राम मंदिर अनियमितता विवाद: दिनेश शर्मा बोले — सबूत हैं तो एसआईटी के सामने रखें, 8 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है। राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने 28 जून 2026 को विपक्ष पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जाँच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन हो चुका है, 8 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, और जिनके पास प्रमाण हैं वे उसे एसआईटी के सामने प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और जाँच पूरी होने से पहले इस विषय पर राजनीति करना अनुचित है।
एसआईटी जाँच और गिरफ्तारियाँ
शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले पर स्पष्ट रुख़ अपनाया है। उनके अनुसार, 'एसआईटी का गठन हो गया है और आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है — ऐसे में अनर्गल बयानबाज़ी क्यों?' सरकार ने पहले ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर विपक्षी दलों ने हाल के हफ्तों में सवाल उठाए हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राज्य में कई महत्वपूर्ण चुनावी चक्र नज़दीक हैं।
विपक्ष पर निशाना
शर्मा ने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर के लिए विधि-सम्मत ट्रस्ट का गठन हुआ है और किसी को आपत्ति है तो वह नियमों के तहत अपनी बात रख सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास विकास और जनहित के मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं बचा, इसलिए वह आस्था के विषय पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है।
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 'सपा के नेता 'सियाराम धाम' बनाने का वादा कर रहे हैं, जबकि उन्हें पहले यह स्वीकार करना चाहिए कि बाबरी ढाँचा गलत था।' उनके अनुसार, जो लोग अयोध्या से कभी जुड़े नहीं रहे, वे आज इस विषय पर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र की राजनीति
महाराष्ट्र की राजनीति का ज़िक्र करते हुए शर्मा ने संजय राउत और उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया कि उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विरासत को बिखेर दिया है। उन्होंने कहा कि शिवसेना अब केवल एक ही है और उसके नेता एकनाथ शिंदे हैं। उनके अनुसार, भाजपा के साथ विश्वासघात की सज़ा जनता ने पहले ही दे दी है।
चुनावी राजनीति और सनातन विमर्श
शर्मा ने कहा कि बंगाल में हार के बाद कुछ विपक्षी नेताओं का 'सनातन प्रेम' अचानक जाग गया है और चुनाव नज़दीक आते ही मंदिरों के दौरे शुरू हो गए हैं। उन्होंने चेताया कि 'सनातन का विरोध देश की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।' नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाली पार्टियों के हालिया चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी को भी आगाह किया।
विदेश नीति और मोदी का नेतृत्व
शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री न किसी के सामने झुकते हैं और न किसी को झुकाने की इच्छा रखते हैं — वह केवल देश के हितों को प्राथमिकता देते हैं। आगे की जाँच प्रक्रिया और एसआईटी की रिपोर्ट पर सबकी नज़रें टिकी हैं।