उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन को कैबिनेट ने दी हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने आज उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति दी है। उच्च न्यायालय की सिफारिश पर, उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की जाएगी। इस नए नियमावली में भर्ती, कोटा और चयन प्रक्रिया से संबंधित कई नियमों में परिवर्तन किया गया है। इस संशोधन के अंतर्गत, भर्ती के स्रोत से संबंधित नियम-5, कोटा से संबंधित नियम-6, चयन प्रक्रिया के नियम-18, पदोन्नति के नियम-20, नियुक्ति के नियम-22 और परिशिष्ट-1 में संशोधन किया जाएगा।
नवीनतम व्यवस्था के अनुसार, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के लिए पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया गया है। यह पदोन्नति श्रेष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर तथा उपयुक्तता परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को दी जाएगी। इसके साथ ही, सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा द्वारा पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया है। इसमें वही सिविल जज शामिल होंगे जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कम से कम सात साल की सेवा पूरी की हो। इसके अलावा, अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।
कैबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। बुंदेलखंड पैकेज के तहत जनपद बांदा में 20,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता के नए डेयरी प्लांट की स्थापना और झांसी में पहले से स्थापित 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लांट का विस्तार कर उसे 30,000 लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इन परियोजनाओं के सिविल और मैकेनिकल कार्यों को टर्न-की आधार पर कराने के लिए इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी लि. को कार्यदायी संस्था के रूप में चुना गया है।
कैबिनेट ने इस कंपनी को नियमानुसार सेंटेज चार्ज देने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया है, जिसका व्यय राज्य सरकार अपने स्रोतों से वहन करेगी। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है और यहाँ दुग्ध उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस प्रकार, बुंदेलखंड क्षेत्र में डेयरी प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने से दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का बेहतर और बाजार आधारित मूल्य प्राप्त होगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र में दूध के खराब होने की समस्या कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और बुंदेलखंड में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह पहल प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में भी सहायक सिद्ध होगी।
कैबिनेट ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत टीआई मेडिकल्स प्रा. लि. को भूमि सब्सिडी प्रदान करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। कंपनी द्वारा गौतमबुद्ध नगर स्थित यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) के मेडिकल डिवाइस पार्क में 4.48 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 215.20 करोड़ रुपये के निवेश से चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की एफडीआई, एफसीआई और फॉर्च्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत प्रस्तावित है।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, कंपनी को अनुमन्य सब्सिडी के तहत 14.77 करोड़ रुपये की राशि प्रतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाएगी। यह राशि केंद्र सरकार की मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अंतर्गत पहले से प्राप्त सब्सिडी को समायोजित करने के बाद दी जाएगी। इस निवेश से प्रदेश में चिकित्सा उपकरण निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह पहल राज्य को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में सहायक होगी। इस परियोजना से संबंधित प्रस्ताव पर पहले विभिन्न स्तरों पर विचार किया गया था।
उत्तर प्रदेश की एफडीआई, एफसीआई और फॉर्च्यून ग्लोबल 500/फॉर्च्यून इंडिया 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत प्राधिकृत समिति की 5 जुलाई 2024 को हुई बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी और कंपनी को 22 जुलाई 2024 को पात्रता प्रमाणपत्र भी जारी किया गया। बाद में 15 मई 2025 को हुई इम्पावर्ड कमेटी की बैठक में सब्सिडी से जुड़े बिंदुओं पर विचार किया गया। मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अंतर्गत कंपनी को पहले से केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी प्राप्त हो चुकी है।
इसी आधार पर एफडीआई नीति के तहत अनुमन्य कुल सब्सिडी 41.52 करोड़ रुपये में से पहले प्राप्त सब्सिडी घटाकर शेष 14.77 करोड़ रुपये की राशि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा कंपनी को प्रतिपूर्ति के रूप में देने का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे अब मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिल गई है।