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गाय संरक्षण पर योगी सरकार फेल: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की 'गविष्टि यात्रा' बांदा से शुरू

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गाय संरक्षण पर योगी सरकार फेल: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की 'गविष्टि यात्रा' बांदा से शुरू

सारांश

ज्योतिर्मठ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की 'गविष्टि यात्रा' बांदा से शुरू हुई और उन्होंने योगी आदित्यनाथ को गाय संरक्षण में 'फेल' करार दिया। गोरक्षपीठ से जुड़े होने के बावजूद योगी सरकार द्वारा गाय को माता का दर्जा न देना इस आलोचना का केंद्र है।

मुख्य बातें

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 'गविष्टि यात्रा' 27 मई को बांदा से शुरू हुई।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गाय संरक्षण के मोर्चे पर 'फेल' करार दिया।
माँग की गई कि गाय को पशुओं की सूची से हटाकर कानूनी रूप से 'माता' का दर्जा दिया जाए।
शंकराचार्य का दावा — मुस्लिम समुदाय और अन्य राजनीतिक दलों को गाय को माता का दर्जा देने पर आपत्ति नहीं।
बुंदेलखंड में आत्महत्याओं को उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण होने वाली जबरन हत्याओं के समान बताया।

ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 'गविष्टि यात्रा' 27 मई को बांदा से आरंभ हुई, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी देखी गई। यात्रा के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गाय को कानूनी रूप से 'माता' का दर्जा दिलाने की माँग दोहराई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को गाय संरक्षण के मोर्चे पर 'फेल' करार दिया।

गविष्टि यात्रा का उद्देश्य और जनसमर्थन

शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'बांदा से शुरू हुई 'गविष्टि यात्रा' गौ माता की रक्षा और सम्मान के लिए निकाली गई है। यात्रा को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। हम जहाँ भी जा रहे हैं, जिसे भी इसके बारे में पता चलता है, वह इसमें शामिल होने के लिए दौड़ पड़ता है और केवल एक ही संकल्प व्यक्त करता है कि हम किसी भी परिस्थिति में गाय को जानवर नहीं मानेंगे।' उन्होंने कहा कि सरकारों ने लंबे समय से गाय को पशु घोषित कर रखा है, जो उचित नहीं है, और माँग की कि गाय को पशुओं की सूची से हटाकर माता का दर्जा दिया जाए।

योगी आदित्यनाथ सरकार पर सीधा प्रहार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना करते हुए कहा कि वे गोरक्षपीठ से जुड़े रहे हैं, इसलिए उनसे गाय की रक्षा को लेकर सबसे अधिक उम्मीदें थीं। उनके शब्दों में, 'मैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले में फेल कहूँगा, क्योंकि जिस व्यक्ति से जिस बात की सबसे अधिक आशा होती है, उसे सबसे पहले वही काम पूरा करना चाहिए। योगी आदित्यनाथ बुलडोजर लेकर आए हैं और सबको डरा-धमकाकर शासन कर रहे हैं।' यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

मुस्लिम समुदाय और अन्य दलों का रुख

शंकराचार्य ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी गाय को माता मानने को तैयार हैं। उनका कहना था कि मुस्लिम समाज अब खुलकर कह रहा है कि अगर गाय को माता का दर्जा दिया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राजनीतिक दल भी इस मुद्दे का विरोध नहीं कर रहे, फिर भी वर्तमान सरकार यह कदम नहीं उठा रही।

बुंदेलखंड में आत्महत्याओं पर गंभीर चिंता

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुंदेलखंड में हो रही आत्महत्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण होने वाली ये आत्महत्याएँ जबरन हत्याओं जैसी हैं। यह बयान क्षेत्र में किसानों और आम लोगों की दुर्दशा की ओर ध्यान खींचता है।

सनातन धर्म और सामाजिक अनुशासन

शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म लोगों को मनमानी करने से रोकता है और इसमें लोगों को नियंत्रित करने और सुधारने की क्षमता है। उन्होंने कहा, 'यह कहता है कि गलत काम मत करो।' यह यात्रा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिंदू धार्मिक नेतृत्व के भीतर से आई है — जो भाजपा के परंपरागत समर्थन आधार का हिस्सा माना जाता है। गोरक्षपीठ से योगी का जुड़ाव उनकी राजनीतिक पहचान का मूल रहा है, इसलिए इसी मोर्चे पर 'फेल' का ठप्पा लगना राजनीतिक रूप से असहज करने वाला है। यह यात्रा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले धार्मिक एजेंडे को पुनः परिभाषित करने की कोशिश भी हो सकती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि यह बहस केवल गाय तक सीमित नहीं — बुंदेलखंड की आत्महत्याओं पर की गई टिप्पणी एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक संकट की ओर इशारा करती है जिसे धार्मिक आवरण में उठाया जा रहा है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गविष्टि यात्रा क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'गविष्टि यात्रा' ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा निकाली गई एक धार्मिक यात्रा है, जिसका उद्देश्य गाय को कानूनी रूप से 'माता' का दर्जा दिलाना और गौ संरक्षण के प्रति जनजागरण करना है। यह यात्रा 27 मई को बांदा से शुरू हुई।
शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ को 'फेल' क्यों कहा?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ से जुड़े रहे हैं, इसलिए उनसे गाय संरक्षण और माता का दर्जा दिलाने की सबसे अधिक उम्मीद थी। लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, इसलिए उन्होंने योगी को इस मामले में 'फेल' करार दिया।
गाय को माता का दर्जा देने की माँग का क्या अर्थ है?
इस माँग का अर्थ है कि गाय को भारतीय कानून में पशुओं की श्रेणी से हटाकर एक विशेष संरक्षित दर्जा दिया जाए। शंकराचार्य चाहते हैं कि सरकार गाय को 'माता' के रूप में कानूनी मान्यता दे, जिससे उसके वध और दुर्व्यवहार पर सख्त रोक लग सके।
बुंदेलखंड में आत्महत्याओं पर शंकराचार्य ने क्या कहा?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि बुंदेलखंड में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण होने वाली आत्महत्याएँ जबरन हत्याओं जैसी हैं। उन्होंने इसे क्षेत्र में गहरे सामाजिक-आर्थिक संकट का संकेत बताया।
क्या मुस्लिम समुदाय गाय को माता का दर्जा देने के पक्ष में है?
शंकराचार्य के अनुसार, मुस्लिम समुदाय ने खुलकर कहा है कि अगर गाय को माता का दर्जा दिया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि यह दावा स्वामी जी का अपना बयान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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