राम मंदिर चंदा विवाद: राजभर ने अखिलेश के 'बिरादर' पर उठाए सवाल, संजय सिंह ने स्वतंत्र जांच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन विवाद पर 28 जून 2025 को सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने मामले की स्वतंत्र और व्यापक जांच की माँग करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए।
राजभर का अखिलेश पर हमला
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि ट्रस्ट की माँग पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है और जांच जारी है। उन्होंने बताया कि SIT की जांच में सबसे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव के कथित बिरादर टीनू यादव का नाम सामने आया है। राजभर ने कहा, "अखिलेश यादव को यह भी बताना चाहिए कि उनके समुदाय से जुड़े व्यक्ति का नाम कथित रूप से जांच में सामने आया है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में होने वाली अधिकांश घटनाओं में सपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आते हैं। राजभर ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संजय सिंह की स्वतंत्र जांच की माँग
AAP सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाया कि कथित चंदा चोरी के मामले में पकड़े गए आरोपियों की पुलिस रिमांड क्यों नहीं ली गई और उनसे विस्तृत पूछताछ क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि पूछताछ होती, तो कथित धन के प्रवाह और अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सकती थी।
सिंह ने यह भी कहा कि यदि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया है, तो इससे पूरे मामले की जवाबदेही समाप्त नहीं होती। उन्होंने बताया कि कई वर्ष पहले भी इस मामले को लेकर शिकायतें की गई थीं, परंतु उन पर ध्यान नहीं दिया गया।
वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक जांच की माँग
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपए के चंदे और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की भी जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी के आरोप लग रहे हैं, तो इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
संजय सिंह ने माँग की कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाए, ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी सच्चाई सामने आ सके। उनका तर्क है कि यदि जांच केवल निचले स्तर तक सीमित रही, तो पूरे मामले का सच सामने नहीं आ पाएगा।
आगे क्या होगा
फिलहाल SIT की जांच जारी है और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, और आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेगी कि इस विवाद में किसकी जवाबदेही तय होगी।