गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मुजफ्फरनगर में गोमाता संरक्षण कानून की मांग
सारांश
मुख्य बातें
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने 21 जून को मुजफ्फरनगर में अपनी गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के दौरान स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल गो माता की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनवाने की माँग को लेकर चलाया जा रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वोट लेने के बावजूद किसी भी नेता ने गाय की रक्षा के लिए कोई सार्थक विधायी कदम नहीं उठाया।
यात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
शंकराचार्य महाराज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'यह यात्रा गो माता की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की माँग को लेकर निकाली जा रही है। हमें देश के नेताओं और राजनीतिक दलों से निराशा हुई है क्योंकि हमारे वोट हासिल करने के बावजूद वे गाय की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं बना पाए। इसी भावना से प्रेरित होकर हम पूरे उत्तर प्रदेश में मतदाताओं से जुड़ने निकले हैं।' यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुज़र रही है, जिसमें वे जनसंपर्क और जनजागरण का काम कर रहे हैं।
राजनीतिक दलों पर रुख — किसी एक के खिलाफ नहीं
शंकराचार्य महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी एक राजनीतिक पार्टी को निशाना बनाने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमने हर राजनीतिक पार्टी के हिंदुओं से कहा है कि अगर उनके मन में गो माता के प्रति श्रद्धा है तो उन्हें इस यात्रा में शामिल होना चाहिए। जो कोई भी इस यात्रा में भाग ले रहा है, वह गौ माता के प्रति अपनी श्रद्धा के कारण ऐसा कर रहा है। इसका किसी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।' उन्होंने यह भी बताया कि समाजवादी पार्टी आधिकारिक तौर पर इस यात्रा का समर्थन नहीं कर रही, लेकिन पार्टी से जुड़े हिंदू सदस्य और गो भक्त अपनी व्यक्तिगत आस्था के आधार पर इसमें सम्मिलित हो रहे हैं।
गो संरक्षण — धार्मिक नहीं, बहुआयामी मुद्दा
शंकराचार्य महाराज ने गो संरक्षण को केवल धार्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार यह मुद्दा सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टि से भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने समस्त हिंदू समाज से अपील की कि वे अपनी आस्था को सुदृढ़ रखते हुए गो माता की रक्षा के लिए एकजुट हों।
अयोध्या राम मंदिर दान विवाद पर प्रतिक्रिया
यात्रा के दौरान शंकराचार्य महाराज से अयोध्या राम मंदिर में दान को लेकर हुए विवाद पर भी सवाल पूछे गए। उन्होंने कहा, 'अयोध्या में चोरी कोई नई बात नहीं है; राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ ऐसा होता रहा है। चंपत राय ने कहा था कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है — इसका मतलब है कि उनके लिए ऐसी घटनाएँ सामान्य या रोज़मर्रा की बात थीं।' यह टिप्पणी राम मंदिर प्रबंधन पर उठ रहे सवालों के बीच आई है।
आगे की राह
गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जारी रहेगी। शंकराचार्य महाराज का लक्ष्य मतदाताओं के बीच जाकर गो संरक्षण कानून की माँग को जन-आंदोलन का रूप देना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी विधानसभा सत्रों में इस माँग को कोई राजनीतिक समर्थन मिलता है या नहीं।