26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार बोले — CEO नियुक्त करो, दोषियों को जेल भेजो

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राम मंदिर चढ़ावा विवाद: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार बोले — CEO नियुक्त करो, दोषियों को जेल भेजो

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद सिर्फ चोरी की खबर नहीं — यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर उठा सवाल है। वीएचपी अध्यक्ष ने CEO नियुक्ति और तकनीक-आधारित निगरानी की माँग की, तो आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मामले को ₹1,000 करोड़ का बताया। जाँच की रफ्तार और ट्रस्ट के अगले कदम ही भरोसा बहाल करेंगे।

मुख्य बातें

वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने राम मंदिर में तत्काल एक पेशेवर CEO की नियुक्ति और अचूक प्रशासनिक व्यवस्था की माँग की।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा FIR की त्वरित जाँच और दोषियों को जेल भेजने से ही लोगों का भरोसा बहाल होगा।
सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने जवाबदेही तय करने और पुनरावृत्ति रोकने के उपायों की माँग की।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दावा किया कि यह मामला ₹200 करोड़ नहीं, बल्कि ₹1,000 करोड़ का है।
समाजवादी पार्टी के सवालों को वीएचपी ने 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीति करार दिया।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 26 जून 2026 को गाजियाबाद में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में बिना किसी देरी के एक सुदृढ़ और अचूक प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि FIR की त्वरित जाँच, दोषियों को सज़ा और एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति ही लोगों का भरोसा बहाल करने का एकमात्र रास्ता है।

वीएचपी अध्यक्ष ने सुझाया सुधार का रोडमैप

आलोक कुमार ने कहा कि मंदिर प्रशासन में ऊपर से नीचे तक एकसमान कार्यप्रणाली लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'ऐसे लोगों की भर्ती की जानी चाहिए जिन पर उनकी पेशेवर क्षमता और ईमानदारी के लिए भरोसा किया जा सके। साथ ही जरूरी उपकरण और तकनीक भी हों।' उनके अनुसार एक ऐसे वरिष्ठ अधिकारी की ज़रूरत है जिसके पास प्रशासनिक अनुभव हो और जो पूर्णतः समर्पित हो।

उन्होंने जोर दिया कि व्यवस्था ऐसी हो जिसमें 'भगवान के पैसे का एक रुपया भी इधर-उधर न हो, तीर्थयात्रियों को दर्शन के लिए अधिकतम सुविधाएँ मिलें और उनकी यात्रा सार्थक हो।' कुमार ने भरोसा जताया कि मंदिर ट्रस्टी अब इन व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करेंगे।

जाँच और सज़ा पर जोर

आलोक कुमार ने कहा कि सबसे ज़रूरी कदम यह है कि अनुभवी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस FIR की तेज़ी से जाँच करें। उन्होंने कहा, 'सभी आरोपों की पूरी तरह से जाँच हो, सभी दोषियों को ईमानदारी से सज़ा दिलाई जाए और उन्हें दोषी ठहराकर जेल भेजा जाए। अगर ऐसा होता है, तो लोगों का भरोसा फिर से बहाल होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि श्रीराम और भक्तों के बीच का रिश्ता अटूट है और इसे कोई कमज़ोर नहीं कर सकता।

विपक्ष के सवालों पर वीएचपी का पलटवार

समाजवादी पार्टी द्वारा इस मामले पर उठाए गए सवालों पर आलोक कुमार ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से राम और राम मंदिर का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा, 'वे 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार कर रहे हैं, इसलिए मैं उनके बयानों को बहुत गंभीरता से नहीं लेता।' यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है।

कानूनी और धार्मिक जगत की प्रतिक्रिया

गाजियाबाद से सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने कहा कि श्रीराम मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित चढ़ावे को लेकर कथित तौर पर घोटाला, चोरी और गबन हुआ है। उन्होंने तीन मूल प्रश्न उठाए — इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह कैसे हुआ और इसे दोबारा होने से रोकने के लिए क्या उपाय होंगे। उनका मत था कि 'दोषी चाहे जितना बड़ा हो, बचना नहीं चाहिए, निर्दोष को सज़ा नहीं होनी चाहिए।'

धर्माचार्य आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस मामले को और गंभीर बताते हुए कहा कि 'यह चोरी किसी व्यापारी की दुकान या किसी बिजनेसमैन की फैक्ट्री में नहीं हुई है — यह लोगों की आस्था की लूट है।' उन्होंने दावा किया कि यह मामला केवल ₹200 करोड़ का नहीं, बल्कि ₹1,000 करोड़ का है और इस 'पाप' के ज़िम्मेदारों की पहचान होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पारदर्शी जाँच के लिए भरोसा करती है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह विवाद राम मंदिर के प्रशासनिक ढाँचे पर व्यापक सवाल खड़े करता है, जो अब तक स्वैच्छिक सेवाओं पर अधिक निर्भर रहा है। वीएचपी की माँग — एक पेशेवर CEO, तकनीक-आधारित निगरानी और जवाबदेही तंत्र — अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने प्रमुख एजेंडा बन गई है। जाँच की गति और ट्रस्ट की अगली बैठक के निर्णय ही तय करेंगे कि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कितनी जल्दी बहाल हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि ट्रस्ट स्वतंत्र ऑडिट और सत्यापन-योग्य जवाबदेही तंत्र को स्वीकार करता है या नहीं। आचार्य प्रमोद कृष्णम का ₹1,000 करोड़ का दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है, फिर भी यह आँकड़ा सार्वजनिक विमर्श में स्थापित हो चुका है — जो मीडिया और जाँच एजेंसियों दोनों के लिए एक गंभीर जिम्मेदारी है। विपक्ष को 'राम-विरोधी' बताकर खारिज करना आसान है, लेकिन जवाबदेही के सवाल दलगत राजनीति से परे हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित चढ़ावे में कथित तौर पर घोटाला, चोरी और गबन का आरोप लगा है। इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है और जाँच जारी है।
वीएचपी अध्यक्ष ने भरोसा बहाल करने के लिए क्या सुझाव दिए?
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने तीन प्रमुख सुझाव दिए — एक अनुभवी CEO की नियुक्ति, तकनीक और उपकरण आधारित निगरानी व्यवस्था, और FIR की त्वरित जाँच कर दोषियों को जेल भेजना।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस मामले में कितनी राशि का दावा किया?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह मामला केवल ₹200 करोड़ का नहीं, बल्कि ₹1,000 करोड़ का है। हालाँकि यह दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
समाजवादी पार्टी के सवालों पर वीएचपी का क्या जवाब है?
वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से राम और राम मंदिर की विरोधी रही है और वह 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक प्रचार कर रही है। इसलिए उनके बयानों को वे गंभीरता से नहीं लेते।
राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में अब क्या बदलाव अपेक्षित हैं?
वीएचपी और कानूनी विशेषज्ञों की माँग है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक पेशेवर CEO नियुक्त करे, ऊपर से नीचे तक एकसमान कार्यप्रणाली लागू करे और तकनीक-आधारित वित्तीय निगरानी व्यवस्था स्थापित करे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 10 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. 3 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले