योगी के 'गाय राष्ट्रीय पशु नहीं' बयान पर अयोध्या के संतों की मुहर, गौमाता को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की उठी माँग
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उठाने वाले मौलाना-मौलवियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि गाय हिंदू समाज के लिए महज एक पशु नहीं, बल्कि माता है — और माता-पुत्र के संबंध को किसी सरकारी अधिसूचना की दरकार नहीं होती। 2 जून 2026 को अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों ने सीएम के इस बयान पर खुलकर समर्थन जताया और गौमाता को 'राष्ट्रीय धरोहर' घोषित करने की माँग को और तेज़ किया।
साकेत भवन महंत का बयान
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास महाराज ने कहा, 'योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है, वह सौ फीसदी सही है। गौमाता विश्व की माता हैं। संपूर्ण देवी-देवताओं का वास गौमाता में होता है। गौमाता की नाभि में अमृत होता है और वह रुद्रों की भी माँ हैं।' उन्होंने आगे कहा कि जो मौलाना-मौलवी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग कर रहे हैं, उनकी सोच समाज में दुर्भावना फैलाने की कोशिश है। उनके अनुसार, 'गौमाता स्वघोषित माता हैं — इन्हें किसी सरकारी दर्जे की आवश्यकता नहीं।'
तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर का आह्वान
तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने कहा कि प्राचीनकाल से वेदों में गाय को माता का स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा, 'गिरगिट की तरह रंग बदलने वालों को सीएम योगी ने उचित जवाब दिया है।' उन्होंने माँग की कि गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने के लिए गौवंश को 'राष्ट्रीय धरोहर' घोषित किया जाए। उनके अनुसार, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उठाने वालों की सोच सनातन परंपरा के विरुद्ध है।
हनुमानगढ़ी के महंतों की प्रतिक्रिया
हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने कहा, 'गाय कोई पशु नहीं, हमारी माता है। माता को पशु घोषित करने की माँग के पीछे एक सुनियोजित साजिश है।' उन्होंने माँग की कि गौमाता को 'राष्ट्रीय धरोहर एवं माता' घोषित किया जाए और इस संबंध में कठोर कानून बनाया जाए। हनुमानगढ़ी के ही महंत हरीश दास ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के फैसले और बयान प्रशंसनीय हैं। उन्होंने जोड़ा, 'गाय में 33 करोड़ देवी-देवता समाहित हैं। जो साधु भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग कर रहे हैं, उन्हें पहले ज्ञान लेना चाहिए।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब उभरा जब कुछ मौलाना-मौलवियों ने गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उठाई। वर्तमान में बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। सीएम योगी ने इस माँग को यह कहते हुए खारिज किया कि माता और पुत्र के संबंध को किसी कानूनी या सरकारी मान्यता की आवश्यकता नहीं। गौरतलब है कि गाय संरक्षण का मुद्दा उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहा है।
आगे क्या
अयोध्या के संतों ने केंद्र और राज्य सरकार से गौवंश को 'राष्ट्रीय धरोहर' का दर्जा देने और गोहत्या पर सख्त कानून बनाने की माँग की है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में धार्मिक और राजनीतिक हलकों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।