17 जुलाई 2026
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योगी के 'गाय राष्ट्रीय पशु नहीं' बयान पर अयोध्या के संतों की मुहर, गौमाता को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की उठी माँग

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योगी के 'गाय राष्ट्रीय पशु नहीं' बयान पर अयोध्या के संतों की मुहर, गौमाता को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की उठी माँग

सारांश

सीएम योगी आदित्यनाथ के 'गाय को सरकारी दर्जे की ज़रूरत नहीं' वाले बयान पर अयोध्या के प्रमुख संतों ने एकजुट समर्थन दिया है। साथ ही गौमाता को 'राष्ट्रीय धरोहर' घोषित करने और गोहत्या पर कठोर कानून बनाने की माँग ने नई ऊर्जा पकड़ ली है।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर कार्यक्रम में कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग अनावश्यक है — माता-पुत्र संबंध को सरकारी घोषणा की ज़रूरत नहीं।
साकेत भवन महंत सीताराम दास महाराज , जगद्गुरु परमहंसाचार्य , डॉ.
देवेशाचार्य महाराज और हरीश दास ने सीएम के बयान का समर्थन किया।
संतों ने गौमाता को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने और गोहत्या पर कठोर कानून बनाने की माँग उठाई।
वर्तमान में बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है; गाय को यह दर्जा देने की माँग कुछ मौलाना-मौलवियों ने उठाई थी।
यह विवाद 2 जून 2026 को अयोध्या में संतों की प्रतिक्रिया के बाद और अधिक सुर्खियों में आया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उठाने वाले मौलाना-मौलवियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि गाय हिंदू समाज के लिए महज एक पशु नहीं, बल्कि माता है — और माता-पुत्र के संबंध को किसी सरकारी अधिसूचना की दरकार नहीं होती। 2 जून 2026 को अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों ने सीएम के इस बयान पर खुलकर समर्थन जताया और गौमाता को 'राष्ट्रीय धरोहर' घोषित करने की माँग को और तेज़ किया।

साकेत भवन महंत का बयान

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास महाराज ने कहा, 'योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है, वह सौ फीसदी सही है। गौमाता विश्व की माता हैं। संपूर्ण देवी-देवताओं का वास गौमाता में होता है। गौमाता की नाभि में अमृत होता है और वह रुद्रों की भी माँ हैं।' उन्होंने आगे कहा कि जो मौलाना-मौलवी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग कर रहे हैं, उनकी सोच समाज में दुर्भावना फैलाने की कोशिश है। उनके अनुसार, 'गौमाता स्वघोषित माता हैं — इन्हें किसी सरकारी दर्जे की आवश्यकता नहीं।'

तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर का आह्वान

तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने कहा कि प्राचीनकाल से वेदों में गाय को माता का स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा, 'गिरगिट की तरह रंग बदलने वालों को सीएम योगी ने उचित जवाब दिया है।' उन्होंने माँग की कि गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने के लिए गौवंश को 'राष्ट्रीय धरोहर' घोषित किया जाए। उनके अनुसार, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उठाने वालों की सोच सनातन परंपरा के विरुद्ध है।

हनुमानगढ़ी के महंतों की प्रतिक्रिया

हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने कहा, 'गाय कोई पशु नहीं, हमारी माता है। माता को पशु घोषित करने की माँग के पीछे एक सुनियोजित साजिश है।' उन्होंने माँग की कि गौमाता को 'राष्ट्रीय धरोहर एवं माता' घोषित किया जाए और इस संबंध में कठोर कानून बनाया जाए। हनुमानगढ़ी के ही महंत हरीश दास ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के फैसले और बयान प्रशंसनीय हैं। उन्होंने जोड़ा, 'गाय में 33 करोड़ देवी-देवता समाहित हैं। जो साधु भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग कर रहे हैं, उन्हें पहले ज्ञान लेना चाहिए।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब उभरा जब कुछ मौलाना-मौलवियों ने गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उठाई। वर्तमान में बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। सीएम योगी ने इस माँग को यह कहते हुए खारिज किया कि माता और पुत्र के संबंध को किसी कानूनी या सरकारी मान्यता की आवश्यकता नहीं। गौरतलब है कि गाय संरक्षण का मुद्दा उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहा है।

आगे क्या

अयोध्या के संतों ने केंद्र और राज्य सरकार से गौवंश को 'राष्ट्रीय धरोहर' का दर्जा देने और गोहत्या पर सख्त कानून बनाने की माँग की है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में धार्मिक और राजनीतिक हलकों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनकी मंशा सद्भाव की थी या नहीं — यह स्पष्ट नहीं, लेकिन इस माँग ने विपरीत प्रतिक्रिया को हवा दे दी। संतों की 'राष्ट्रीय धरोहर' वाली माँग कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से जटिल है, जिस पर अभी तक कोई ठोस विधायी प्रस्ताव सामने नहीं आया है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गाय को लेकर क्या बयान दिया था?
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि गाय हिंदू समाज के लिए माता है, महज पशु नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि माता और पुत्र के संबंध को किसी सरकारी घोषणा की आवश्यकता नहीं होती।
अयोध्या के संतों ने योगी के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अयोध्या के प्रमुख संतों — सीताराम दास महाराज, जगद्गुरु परमहंसाचार्य, डॉ. देवेशाचार्य महाराज और हरीश दास — ने सीएम योगी के बयान का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने गौमाता को 'राष्ट्रीय धरोहर' घोषित करने और गोहत्या पर कठोर कानून बनाने की माँग भी उठाई।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग किसने उठाई थी?
कुछ मौलाना-मौलवियों ने गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उठाई थी। वर्तमान में बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। इसी माँग पर सीएम योगी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
संतों ने 'राष्ट्रीय धरोहर' और 'राष्ट्रीय पशु' में क्या अंतर बताया?
संतों का तर्क है कि गाय को 'राष्ट्रीय पशु' कहना उसे एक सामान्य जीव की श्रेणी में रखना है, जबकि 'राष्ट्रीय धरोहर' का दर्जा उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को कानूनी संरक्षण देगा। जगद्गुरु परमहंसाचार्य के अनुसार, इससे गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध का रास्ता खुलेगा।
इस विवाद का राजनीतिक और सामाजिक असर क्या हो सकता है?
यह मुद्दा उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील है। संतों की माँग और सीएम योगी के बयान ने गाय संरक्षण को एक बार फिर केंद्रीय मुद्दा बना दिया है, जो आने वाले दिनों में विधायी और सामाजिक बहस को और गहरा कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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