3 जुलाई 2026
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राम मंदिर दान विवाद: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार बोले — 'हर आरोपी की जांच हो', केजरीवाल-अखिलेश पर कड़ा प्रहार

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राम मंदिर दान विवाद: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार बोले — 'हर आरोपी की जांच हो', केजरीवाल-अखिलेश पर कड़ा प्रहार

सारांश

राम मंदिर दान विवाद पर वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा — चाहे कोई भी हो, जिस पर आरोप लगे उसकी जांच होनी चाहिए। केजरीवाल को बिना प्रमाण आरोप लगाने पर पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी, अखिलेश को कारसेवक गोलीकांड की याद दिलाई।

मुख्य बातें

वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने 3 जुलाई 2026 को राम मंदिर दान विवाद पर कहा कि जिस पर भी आरोप लगे हैं, उसकी जांच होनी चाहिए।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं समग्र जांच की मांग की है; वीएचपी परिणाम की प्रतीक्षा में है।
अयोध्या में वकीलों द्वारा ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर शिकायत दर्ज कराई गई; आलोक कुमार ने कहा उन्हें तहरीर की जानकारी नहीं।
अखिलेश यादव पर निशाना — कारसेवकों पर गोलीकांड और मुख्यमंत्री काल में अयोध्या की उपेक्षा का हवाला दिया।
अरविंद केजरीवाल को चेतावनी — बिना प्रमाण के इशारों में आरोप लगाने पर पुलिस कार्रवाई होनी चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने 3 जुलाई 2026 को अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे के कथित गबन प्रकरण पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी हो, जिस पर भी आरोप लगे हैं, उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच अनिवार्य है। साथ ही, उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

चंपत राय पर आरोप और जांच की मांग

वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने चंपत राय पर लगे आरोपों के संदर्भ में कहा, 'आरोप लगे हैं। कुछ लोगों ने उनके खिलाफ भी आरोप लगाए हैं। आरोपों की जांच हो रही है। लोग मुझे कहते हैं कि क्या उन पर लगे आरोपों की भी जांच होगी। मेरी ये समझ है कि ट्रस्ट ने खुद कहा है कि समग्र जांच होनी चाहिए। तो जो-जो आरोप जिस पर लगे हैं, उस पर जांच होगी और जांच के परिणाम की हम प्रतीक्षा करेंगे। यही मेरा जवाब है कि जिस पर भी आरोप लगा है, उसको जांच होनी चाहिए।' गौरतलब है कि यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर को लेकर राजनीतिक सरगर्मी पहले से ही तेज़ है।

एफआईआर शिकायत पर प्रतिक्रिया

अयोध्या में वकीलों द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की शिकायत के बारे में पूछे जाने पर आलोक कुमार ने कहा, 'मेरे पास उस तहरीर की कोई जानकारी नहीं है। मीडिया में भी शायद उसकी विषय-वस्तु नहीं आई है। इसलिए, अभी मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर में नियुक्तियों के विषय में वीएचपी की कोई भूमिका नहीं है — यह निर्णय पूरी तरह ट्रस्टियों का है।

अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के राम मंदिर से जुड़े बयानों पर आलोक कुमार ने कहा, 'हर एक आदमी को अपने सपनों को देखने का अधिकार है, उन्हें भी हैं। लेकिन अगर सोचते हैं कि राम मंदिर के नाम पर लोग अखिलेश यादव को वोट दे देंगे, तो लोग पूछेंगे कि गोलियां चलवाई थी कि नहीं? कारसेवक मारे गए थे या नहीं? कई साल बाद, जब उनके प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या आप उसके लिए क्षमा मांगते हैं, तो उन्होंने कहा कि नहीं मांगते।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अखिलेश यादव अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में कभी अयोध्या नहीं गए और उनके शासनकाल में अयोध्या के लिए कोई विकास योजना नहीं चलाई गई।

केजरीवाल के इशारों पर कड़ी चेतावनी

अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री पर इशारों में लगाए गए आरोपों पर आलोक कुमार ने कहा, 'वे डींगें मारते हैं और बढ़ा-चढ़ाकर बातें करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम नहीं लिया, इशारों-इशारों में कहा है। अगर वे एक बार नाम लेंगे, तो मैं समझता हूं कि पुलिस को उन्हें बुलाकर उनके आरोपों के बारे में जानकारी करना चाहिए, उसका आधार क्या है? उसका प्रमाण क्या है? अगर वह आरोप हवा-हवाई हैं, तो केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल इस प्रकरण को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में हैं।

आगे क्या होगा

ट्रस्ट द्वारा स्वयं समग्र जांच की मांग किए जाने के बाद अब सभी की निगाहें जांच की दिशा और उसके परिणाम पर टिकी हैं। वीएचपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह जांच प्रक्रिया का इंतज़ार करेगी और किसी भी निष्कर्ष से पहले कोई टिप्पणी नहीं करेगी। इस प्रकरण के राजनीतिक आयाम आने वाले दिनों में और गहरे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस संगठन की ओर से आ रहा है जो राम मंदिर आंदोलन का मूल स्तंभ रहा है — इसलिए इसे महज़ नैतिक स्थिति मानना भोलापन होगा। चंपत राय पर आरोप और ट्रस्ट की आंतरिक जांच की मांग यह संकेत देती है कि संघ परिवार के भीतर भी असहमति की लकीरें खिंच रही हैं। केजरीवाल को 'पुलिस कार्रवाई' की चेतावनी देना और अखिलेश को कारसेवक गोलीकांड की याद दिलाना — यह बयानबाज़ी राजनीतिक बचाव की क्लासिक रणनीति है, जो मूल सवाल — दान में गबन हुआ या नहीं — से ध्यान हटाती है। जब तक जांच के ठोस परिणाम सामने नहीं आते, यह पूरा प्रकरण धार्मिक संस्था की पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बना रहेगा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान विवाद क्या है?
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर विवाद उठा है, जिसमें ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगे हैं। अयोध्या में वकीलों ने अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर शिकायत भी दर्ज कराई है।
वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस मामले पर क्या कहा?
आलोक कुमार ने कहा कि जिस पर भी आरोप लगे हैं, उसकी जांच होनी चाहिए और ट्रस्ट ने स्वयं समग्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे जांच के परिणाम की प्रतीक्षा करेंगे।
आलोक कुमार ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
आलोक कुमार ने कहा कि अखिलेश यादव अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में कभी अयोध्या नहीं गए और उनके शासन में अयोध्या के लिए कोई विकास योजना नहीं चलाई गई। उन्होंने कारसेवकों पर गोलीकांड का भी हवाला दिया।
अरविंद केजरीवाल के बयान पर वीएचपी की क्या प्रतिक्रिया रही?
आलोक कुमार ने कहा कि केजरीवाल इशारों में आरोप लगाते हैं और यदि वे प्रधानमंत्री का नाम लेंगे तो पुलिस को उन्हें बुलाकर आरोपों का आधार और प्रमाण पूछना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के आरोप लगाने पर केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
राम मंदिर में नियुक्तियों में वीएचपी की क्या भूमिका है?
आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि मंदिर में नियुक्तियों के मामले में वीएचपी की कोई भूमिका नहीं है। यह निर्णय पूरी तरह ट्रस्टियों का है कि किसे नियुक्त करना है और कैसे।
राष्ट्र प्रेस
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