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राम मंदिर चंदा घोटाला: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार की माँग — तुरंत एफआईआर दर्ज हो, 4-5 महीने में दोषियों को सजा मिले

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राम मंदिर चंदा घोटाला: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार की माँग — तुरंत एफआईआर दर्ज हो, 4-5 महीने में दोषियों को सजा मिले

सारांश

राम मंदिर चंदा प्रकरण अब केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं रहा — वीएचपी जैसे संगठन की तत्काल एफआईआर और फास्ट ट्रैक सुनवाई की माँग इसे धार्मिक आस्था और संस्थागत जवाबदेही की बड़ी लड़ाई बना रही है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में गबन के संकेत मिलने के बाद अब सवाल है — ट्रस्ट का भविष्य क्या होगा?

मुख्य बातें

वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 25 जून 2025 को राम मंदिर चंदा प्रकरण में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की माँग की।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ व्यक्तियों द्वारा धन के गबन की बात सामने आई है।
माँग की गई कि सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोज़ाना हो और 4-5 महीनों में दोषियों को सजा मिले।
आलोक कुमार ने चंपत राय और डॉ.
अनिल मिश्रा को समर्पित व्यक्ति बताया, परंतु इस्तीफे का निर्णय उन पर छोड़ा।
विपक्षी दलों पर 2027 चुनावों को ध्यान में रखकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
ट्रस्ट में एसओपी और प्रशासनिक सुधार की माँग; पुलिस जाँच पर किसी दबाव का विरोध।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या राम मंदिर चंदा प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए 25 जून 2025 को माँग की कि इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और दोषियों को चार से पाँच महीनों के भीतर सजा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन का दुरुपयोग या गबन हिंदू समाज की आस्था पर सीधा प्रहार है।

एसआईटी रिपोर्ट और गबन के आरोप

आलोक कुमार ने बताया कि मामले की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ व्यक्तियों द्वारा धन के गबन की बात सामने आई है। उन्होंने कहा, 'यह पूरा मामला बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। अब और प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं — एफआईआर तुरंत दर्ज होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि जाँच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हो और उन्हें आवश्यक तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई की माँग

वीएचपी अध्यक्ष ने माँग की कि जाँच शीघ्र पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जाए और इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन के आधार पर हो। उनके अनुसार यदि अगले चार से पाँच महीनों के भीतर सभी दोषियों को सजा मिलकर जेल भेज दिया जाता है, तो हिंदू समाज को संतोष प्राप्त होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर व्यापक सवाल उठ रहे हैं।

ट्रस्टियों और प्रशासनिक सुधार पर रुख

ट्रस्टियों को एफआईआर में शामिल किए जाने के प्रश्न पर आलोक कुमार ने किसी का नाम लेने से परहेज करते हुए कहा कि पूरे तंत्र का पेशेवर तरीके से संचालन होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले लोगों को व्यवस्था से जोड़ा जाए, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) बनाई जाएँ और ऐसी मज़बूत व्यवस्था विकसित की जाए कि भविष्य में रामजी की संपत्ति पर कोई गलत नज़र न डाल सके। उन्होंने चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को व्यक्तिगत रूप से समर्पित एवं भावनात्मक व्यक्ति बताया, परंतु यह भी स्पष्ट किया कि इस्तीफे का निर्णय उन्हें स्वयं करना है।

विपक्ष पर राजनीति का आरोप

आलोक कुमार ने विपक्षी दलों पर 2027 के चुनावों को ध्यान में रखकर इस मुद्दे का राजनीतिक दोहन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन दलों ने राम मंदिर निर्माण में बाधाएँ डालीं, कारसेवकों पर गोली चलवाई और आज तक माफी नहीं माँगी, वे अब इस प्रकरण पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दलों ने सर्वोच्च न्यायालय तक जाकर भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताया था। उनके अनुसार, स्वतंत्रता के बाद राम मंदिर का संघर्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और समाजवादी पार्टी की नीतियों के विरुद्ध था।

आगे क्या होगा

आलोक कुमार ने विश्वास जताया कि शीघ्र ही एफआईआर दर्ज होगी और पुलिस इस मामले की गंभीरता से जाँच करेगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पुलिस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए और ईमानदार जाँच से सच्चाई अवश्य सामने आएगी। गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन की यह जाँच देश भर के हिंदू समाज की नज़रों में है, और इसका परिणाम ट्रस्ट की विश्वसनीयता के लिए निर्णायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों मिलकर एक बड़ा प्रश्न खड़ा करते हैं: क्या ट्रस्ट की संरचना में जवाबदेही के तंत्र पर्याप्त थे? विपक्ष पर राजनीति का आरोप लगाना स्वाभाविक है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह चूक जाती है कि वीएचपी की यह माँग स्वयं सरकार और ट्रस्ट पर अप्रत्यक्ष दबाव है। असली परीक्षा यह है कि एफआईआर दर्ज होती है या नहीं — और यदि होती है, तो क्या जाँच की दिशा ट्रस्ट के शीर्ष तक पहुँचती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा प्रकरण क्या है?
अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन के कथित दुरुपयोग और गबन का यह मामला है, जिसकी जाँच के लिए एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ व्यक्तियों द्वारा धन के गबन के संकेत मिले हैं।
वीएचपी ने इस मामले में क्या माँग की है?
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने, फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई और चार से पाँच महीनों के भीतर दोषियों को सजा दिलाने की माँग की है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष जाँच पर भी ज़ोर दिया।
क्या ट्रस्टियों पर भी कार्रवाई होगी?
आलोक कुमार ने किसी ट्रस्टी का नाम लेने से परहेज किया और कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद सभी आरोपितों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को समर्पित व्यक्ति बताया, परंतु इस्तीफे का फैसला उन पर छोड़ा।
इस मामले में विपक्ष की क्या भूमिका है?
वीएचपी अध्यक्ष ने विपक्षी दलों पर 2027 के चुनावों को ध्यान में रखकर इस मुद्दे का राजनीतिक दोहन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन दलों ने राम मंदिर निर्माण में बाधाएँ डालीं, वे अब इस प्रकरण पर राजनीति कर रहे हैं।
भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?
आलोक कुमार ने ट्रस्ट में प्रशासनिक अनुभव वाले लोगों को जोड़ने, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) बनाने और मज़बूत वित्तीय निगरानी तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि ट्रस्ट आने वाले समय में इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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