11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मुजफ्फरनगर में गोमाता संरक्षण कानून की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मुजफ्फरनगर में गोमाता संरक्षण कानून की मांग

सारांश

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा मुजफ्फरनगर पहुँची — गो माता संरक्षण के लिए ठोस कानून की माँग के साथ। उन्होंने सभी दलों के नेताओं पर वोट लेकर वादा न निभाने का आरोप लगाया और यात्रा को गैर-राजनीतिक बताया।

मुख्य बातें

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा 21 जून को मुजफ्फरनगर पहुँची।
यात्रा का एकमात्र उद्देश्य गो माता की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनवाने की माँग करना है।
शंकराचार्य ने सभी राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने वोट लेने के बाद गाय संरक्षण पर कोई ठोस विधायी कदम नहीं उठाया।
समाजवादी पार्टी आधिकारिक रूप से यात्रा का समर्थन नहीं कर रही, लेकिन पार्टी के हिंदू सदस्य व्यक्तिगत श्रद्धा के आधार पर शामिल हो रहे हैं।
शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर दान विवाद पर चंपत राय के बयान की आलोचना की।

ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने 21 जून को मुजफ्फरनगर में अपनी गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के दौरान स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल गो माता की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनवाने की माँग को लेकर चलाया जा रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वोट लेने के बावजूद किसी भी नेता ने गाय की रक्षा के लिए कोई सार्थक विधायी कदम नहीं उठाया।

यात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

शंकराचार्य महाराज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'यह यात्रा गो माता की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की माँग को लेकर निकाली जा रही है। हमें देश के नेताओं और राजनीतिक दलों से निराशा हुई है क्योंकि हमारे वोट हासिल करने के बावजूद वे गाय की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं बना पाए। इसी भावना से प्रेरित होकर हम पूरे उत्तर प्रदेश में मतदाताओं से जुड़ने निकले हैं।' यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुज़र रही है, जिसमें वे जनसंपर्क और जनजागरण का काम कर रहे हैं।

राजनीतिक दलों पर रुख — किसी एक के खिलाफ नहीं

शंकराचार्य महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी एक राजनीतिक पार्टी को निशाना बनाने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमने हर राजनीतिक पार्टी के हिंदुओं से कहा है कि अगर उनके मन में गो माता के प्रति श्रद्धा है तो उन्हें इस यात्रा में शामिल होना चाहिए। जो कोई भी इस यात्रा में भाग ले रहा है, वह गौ माता के प्रति अपनी श्रद्धा के कारण ऐसा कर रहा है। इसका किसी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।' उन्होंने यह भी बताया कि समाजवादी पार्टी आधिकारिक तौर पर इस यात्रा का समर्थन नहीं कर रही, लेकिन पार्टी से जुड़े हिंदू सदस्य और गो भक्त अपनी व्यक्तिगत आस्था के आधार पर इसमें सम्मिलित हो रहे हैं।

गो संरक्षण — धार्मिक नहीं, बहुआयामी मुद्दा

शंकराचार्य महाराज ने गो संरक्षण को केवल धार्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार यह मुद्दा सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टि से भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने समस्त हिंदू समाज से अपील की कि वे अपनी आस्था को सुदृढ़ रखते हुए गो माता की रक्षा के लिए एकजुट हों।

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद पर प्रतिक्रिया

यात्रा के दौरान शंकराचार्य महाराज से अयोध्या राम मंदिर में दान को लेकर हुए विवाद पर भी सवाल पूछे गए। उन्होंने कहा, 'अयोध्या में चोरी कोई नई बात नहीं है; राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ ऐसा होता रहा है। चंपत राय ने कहा था कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है — इसका मतलब है कि उनके लिए ऐसी घटनाएँ सामान्य या रोज़मर्रा की बात थीं।' यह टिप्पणी राम मंदिर प्रबंधन पर उठ रहे सवालों के बीच आई है।

आगे की राह

गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जारी रहेगी। शंकराचार्य महाराज का लक्ष्य मतदाताओं के बीच जाकर गो संरक्षण कानून की माँग को जन-आंदोलन का रूप देना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी विधानसभा सत्रों में इस माँग को कोई राजनीतिक समर्थन मिलता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी दशकों बाद भी यह संसदीय एजेंडे पर प्राथमिकता नहीं बन पाई। यात्रा को 'गैर-राजनीतिक' बताना रणनीतिक है — इससे सभी दलों के मतदाताओं तक पहुँच बनती है — लेकिन इसका चुनावी प्रभाव नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अयोध्या दान विवाद पर की गई टिप्पणी संकेत देती है कि शंकराचार्य महाराज मंदिर प्रबंधन को लेकर भी जवाबदेही की माँग उठाने से नहीं हिचकते।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा क्या है?
यह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज द्वारा उत्तर प्रदेश में चलाई जा रही एक जनसंपर्क यात्रा है, जिसका उद्देश्य गो माता की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनवाने की माँग को जन-आंदोलन का रूप देना है। यात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुज़र रही है।
शंकराचार्य ने राजनीतिक दलों पर क्या आरोप लगाए?
शंकराचार्य महाराज ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने वोट लेने के बावजूद गाय की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कानून नहीं बनाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आरोप किसी एक पार्टी पर नहीं, बल्कि समस्त राजनीतिक वर्ग पर है।
क्या समाजवादी पार्टी इस यात्रा का समर्थन कर रही है?
नहीं, समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस यात्रा का समर्थन नहीं किया है। हालाँकि, पार्टी से जुड़े हिंदू सदस्य और गो भक्त अपनी व्यक्तिगत आस्था के आधार पर यात्रा में शामिल हो रहे हैं।
शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर दान विवाद पर क्या कहा?
शंकराचार्य महाराज ने कहा कि अयोध्या में चोरी कोई नई बात नहीं है और राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ ऐसा होता रहा है। उन्होंने चंपत राय के उस बयान की आलोचना की जिसमें इसे असामान्य नहीं बताया गया था।
गो संरक्षण को शंकराचार्य ने किन आधारों पर ज़रूरी बताया?
शंकराचार्य महाराज के अनुसार गो संरक्षण केवल धार्मिक मुद्दा नहीं है — यह सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने समस्त हिंदू समाज से एकजुट होकर इस माँग का समर्थन करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले