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राम मंदिर एसआईटी जांच पर अयोध्या के संतों का भरोसा, ट्रस्ट के सरकारीकरण का कड़ा विरोध

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राम मंदिर एसआईटी जांच पर अयोध्या के संतों का भरोसा, ट्रस्ट के सरकारीकरण का कड़ा विरोध

सारांश

राम मंदिर अनियमितता मामले में एसआईटी जांच अंतिम चरण पर है। अयोध्या के संतों ने जांच पर भरोसा जताया, लेकिन ट्रस्ट के पूर्ण सरकारीकरण को सिरे से नकार दिया — यह आस्था और प्रशासन के बीच की वह लकीर है जिसे संत समाज पार नहीं होने देना चाहता।

मुख्य बातें

अयोध्या के संत समाज ने 22 जून को राम मंदिर अनियमितता मामले में एसआईटी जांच पर भरोसा जताया।
आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट जल्द लखनऊ में अधिकारियों को सौंपी जा सकती है।
देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचने के बाद दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्ण सरकारीकरण का कड़ा विरोध किया; कहा — हिंदू समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा।
मंदिर प्रबंधन के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाने के प्रस्ताव पर संतों ने सावधानी बरतने की सलाह दी।
अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

अयोध्या के संत समाज ने 22 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) पर पूरा भरोसा जताया। संतों ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, और साथ ही यह भी रेखांकित किया कि ट्रस्ट का पूर्ण सरकारीकरण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

एसआईटी जांच की स्थिति

आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने बताया कि एसआईटी की एक सप्ताह की जांच रिपोर्ट संभवतः लखनऊ में संबंधित अधिकारियों को सौंपी जा सकती है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर जिन व्यक्तियों के नाम जांच में सामने आए हैं, उनके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, अयोध्या धाम के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने भी पुष्टि की कि जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ दिनों में परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने हिंदू समाज से संयम और धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा — 'दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।'

सरकारीकरण का विरोध

वरुण दास जी महाराज ने स्पष्ट कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और यह हिंदू जनमानस का मंदिर है, इसलिए इसका पूर्ण सरकारीकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सरकार पहले से ही भूमिका निभा रही है और ट्रस्ट में जिला प्रशासन व अन्य सरकारी प्रतिनिधियों की भागीदारी भी पहले से मौजूद है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ट्रस्ट को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में देने का प्रयास किया गया, तो अयोध्या के साधु-संत और व्यापक हिंदू समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा।

सीईओ नियुक्ति पर सावधानी

वरुण दास जी महाराज ने यह भी बताया कि मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी किसी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को सीईओ के रूप में सौंपने की चर्चा चल रही है। हालांकि, उन्होंने इस प्रस्ताव पर सावधानी बरतने की बात कही और कहा कि किसी प्रबंधन तंत्र में कुछ कमियां सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि पूरी व्यवस्था ही दोषपूर्ण है।

दोषियों पर कार्रवाई और अफवाहों पर लगाम

महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति या समूह जानबूझकर अफवाह फैलाने का दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भी उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

वरुण दास जी महाराज ने विश्वास व्यक्त किया कि जो लोग श्रीराम जन्मभूमि की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार के रहते बच नहीं पाएंगे। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद की कार्रवाई पर अब संत समाज और श्रद्धालुओं की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह जांच संस्थागत जवाबदेही की दिशा में ठोस बदलाव लाएगी या महज़ प्रशासनिक फेरबदल तक सीमित रहेगी। संतों का सरकारीकरण-विरोध समझ में आता है, पर यह भी स्वीकार करना होगा कि मौजूदा ट्रस्ट संरचना में पारदर्शिता की कमी ही इस विवाद की जड़ है। सेवानिवृत्त आईएएस को सीईओ बनाने का प्रस्ताव आधा-अधूरा समाधान है — असली ज़रूरत एक स्वतंत्र, सार्वजनिक रूप से जवाबदेह ऑडिट तंत्र की है जो न पूरी तरह सरकारी हो, न पूरी तरह ट्रस्ट की मर्ज़ी पर निर्भर।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर अनियमितता मामले में एसआईटी जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
एसआईटी जांच अंतिम चरण में है और रिपोर्ट जल्द ही लखनऊ में संबंधित अधिकारियों को सौंपी जा सकती है। महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज के अनुसार, रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
अयोध्या के संतों ने ट्रस्ट के सरकारीकरण का विरोध क्यों किया?
संतों का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और इसे पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में देना उचित नहीं होगा। उनका तर्क है कि सुरक्षा और प्रशासन में सरकार की भागीदारी पहले से है, इसलिए पूर्ण सरकारीकरण अनावश्यक है।
राम मंदिर प्रबंधन के लिए सेवानिवृत्त आईएएस को सीईओ बनाने का प्रस्ताव क्या है?
आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने बताया कि मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी किसी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को सीईओ के रूप में सौंपने पर चर्चा चल रही है। हालांकि, संतों ने इस पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
क्या अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई होगी?
हाँ, महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या समूह जानबूझकर अफवाह फैलाने का दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भी उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सरकार की मौजूदा भूमिका क्या है?
ट्रस्ट में जिला प्रशासन और अन्य सरकारी प्रतिनिधियों की भागीदारी पहले से है, और सुरक्षा व कानून-व्यवस्था सरकार के अधीन है। संतों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार का आवश्यक हस्तक्षेप पहले से मौजूद है, इसलिए पूर्ण अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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