10 अगस्त 2026
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वीएचपी की राम जन्मभूमि ट्रस्ट विवाद पर एफआईआर और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की माँग, आलोक कुमार ने एक्स पर उठाई आवाज़

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वीएचपी की राम जन्मभूमि ट्रस्ट विवाद पर एफआईआर और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की माँग, आलोक कुमार ने एक्स पर उठाई आवाज़

सारांश

वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक्स पर पोस्टर साझा कर राम जन्मभूमि ट्रस्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ियों पर एफआईआर, तेज़ जाँच, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दोषियों को सज़ा की माँग की। यह माँग उस समय आई है जब यूपी सरकार की एसआईटी पहले से ही सैकड़ों करोड़ रुपए के कथित गबन की जाँच कर रही है।

मुख्य बातें

वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 24 जून 2026 को एक्स पर राम जन्मभूमि ट्रस्ट विवाद में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की माँग की।
माँगों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठन, जाँच में तेज़ी और दोषियों को कड़ी सज़ा शामिल हैं।
कथित गायब धनराशि का प्रारंभिक अनुमान ₹7–7.5 करोड़ था, बाद में दावा सैकड़ों करोड़ तक का किया गया।
2021 की एक ज़मीन डील में ट्रस्ट ने कथित तौर पर ₹18.5 करोड़ में वह भूखंड खरीदा जो कुछ मिनट पहले ₹2 करोड़ में बिका था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है जो जाँच कर रही है।
ट्रस्ट ने किसी बड़ी अनियमितता से इनकार किया है और ऑडिट जारी बताया है।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 24 जून 2026 को अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवादों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्टर साझा करते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित गड़बड़ियों की जाँच में तेज़ी लाने और दोषियों को दंडित करने की अपील की। यह माँग ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) के ज़रिए मामले की जाँच करा रही है।

चार मुख्य माँगें

आलोक कुमार ने अपने पोस्टर में चार ठोस माँगें रखीं। पहली, मामले में तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए। दूसरी, चल रही या आवश्यक जाँच प्रक्रियाओं में बिना देरी के तेज़ी लाई जाए। तीसरी, नियमित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किया जाए या सक्रिय किया जाए। चौथी, जो भी दोषी पाए जाएँ, उन्हें कड़ी सज़ा दी जाए। पोस्टर का समापन 'जय श्री राम' के उद्घोष के साथ हुआ।

विवाद की पृष्ठभूमि

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन 2020 में सर्वोच्च न्यायालय के 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए किया गया था। भक्तों द्वारा दान पात्रों (हुंडी), अभियानों और अन्य माध्यमों से अरबों रुपए नकद, सोना, चाँदी और कीमती वस्तुएँ एकत्र की गई थीं। कथित तौर पर कुछ धनराशि के गायब होने के आरोप लगे, जिसका प्रारंभिक अनुमान ₹7 से 7.5 करोड़ था, लेकिन बाद में दावा किया गया कि यह रकम सैकड़ों करोड़ रुपए तक हो सकती है।

एक अन्य प्रमुख विवाद 2021 की एक ज़मीन खरीद से जुड़ा है, जिसमें ट्रस्ट ने कथित तौर पर एक भूखंड ₹18.5 करोड़ में खरीदा, जबकि उसी दिन कुछ मिनट पहले एक सहयोगी ने उसे महज़ ₹2 करोड़ में खरीदा था। इस लेन-देन पर ज़रूरत से अधिक कीमत चुकाने और सार्वजनिक दान के संभावित दुरुपयोग के आरोप लगे हैं।

एसआईटी जाँच और सरकारी रुख

जून 2026 में पूर्व कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं के नए आरोपों के बाद राजनीतिक हलचल मच गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के ही अनुरोध पर तीन सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी दान के हिसाब-किताब, ज़मीन के लेन-देन, लापता कीमती वस्तुओं और प्रक्रियागत खामियों की जाँच कर रही है। ट्रस्ट ने किसी भी बड़ी अनियमितता से इनकार किया है और कहा है कि ऑडिट प्रक्रिया जारी है।

वीएचपी का रुख और व्यापक संदर्भ

वीएचपी नेताओं का लंबे समय से यह मानना रहा है कि मंदिर की पवित्रता को किसी भी रूप में — चाहे प्रशासनिक लापरवाही हो, वित्तीय अनियमितता हो या अन्य कारण — कमज़ोर करने की कोशिश पर कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस मंदिर के बाद से यह स्थल देश का प्रमुख तीर्थ केंद्र और हिंदू सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है। फास्ट-ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया की माँग यह दर्शाती है कि हिंदू संगठन दशकों के आंदोलन के बाद हासिल इस उपलब्धि की विश्वसनीयता को हर हाल में सुरक्षित रखना चाहते हैं।

आगे एसआईटी की जाँच रिपोर्ट और उस पर सरकार की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि इस विवाद की दिशा क्या होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए उस पर उठते सवाल केवल वित्तीय नहीं, संस्थागत विश्वसनीयता के भी हैं। एसआईटी का गठन ट्रस्ट के अपने अनुरोध पर हुआ — यह पारदर्शिता की ओर कदम है, लेकिन स्वतंत्र जाँच की कसौटी पर यह पर्याप्त नहीं माना जा रहा। असली परीक्षा यह है कि एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी या नहीं, और क्या जाँच परिणाम राजनीतिक दबाव से मुक्त रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीएचपी ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर क्या माँगें रखी हैं?
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने चार माँगें रखी हैं — तत्काल एफआईआर दर्ज करना, जाँच में तेज़ी लाना, फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करना और दोषियों को कड़ी सज़ा देना। यह माँगें उन्होंने 24 जून 2026 को एक्स पर पोस्टर साझा कर उठाई हैं।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट में क्या विवाद है?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर दान पात्रों की धनराशि में कथित गड़बड़ी के आरोप हैं। कथित गायब रकम का अनुमान पहले ₹7–7.5 करोड़ था, जो बाद में सैकड़ों करोड़ रुपए बताया गया। 2021 की एक ज़मीन डील पर भी सवाल हैं जिसमें ट्रस्ट ने कथित तौर पर बाज़ार से कई गुना अधिक कीमत चुकाई।
राम मंदिर ट्रस्ट विवाद में एसआईटी की भूमिका क्या है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने जून 2026 में ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित किया है। एसआईटी दान के हिसाब-किताब, ज़मीन लेन-देन, लापता कीमती वस्तुओं और प्रक्रियागत खामियों की जाँच कर रही है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट कब और क्यों बनाया गया था?
यह ट्रस्ट 2020 में सर्वोच्च न्यायालय के 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए गठित किया गया था। जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर का उद्घाटन किया था।
ट्रस्ट ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
ट्रस्ट ने किसी भी बड़ी अनियमितता से इनकार किया है और कहा है कि ऑडिट प्रक्रिया अभी जारी है। ट्रस्ट ने स्वयं एसआईटी जाँच का अनुरोध किया था, जिसे पारदर्शिता की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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