17 जुलाई 2026
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गोरक्षा कानून न बनने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अल्टीमेटम: गारंटी दो, तभी वोट मिलेगा

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गोरक्षा कानून न बनने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अल्टीमेटम: गारंटी दो, तभी वोट मिलेगा

सारांश

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आज़ादी के 78 साल बाद भी गोरक्षा कानून न बनने पर सभी राजनीतिक दलों को खुली चुनौती दी है — गारंटी दो या वोट भूल जाओ। BJP को 12 साल के शासन के बाद भी जवाब देना होगा, और राम मंदिर प्रबंधन पर उनके तीखे सवाल अयोध्या की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।

मुख्य बातें

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 17 जुलाई 2026 को अयोध्या में गोरक्षा कानून न बनने पर केंद्र सरकार और सभी दलों पर नाराज़गी जताई।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को 6 से 8 महीने का समय दिया — गोरक्षा की गारंटी देने वाले दल को ही वोट देने का संकल्प।
आज़ादी के 78 साल बाद भी गोरक्षा के लिए कोई केंद्रीय कानून नहीं बना, जबकि आज़ादी से पहले सनातनियों से यह वादा किया गया था।
BJP को 12 वर्षों के शासन के बाद भी गोरक्षा कानून न बनाने पर सीधे कठघरे में खड़ा किया।
राम मंदिर के प्रबंधन और खज़ाने के विवाद पर भी शंकराचार्य ने व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया।
मुख्यमंत्री की SIT पर भरोसे के सवाल पर उन्होंने कथित तौर पर 'चोरों को बचाने' का आरोप लगाया।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 17 जुलाई 2026 को अयोध्या में गोरक्षा कानून न बनने पर केंद्र सरकार और सभी राजनीतिक दलों के प्रति कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज अब केवल उसी दल को वोट देगा जो गोरक्षा की ठोस गारंटी देगा। साथ ही उन्होंने अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन और खज़ाने से जुड़े विवादों पर भी व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया।

गोरक्षा कानून पर 78 साल की चुप्पी

शंकराचार्य ने कहा, "गाय माता की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। जिस देश में 100 करोड़ से ज़्यादा हिंदू रहते हैं, उस देश में गायों को मारा, काटा और बेचा जाता है।" उन्होंने याद दिलाया कि आज़ादी से पहले सनातनियों से वादा किया गया था कि स्वतंत्र भारत में गोरक्षा के लिए कड़ा कानून बनाया जाएगा, लेकिन आज़ादी के 78 साल बाद भी ऐसा कोई कानून अस्तित्व में नहीं आ सका।

उन्होंने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि अंग्रेज़ों के शासनकाल में गाय को महज़ एक 'जानवर' कहा जाता था और आज भी देश के कानून में उसे वही दर्जा प्राप्त है, जबकि हिंदू समाज में गाय को 'माता' माना जाता है।

राजनीतिक दलों को 6-8 महीने का अल्टीमेटम

शंकराचार्य ने सभी राजनीतिक दलों को 6 से 8 महीने का समय देने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "सभी पार्टियाँ गोलमाल बातें करती हैं। वे एक तरफ गाय माता को गुड़-चने का भोग लगाकर फ़ोटो खिंचवाकर यह साबित करती हैं कि वे गोमाता के रक्षक हैं, लेकिन जब आँकड़े देखते हैं तो पता चलता है कि असल में वे भक्षक हैं।"

उन्होंने कहा कि वे अयोध्या में गाय माता के समर्थकों से बातचीत करेंगे और उनसे गोरक्षा के लिए वोट देने का वादा करवाएंगे। उनका कहना था कि चूँकि भारत की राजनीति पूरी तरह वोट पर टिकी है, इसलिए यही एकमात्र प्रभावी रास्ता है।

भाजपा और केंद्र सरकार पर सीधा निशाना

शंकराचार्य ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल सत्ता में होता है, जनता को सबसे ज़्यादा उम्मीद उन्हीं से होती है। उन्होंने कहा, "पहले चुनाव के समय 'नरेंद्र मोदी को वोट मत दो, गोमाता को जीवन दो' नारा चलवाया गया था। देश की जनता ने इसी उम्मीद में पिछले 12 वर्षों में लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता की कमान सौंपी, लेकिन तीन बार सरकार बनने के बावजूद आज भी सवाल जस का तस खड़ा है — क्या वाकई गोमाता को जीवन मिला।"

राम मंदिर प्रबंधन पर भी तीखी आपत्ति

शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर के खज़ाने और उसकी सुरक्षा से जुड़े विवादों पर भी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, "जिस संगठन ने आज तक अपने कार्यालयों में प्रभु श्री राम की तस्वीर नहीं लगाई, वे आज राम मंदिर के प्रबंधन के सर्वेसर्वा बने बैठे हैं। यह स्थिति देश के करोड़ों सनातनी हिंदुओं के दिल में गहरे दर्द की तरह चुभ रही है।"

उन्होंने आगे कहा कि राम जन्मभूमि के मुकदमे के समय जिन लोगों ने कोर्ट से दूरी बनाई और इसे केवल आस्था का विषय बताया, आज वे ही मंदिर की पूरी व्यवस्था पर काबिज़ हैं। उनका मानना है कि जब पूरी व्यवस्था या टीम में खोट है, तो केवल एक हिस्से को बदलकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता।

मुख्यमंत्री की SIT पर भी सवाल

अयोध्या के साधु-संतों द्वारा मुख्यमंत्री की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) पर भरोसा जताए जाने के सवाल पर शंकराचार्य ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अयोध्या आकर वादा किया था कि जाँच के बाद सब कुछ साफ कर दिया जाएगा, लेकिन दोबारा आने पर उन्होंने इस प्रगति पर बात करने के बजाय एक नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर कथित तौर पर 'चोरों को बचाने और मुद्दे से ध्यान भटकाने' का आरोप लगाया। आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि राजनीतिक दल शंकराचार्य के इस अल्टीमेटम को किस तरह लेते हैं और गोरक्षा के मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक दबाव की रणनीति है — और BJP के लिए यह असहज करने वाला है, क्योंकि हिंदुत्व के मतदाताओं में यह संदेश गहरा जाता है। गोरक्षा कानून का वादा दशकों पुराना है और तीन बार केंद्र में सत्ता मिलने के बाद भी इसका पूरा न होना सत्तारूढ़ दल के लिए एक खुला घाव है। राम मंदिर प्रबंधन पर उनके सवाल यह भी उजागर करते हैं कि धार्मिक प्रतिष्ठान और सत्ता के बीच की खाई अब सार्वजनिक हो रही है। मुख्यधारा की मीडिया इसे केवल 'संत का बयान' मानकर चल सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह 'वोट-ब्लॉक' रणनीति 2027 या 2029 के चुनावों में कोई ठोस असर दिखाएगी।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राजनीतिक दलों को क्या अल्टीमेटम दिया है?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सभी राजनीतिक दलों को 6 से 8 महीने का समय दिया है कि वे गोरक्षा कानून बनाने की ठोस गारंटी दें, अन्यथा हिंदू समाज उन्हें वोट नहीं देगा। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति वोट पर टिकी है, इसलिए यही एकमात्र प्रभावी रास्ता है।
गोरक्षा कानून अब तक क्यों नहीं बना?
शंकराचार्य के अनुसार आज़ादी से पहले सनातनियों से वादा किया गया था कि स्वतंत्र भारत में गोरक्षा के लिए कड़ा कानून बनाया जाएगा, लेकिन आज़ादी के 78 साल बाद भी देश के कानून में गाय को महज़ एक 'जानवर' का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
शंकराचार्य ने BJP और केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
शंकराचार्य ने कहा कि देश की जनता ने 12 वर्षों में लगातार तीन बार BJP को सत्ता सौंपी, लेकिन गोरक्षा कानून का सवाल आज भी अनुत्तरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सभी दल गाय माता के नाम पर केवल फ़ोटो खिंचवाते हैं, असल में वे 'भक्षक' हैं।
राम मंदिर प्रबंधन पर शंकराचार्य की क्या आपत्ति है?
शंकराचार्य ने कहा कि जिस संगठन ने अपने कार्यालयों में प्रभु श्री राम की तस्वीर नहीं लगाई, वह आज राम मंदिर के प्रबंधन का सर्वेसर्वा बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राम जन्मभूमि के मुकदमे से दूरी बनाने वाले लोग अब मंदिर की व्यवस्था पर काबिज़ हैं।
अयोध्या SIT पर शंकराचार्य का क्या रुख है?
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री की SIT पर भरोसे के सवाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए कथित तौर पर 'चोरों को बचाने' का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री ने जाँच पर बात करने के बजाय दोबारा आने पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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