योगी सरकार का बड़ा फैसला: शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप व बहस फीस में 50% तक वृद्धि, 14 साल बाद संशोधन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 5 जून 2025 को राज्य के विभिन्न न्यायालयों में सरकार का पक्ष रखने वाले शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप एवं बहस फीस में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए इस फैसले का अधिवक्ता समुदाय ने व्यापक स्वागत किया है और इसे न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।
निर्णय का दायरा और लाभार्थी
यह वृद्धि केवल वरिष्ठ स्तर तक सीमित नहीं है — इसका लाभ अधिवक्ता श्रेणियों की पूरी शृंखला को मिलेगा। जनपद न्यायालयों में कार्यरत जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक एवं उप जिला शासकीय अधिवक्ता, नामित अधिवक्ता, विशेष अधिवक्ता तथा न्याय मित्र — सभी इस निर्णय से लाभान्वित होंगे।
इसके साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ तथा सर्वोच्च न्यायालय में राज्य का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता, मुख्य स्थायी अधिवक्ता, स्थायी अधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता, ब्रीफ होल्डर, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड तथा विभिन्न श्रेणी के पैनल अधिवक्ताओं को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।
कितने वर्षों बाद हुआ संशोधन
अधिवक्ताओं के अनुसार, जनपद न्यायालयों में कार्यरत शासकीय अधिवक्ताओं की फीस में लगभग 10 वर्ष बाद पहली बार संशोधन किया गया है, जबकि महाधिवक्ता स्तर पर यह अंतराल लगभग 14 वर्ष का रहा। बदलते न्यायिक परिदृश्य, मुकदमों की बढ़ती संख्या और जटिल विधिक विषयों के मद्देनज़र पारिश्रमिक संरचना के पुनरीक्षण की माँग लंबे समय से उठाई जा रही थी।
गौरतलब है कि इस दौरान अधिवक्ताओं की जिम्मेदारियाँ और कार्यभार दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, किंतु पारिश्रमिक ढाँचा वर्षों तक अपरिवर्तित रहा।
अधिवक्ता समुदाय की प्रतिक्रिया
राज्य के महाधिवक्ता और उनकी पूरी टीम ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। अधिवक्ताओं ने जारी बयान में कहा कि यह फैसला 'केवल फीस वृद्धि का विषय नहीं' है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय से अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और राज्य के महत्वपूर्ण मामलों में सरकार का पक्ष अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
न्यायिक व्यवस्था पर व्यापक असर
विशेषज्ञों के अनुसार, शासकीय अधिवक्ताओं के पारिश्रमिक में वृद्धि से न्यायालयों में राज्य सरकार के मामलों की गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध पैरवी को बल मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के न्यायालयों में लंबित मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है और राज्य सरकार सुशासन के एजेंडे पर जोर दे रही है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यह निर्णय राज्य हितों की रक्षा, सुशासन की मजबूती तथा न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस संशोधित पारिश्रमिक ढाँचे के लागू होने के बाद न्यायालयों में सरकारी पक्ष की पैरवी की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।