गाय को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दो — वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार की केंद्र से माँग
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में गोरक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार से व्यापक केंद्रीय कानून बनाने की माँग एक बार फिर दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाय को 'राष्ट्र माता' अथवा 'राष्ट्रीय धरोहर' का संवैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए और कामधेनु आयोग को और अधिक शक्तिशाली बनाया जाना चाहिए।
गोरक्षा पर वीएचपी की पुरानी और दोहराई गई माँग
आलोक कुमार ने कहा कि गायों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय स्तर पर कानून बनाने की माँग कोई नई नहीं है — वीएचपी 1948 से ही इस विषय पर दबाव बनाती आ रही है। उन्होंने गोरक्षा के लिए अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गायों के संरक्षण के लिए प्रभावी और व्यापक व्यवस्था की आवश्यकता है। कामधेनु आयोग की शक्तियों और कार्यक्षमता को बढ़ाए जाने की माँग भी उन्होंने दोहराई, ताकि आयोग प्रभावी तरीके से काम कर सके।
राम मंदिर चंदे पर विपक्षी आरोपों को खारिज किया
राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर आलोक कुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीतिक बयानबाजी से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने 1990 की अयोध्या घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कीर्तन कर रहे 16 कारसेवक पुलिस की गोलीबारी में मारे गए थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बाद में संसद में एक बहस के दौरान राम गोपाल यादव ने कथित तौर पर कहा था कि मस्जिद को बचाने के लिए चाहे 16 या 30 लोग मारे जाते, तब भी वे मस्जिद बचाते। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने 2006 में एक हलफनामा दिया था, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि भगवान राम के अस्तित्व को साबित करने के लिए कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
सुखबीर सिंह बादल पर हमले की निंदा
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि हिंसा की हर घटना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता पर हमला लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इस घटना की पूरी जाँच होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियाँ जल्द सामने आएंगी।
एफसीआरए विधेयक पर जेपीसी समीक्षा का समर्थन
विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को आलोक कुमार ने देश के हित में जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक पर उठने वाले सवालों पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में विस्तार से चर्चा की जा सकती है। उनके अनुसार, संसदीय प्रक्रिया के बाद एक बेहतर और प्रभावी कानून सामने आएगा। यह ऐसे समय में आया है जब FCRA संशोधन को लेकर नागरिक समाज संगठनों में बेचैनी बनी हुई है।