़बूत पावर ग्रिड, उच्च क्षमता वाली फाइबर-ऑप्टिक कनेक्टिविटी और नवीकरणीय ऊर्जा तक बढ़ती पहुँच पर भी निर्भर करती हैं। गौरतलब है कि भारत में बिजली आपूर्ति की असमानता और जल संसाधनों पर दबाव इन परियोजनाओं के सामने दीर्घकालिक परिचालन चुनौतियाँ पेश कर सकते हैं।

सरकार की सहयोगी नीति

केंद्र सरकार की अनुकूल नीतियाँ इन परियोजनाओं को गति देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। डेवलपर्स को रियायती दरों पर दीर्घकालिक वित्त पोषण और कर में बड़ी छूट दी जा रही है। विशेष रूप से, ग्रीन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे का प्रावधान किया गया है — जो भारत के शताब्दी वर्ष लक्ष्य से जुड़ी एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति

रिपोर्टों के अनुसार, भारी निवेश, सरकार की सहयोगी नीति और तेज़ी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम के बल पर भारत वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में केवल अमेरिका और चीन से पीछे, तीसरे स्थान पर पहुँचने की राह पर है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को घरेलू एआई नवाचार और रोज़गार सृजन में कितनी कुशलता से परिवर्तित कर पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ कुछ अनुत्तरित सवाल भी हैं। $100 अरब और $15 अरब की घोषणाएँ वादे हैं, जमीनी हकीकत नहीं — और भारत में बड़े बुनियादी ढाँचे के वादों और उनके क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रही है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि ये हाइपरस्केल सुविधाएँ मुख्यतः विदेशी कंपनियों की कंप्यूटिंग ज़रूरतें पूरी करती हैं — सवाल यह है कि भारत केवल 'डेटा सेंटर का मेज़बान' बनेगा या एआई नवाचार का असली उत्पादक भी? बिजली और जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव, और 2047 तक टैक्स हॉलिडे जैसी दीर्घकालिक रियायतें, इस 'जीत' की वास्तविक कीमत का आकलन करने की माँग करती हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में एआई डेटा सेंटर के लिए कौन-सी कंपनियाँ निवेश कर रही हैं?
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियाँ और अदाणी ग्रुप जैसे भारतीय कारोबारी समूह भारत में एआई डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर लगा रहे हैं। गूगल ने $15 अरब और अदाणी ग्रुप ने 2035 तक $100 अरब निवेश की घोषणा की है।
भारत में एआई डेटा सेंटर के लिए कौन-से शहर प्रमुख हब हैं?
मुंबई और चेन्नई अंडरसी केबल नेटवर्क की निकटता के कारण प्रमुख हब हैं। विशाखापट्टनम पूर्वी तट पर तेज़ी से उभर रहा है, जबकि हैदराबाद और पुणे भी अपना क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार कर रहे हैं।
भारत की एआई डेटा सेंटर क्षमता कितनी होगी?
अनुमान है कि इस दशक के अंत तक भारत की परिचालन डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर लगभग 6.5 गीगावाट हो जाएगी। यह वृद्धि हाइपरस्केल एआई परियोजनाओं में भारी निवेश से संभव होगी।
सरकार एआई डेटा सेंटर परियोजनाओं को कैसे प्रोत्साहित कर रही है?
केंद्र सरकार डेवलपर्स को रियायती दरों पर दीर्घकालिक वित्त पोषण और कर में बड़ी छूट दे रही है। ग्रीन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे का प्रावधान भी किया गया है।
वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में भारत की क्या स्थिति है?
रिपोर्टों के अनुसार, भारत वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर पहुँचने की राह पर है। भारी विदेशी और घरेलू निवेश, सरकार की अनुकूल नीतियाँ और तेज़ी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम इसे संभव बना रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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