श्रीराम मंदिर दान चोरी: PM मोदी के फोन के बाद एसआईटी गठित, 15 दिन में रिपोर्ट देगी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में कथित दान और चढ़ावे की चोरी तथा वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए 15 जून 2025 को एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता विनय कटियार के अनुसार, यह आदेश केवल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नहीं था — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं फोन करके एसआईटी गठन की बात कही थी, और उनके फोन के बाद ही यह दल बनाया गया।
एसआईटी का गठन और जाँच का दायरा
गठित एसआईटी को 15 दिन के भीतर अपनी जाँच रिपोर्ट सौंपनी होगी। जाँच का केंद्र अयोध्या के श्रीराम मंदिर में हुई कथित दान-चोरी और वित्तीय गड़बड़ियाँ हैं, जिनमें करोड़ों रुपये की रिकवरी और कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें हैं। कटियार ने स्वीकार किया कि चोरी हुई है और इसमें शामिल राशि किसी एक दिन की नहीं है, क्योंकि मंदिर में प्रतिदिन आने वाला चंदा बड़ी मात्रा में होता है।
विपक्ष के सवाल और भाजपा का जवाब
समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि जब शुरू में चोरी हुई, तो सरकार ने मामला क्यों दबाया। उनका तर्क है कि यदि समय रहते जाँच होती, तो रिकवरी और आसान होती। इस पर कटियार ने कहा, 'यह बात हमें भी नहीं पता। हम इसमें ज़्यादा दखल नहीं देते।' समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे उन पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, क्योंकि 'वे एक अच्छे इंसान हैं।'
कटियार का पक्ष: 'किसी को नहीं छोड़ा जाएगा'
कटियार ने दावा किया कि इस अपराध में शामिल सभी लोगों को दंड मिलेगा। उन्होंने कहा, 'हम अकाउंटेंट को बुलाकर पूरा लेखा-जोखा देख लेंगे। किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि जब पूरी कहानी सामने आएगी, तब सभी के साथ उचित व्यवहार किया जाएगा। मंदिर में ऑडिट की माँग पर उन्होंने कहा कि जितनी भी राशि आई होगी, उसकी जानकारी अकाउंटेंट के पास अवश्य होगी।
आगे क्या होगा
एसआईटी को 15 दिन की समयसीमा में जाँच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी है। कटियार ने कहा कि वे स्वयं आगे राम मंदिर जाएँगे और वहाँ के हालात का जायजा लेंगे। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या और दान-प्रवाह दोनों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे मंदिर प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।