29 जुलाई 2026
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अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: एसआईटी गठन पर संत समाज बोला — 'अब सच्चाई छुपेगी नहीं'

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अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: एसआईटी गठन पर संत समाज बोला — 'अब सच्चाई छुपेगी नहीं'

सारांश

राम मंदिर दान विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी गठन की कार्रवाई को संत समाज ने एकमत से सराहा। ट्रस्ट की अपनी मांग पर बनी यह जांच टीम अब बताएगी कि करोड़ों श्रद्धालुओं की दान राशि के प्रबंधन में सच क्या है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या राम मंदिर दान राशि विवाद में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एसआईटी जांच की मांग की थी।
आर्य संत वरुण दास महाराज , महंत डॉ.
देवेशाचार्य , महंत सीताराम दास और महंत अनिरुद्ध देव दास ने एसआईटी गठन का स्वागत किया।
पूर्व बाबरी मस्जिद वादी इकबाल अंसारी ने भी एसआईटी जांच को सही कदम बताया।
संतों ने जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रखने की अपील की है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या के राम मंदिर दान राशि विवाद में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए जाने के बाद संत समाज ने इस निर्णय का खुलकर स्वागत किया है। 13 जून को सामने आई इस प्रतिक्रिया में विभिन्न धार्मिक संतों ने जांच को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने की अपील की। संतों का कहना है कि दान राशि को लेकर उठे सवालों ने हिंदू समाज में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसका समाधान अब एसआईटी जांच से होगा।

संतों की प्रतिक्रिया

आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा कि दान राशि को लेकर लगातार आ रही खबरों और विभिन्न तरह की जानकारियों से हिंदू समाज में भ्रम की स्थिति बन रही थी। उन्होंने एसआईटी गठन को 'सकारात्मक कदम' बताते हुए कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिंदू परंपरा और संस्कृति की पहचान का प्रतीक है तथा दुनिया भर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है — इसलिए इससे जुड़े किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।

सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने उत्तर प्रदेश सरकार को बधाई देते हुए कहा कि सरकार ने मामले का संज्ञान लेकर एसआईटी गठित की है, जो सराहनीय कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाई जा रही भ्रामक खबरों की भी जांच होनी चाहिए, ताकि सच पूरी तरह सामने आ सके।

ट्रस्ट की मांग और सरकार की कार्रवाई

महंत सीताराम दास जी महाराज ने स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सरकार से एसआईटी गठन की मांग की थी। सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर जांच दल गठित किया, जिसे उन्होंने स्वागत योग्य बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए तथा सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था को किसी भी स्थिति में ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।

पूर्व बाबरी मस्जिद वादी का समर्थन

पूर्व बाबरी मस्जिद वादी इकबाल अंसारी ने भी एसआईटी गठन को सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या और भगवान राम से जुड़ा यह मामला देश ही नहीं, पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके अनुसार दान राशि में कथित गड़बड़ी को लेकर जो सवाल उठे हैं, उनकी सच्चाई अब जांच के जरिए सामने आ जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि एसआईटी की जांच से सभी तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे।

त्वरित कार्रवाई की सराहना

जानकी रमण कुंज के महंत अनिरुद्ध देव दास जी महाराज ने कहा कि सरकार ने बहुत तेजी से कार्रवाई करते हुए एसआईटी का गठन किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे पवित्र तीर्थ स्थल को लेकर उठे कथित घोटाले के आरोपों से हिंदू जनमानस आहत था। एसआईटी जांच से सच्चाई सबके सामने आएगी, यह उन्हें विश्वास है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से खुद जांच की मांग किए जाने से यह मामला और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दान राशि के प्रबंधन में वास्तव में कोई अनियमितता हुई या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत जवाबदेही की स्वीकृति है। सवाल यह है कि जांच की परिधि कितनी विस्तृत होगी — केवल दान पात्र तक सीमित रहेगी या वित्तीय प्रबंधन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल होगी। संत समाज का एकमत समर्थन जांच को वैधता देता है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और उस पर कार्रवाई हो — अन्यथा यह प्रक्रिया भी जनआस्था को शांत करने का औपचारिक उपाय मात्र बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में एकत्रित दान राशि के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे हिंदू समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की है।
एसआईटी का गठन किसने और क्यों किया?
उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस जांच की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार किया।
संत समाज ने एसआईटी जांच का स्वागत क्यों किया?
संतों का मानना है कि दान राशि से जुड़े सवालों ने हिंदू जनमानस को आहत किया है और भ्रम की स्थिति बनाई है। निष्पक्ष जांच से सच सामने आएगा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा होगी।
क्या विपक्षी या गैर-हिंदू नेताओं ने भी एसआईटी का समर्थन किया?
हाँ, पूर्व बाबरी मस्जिद वादी इकबाल अंसारी ने भी एसआईटी गठन को सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है और जांच से सभी तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे।
एसआईटी जांच से आगे क्या होगा?
एसआईटी जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसमें दान राशि प्रबंधन की वास्तविकता स्पष्ट होगी। संतों ने मांग की है कि जांच पारदर्शी हो और किसी की आस्था को ठेस न पहुंचे।
राष्ट्र प्रेस
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