अरशद मदनी की माँग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें, मॉब लिंचिंग और नफरत की राजनीति बंद हो

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अरशद मदनी की माँग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें, मॉब लिंचिंग और नफरत की राजनीति बंद हो

सारांश

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने एक्स पर पोस्ट कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग की। उनका तर्क है कि इससे मॉब लिंचिंग, नफरत की राजनीति और मुसलमानों को निशाना बनाने का सिलसिला हमेशा के लिए बंद हो सकता है — बशर्ते कानून सभी राज्यों में समान रूप से लागू हो।

मुख्य बातें

अरशद मदनी ने 20 मई को एक्स पर पोस्ट कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग की।
उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग और निर्दोष लोगों की हत्या बंद होनी चाहिए।
मदनी ने कुछ राज्यों में गोमांस की खुली बिक्री और वहाँ हिंसा न होने पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।
पशु वध से जुड़े कानून देश के सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं हैं — यह विरोधाभास उन्होंने रेखांकित किया।
उन्होंने माँग की कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर बिना भेदभाव के एक समान कानून सभी राज्यों में लागू किया जाए।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने 20 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की माँग उठाई और कहा कि इससे गाय के नाम पर होने वाली भीड़ हिंसा, निर्दोष लोगों की हत्या और नफरत की राजनीति पर स्थायी रोक लग सकती है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को माँ का दर्जा देती है, तो उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने में कौन-सी राजनीतिक बाधा है।

मदनी का एक्स पोस्ट: क्या कहा

मदनी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाना चाहिए। देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे माँ का दर्जा भी देती है। ऐसे में यह समझ से परे है कि आखिर कौन-सी राजनीतिक मजबूरी है, जिसके कारण सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने से बच रही है।' उन्होंने आगे कहा कि गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग, बेगुनाह इंसानों की हत्या, नफरत की राजनीति और मुसलमानों को बदनाम करने का यह खेल अब बंद होना चाहिए।

दोहरे मापदंड पर सवाल

मदनी ने यह भी रेखांकित किया कि कुछ राज्यों में खुलेआम गोमांस बेचा जाता है, लेकिन वहाँ न कोई विरोध होता है और न ही किसी प्रकार की भीड़ हिंसा देखने को मिलती है। उनके अनुसार, जहाँ मुसलमानों की आबादी है, वहाँ गाय के नाम पर खून बहाया जाता है — यह श्रद्धा नहीं, बल्कि दोहरा मापदंड और राजनीतिक खेल है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक केंद्रीय मंत्री एक इंटरव्यू में यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे बीफ खाते हैं।

पशु वध कानूनों में असमानता

मदनी ने समान नागरिक संहिता (UCC) की बहस का हवाला देते हुए कहा कि जब 'देश एक है तो कानून भी एक होना चाहिए' — यह तर्क पशु वध से संबंधित कानूनों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में पशु वध से जुड़े कानून सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्य भी शामिल हैं। यह विरोधाभास, उनके मुताबिक, इस पूरे मुद्दे की राजनीतिक प्रकृति को उजागर करता है।

स्थायी समाधान की माँग

मदनी ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग का उद्देश्य विवाद को हमेशा के लिए समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के बाद जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए, ताकि न किसी इंसान की जान जाए और न धर्म के नाम पर राजनीति हो। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दरअसल उस राजनीतिक आख्यान को पलटने की कोशिश है जो मॉब लिंचिंग को 'गौ-रक्षा' के रूप में वैध ठहराता है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार ऐसा कदम उठाएगी, जो उसके उस वोट-बैंक को असहज कर सकता है जो इस मुद्दे की अस्पष्टता से राजनीतिक लाभ उठाता है। पशु वध कानूनों की राज्यवार असमानता — जिसमें BJP-शासित राज्य भी शामिल हैं — इस पूरी बहस की सबसे बड़ी कमज़ोरी है, और मदनी ने इसी पर उँगली रखी है। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को महज़ एक धार्मिक नेता की अपील के रूप में देख सकती है, लेकिन यह वास्तव में एक संवैधानिक और विधायी चुनौती है जिसका जवाब देना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरशद मदनी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग क्यों की?
अरशद मदनी ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से मॉब लिंचिंग, निर्दोष लोगों की हत्या और नफरत की राजनीति पर स्थायी रोक लग सकती है। उनका तर्क है कि देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को माँ का दर्जा देती है, इसलिए उसे कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
मदनी ने पशु वध कानूनों पर क्या सवाल उठाए?
मदनी ने कहा कि देश में पशु वध से जुड़े कानून सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं हैं, जिसमें BJP-शासित राज्य भी शामिल हैं। उन्होंने दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ राज्यों में गोमांस खुलेआम बिकता है लेकिन वहाँ कोई हिंसा नहीं होती, जबकि मुस्लिम-बहुल इलाकों में गाय के नाम पर खून बहाया जाता है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद कौन सी संस्था है?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद भारत का एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1919 में हुई थी। अरशद मदनी इसके अध्यक्ष हैं और यह संगठन राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के मुद्दों पर सक्रिय रहता है।
मदनी की माँग का राजनीतिक महत्व क्या है?
एक मुस्लिम धार्मिक नेता द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग उस राजनीतिक आख्यान को चुनौती देती है जो मॉब लिंचिंग को गौ-रक्षा के नाम पर उचित ठहराता है। मदनी ने सरकार से माँग की कि यदि कानून बने तो वह देशभर में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू हो।
क्या भारत में गाय अभी राष्ट्रीय पशु है?
नहीं, भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है। गाय को अभी तक संवैधानिक या कानूनी रूप से राष्ट्रीय पशु का दर्जा नहीं दिया गया है, हालाँकि कई राज्यों में गोहत्या पर प्रतिबंध है। मदनी की माँग इसी कानूनी दर्जे को लेकर है।
राष्ट्र प्रेस
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