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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर VHP अध्यक्ष आलोक कुमार: दोषियों को कठोरतम सजा मिले, बार एसोसिएशन का प्रस्ताव कानूनी दृष्टि से अनुचित

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर VHP अध्यक्ष आलोक कुमार: दोषियों को कठोरतम सजा मिले, बार एसोसिएशन का प्रस्ताव कानूनी दृष्टि से अनुचित

सारांश

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी पर VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने दोषियों को कठोरतम सजा की माँग की, लेकिन साथ ही बार एसोसिएशन के 'पैरवी न करने' के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट की 2011 की व्यवस्था का हवाला देते हुए संविधान-विरुद्ध बताया।

मुख्य बातें

VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
उन्होंने माँग की कि दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर रोज़ाना सुनवाई के साथ कठोर दंड दिया जाए।
अयोध्या बार एसोसिएशन के 'आरोपियों की पैरवी न करने' के प्रस्ताव को आलोक कुमार ने कानूनी दृष्टि से अनुचित और 'अधिक राजनीतिक' बताया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 में कोयंबटूर बार एसोसिएशन के समान प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 21 के विरुद्ध माना था।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सुझाव पर आलोक कुमार ने कहा कि ट्रस्टियों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 30 जून 2025 को अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण' घटना करार देते हुए माँग की कि दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध रोज़ाना सुनवाई के साथ कठोर दंड सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साथ ही अयोध्या बार एसोसिएशन के उस प्रस्ताव को कानूनी दृष्टि से अनुचित बताया, जिसमें कोई भी वकील आरोपियों की पैरवी न करने का निर्णय लिया गया है।

आलोक कुमार की मुख्य प्रतिक्रिया

आलोक कुमार ने कहा, 'राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी बेहद दुखद है। चोरी हुई है और हम सबको इसका दुख है। यह बहुत कष्ट की बात है और ऐसा नहीं होना चाहिए था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना का 'वास्तविक प्रायश्चित' तभी होगा जब दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए, उनके खिलाफ मुकदमा कायम हो, रोज़ाना सुनवाई हो और उन्हें उचित दंड मिले।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर देशभर में चर्चा चल रही है। गौरतलब है कि मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा अर्पित चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करना ट्रस्ट की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।

बार एसोसिएशन के प्रस्ताव पर कानूनी सवाल

अयोध्या बार एसोसिएशन ने यह प्रस्ताव पारित किया है कि उसके कोई भी सदस्य वकील इस मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे। आलोक कुमार ने इस पर कहा, 'यह तो स्पष्ट है कि चढ़ावे की चोरी हुई है और मेरी उनसे कोई सहानुभूति नहीं हो सकती। उन्हें जेल जाना चाहिए और अपने कर्मों का परिणाम भुगतना चाहिए। लेकिन यह प्रस्ताव मुझे कुछ अधिक राजनीतिक प्रतीत होता है।'

उन्होंने वर्ष 2011 के एक मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय कोयंबटूर बार एसोसिएशन ने भी एक आरोपी की पैरवी न करने का प्रस्ताव पारित किया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को न्यायालय में अपना बचाव करने का अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रोफेशनल एथिक्स के नियमों का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि यदि कोई व्यक्ति निर्धारित फीस देकर किसी वकील के पास जाता है, तो वकील केवल इस आधार पर मुकदमा लड़ने से इनकार नहीं कर सकता।

आलोक कुमार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे प्रस्तावों को संविधान, कानून और पेशेवर नैतिकता के विरुद्ध माना था, इसलिए अयोध्या बार एसोसिएशन को उस निर्णय का अध्ययन करना चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री के सुझाव पर प्रतिक्रिया

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कथित तौर पर सुझाव दिया था कि राम मंदिर में भगवान की सेवा का कार्य केवल सनातनी वैष्णव और संत परंपरा के पूर्ण समर्पित लोगों को ही सौंपा जाना चाहिए। इस पर आलोक कुमार ने कहा कि 'ट्रस्टियों को इस विषय पर पूरी गंभीरता से विचार करना चाहिए।'

आगे क्या होगा

इस मामले में राजनीतिक बयानबाज़ी जारी रहने की संभावना है। VHP के रुख से स्पष्ट है कि धार्मिक संगठन त्वरित न्यायिक कार्रवाई चाहते हैं। साथ ही, बार एसोसिएशन के प्रस्ताव को कानूनी चुनौती मिल सकती है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व व्यवस्था इसके विरुद्ध है। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भविष्य में कोई ठोस घोषणा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरा कानूनी संयम का। यह उल्लेखनीय है कि VHP जैसे संगठन का शीर्ष नेतृत्व बार एसोसिएशन के भावनात्मक प्रस्ताव को संविधान-विरुद्ध बता रहा है, जो दर्शाता है कि धार्मिक भावना और विधि-सम्मत प्रक्रिया के बीच की रेखा इस मामले में भी महत्वपूर्ण है। असली सवाल यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट सुरक्षा व्यवस्था में क्या संरचनात्मक सुधार करेगा — क्योंकि बयानबाज़ी से चढ़ावे की सुरक्षा नहीं होती। धीरेंद्र शास्त्री के सुझाव पर आलोक कुमार की सतर्क प्रतिक्रिया यह भी संकेत देती है कि मंदिर प्रशासन के भीतर सेवा-नियुक्ति को लेकर विमर्श अभी खुला है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला क्या है?
अयोध्या राम मंदिर में कथित तौर पर भक्तों द्वारा अर्पित चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया है, जिसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। VHP सहित कई संगठनों ने इसे गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है।
VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस मामले में क्या माँग की?
VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने माँग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, उनके विरुद्ध मुकदमा कायम हो, रोज़ाना सुनवाई हो और उन्हें कठोर दंड दिया जाए। उन्होंने इसे घटना का 'वास्तविक प्रायश्चित' बताया।
अयोध्या बार एसोसिएशन के प्रस्ताव पर आलोक कुमार ने क्या कहा?
आलोक कुमार ने बार एसोसिएशन के 'आरोपियों की पैरवी न करने' के प्रस्ताव को कानूनी दृष्टि से उचित नहीं माना और इसे 'अधिक राजनीतिक' बताया। उन्होंने 2011 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें ऐसे प्रस्तावों को संविधान के अनुच्छेद 21 के विरुद्ध माना गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के बहिष्कार प्रस्तावों पर क्या कहा है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 में कोयंबटूर बार एसोसिएशन के एक समान प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 21 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रोफेशनल एथिक्स के नियमों के विरुद्ध माना था। अदालत ने कहा था कि निर्धारित फीस देने पर वकील केवल इस आधार पर मुकदमा लड़ने से इनकार नहीं कर सकता।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने राम मंदिर सेवा को लेकर क्या सुझाव दिया?
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कथित तौर पर सुझाव दिया कि राम मंदिर में भगवान की सेवा का कार्य केवल सनातनी वैष्णव और संत परंपरा के पूर्ण समर्पित लोगों को सौंपा जाना चाहिए। VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस पर कहा कि ट्रस्टियों को इस विषय पर पूरी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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