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राम मंदिर दान घोटाला: 8 पर एफआईआर के बाद विपक्ष का हमला, 'बड़ी मछलियाँ बच रही हैं'

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राम मंदिर दान घोटाला: 8 पर एफआईआर के बाद विपक्ष का हमला, 'बड़ी मछलियाँ बच रही हैं'

सारांश

राम मंदिर दान प्रकरण में सिर्फ 8 'छोटी मछलियाँ' पकड़ी गई हैं — यही विपक्ष का केंद्रीय आरोप है। कांग्रेस, सपा और निर्दलीय सांसदों ने एक साथ एसआईटी, सरकार और ट्रस्ट पर सवाल दागे हैं। ₹200 करोड़ के कथित गबन में असली जिम्मेदार अब तक बेदाग हैं।

मुख्य बातें

राम मंदिर दान प्रकरण में 8 लोगों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एसआईटी की रिपोर्ट पर अमल न होने और देरी से एफआईआर पर सवाल उठाए।
विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने मुख्य ट्रस्टी चंपत राय को जिम्मेदार ठहराया; मामले को कथित तौर पर ₹200 करोड़ के गबन से जोड़ा।
सपा नेता तेज नारायण पांडे ने दावा किया कि एसआईटी, सरकार और ट्रस्ट कथित तौर पर मिले हुए हैं।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इसे 'संगठित अपराध' करार दिया और एफआईआर में देरी को गंभीर चूक बताया।
विपक्ष की माँग — ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज हो और जाँच का दायरा बढ़े।

राम मंदिर दान प्रकरण में 8 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर विपक्षी दलों ने 26 जून 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और निर्दलीय सांसदों ने एक स्वर में आरोप लगाया कि विशेष जाँच दल (एसआईटी), उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मिलकर असली जिम्मेदारों को बचाने का काम कर रहे हैं।

विपक्ष की मुख्य आपत्तियाँ

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'अगर छोटी मछलियों को पकड़ना था, तो पहले ही पकड़ लेते। एसआईटी क्यों बनाई गई थी? जब एसआईटी बनाई थी, तो उसकी रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ? अगर उसकी रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है, तो एफआईआर एसआईटी को करानी चाहिए थी।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सख्त कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन इस मामले में वह सख्ती नहीं दिख रही।

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने कहा कि राम मंदिर को लूटा जा रहा है और 'डबल-इंजन' सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, 'जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह बहुत धीमी है। यह न सिर्फ एक धर्म के लोगों की भावनाओं को, बल्कि उन सभी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहा है जो हर धर्म का सम्मान करते हैं।'

ट्रस्ट प्रमुख पर सवाल

राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी चंपत राय को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, 'चंपत राय इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी हैं। उनकी देखरेख में सारा काम हो रहा है, तो जिम्मेदारी तो उन्हीं पर आनी चाहिए।' जूली ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी लाखों की जमीन को करोड़ों में ट्रस्ट के भीतर बेचा गया था, जिसका आज तक कोई जवाब नहीं है। उनके अनुसार यह कथित तौर पर लगभग ₹200 करोड़ के गबन का मामला है।

सपा का रुख: मास्टरमाइंड तक पहुँचे जाँच

समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण पांडे ने कहा कि मामले में पहले दिन ही एफआईआर दर्ज हो जानी चाहिए थी, जब अयोध्या के लोगों ने यह मुद्दा उठाना शुरू किया था। उन्होंने दावा किया कि इस हेराफेरी को सबसे पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 'राम मंदिर ट्रस्ट में गड़बड़ी और हेराफेरी हो रही है और 140 करोड़ लोगों की आस्था के साथ धोखा किया जा रहा है।'

पांडे ने आगे कहा कि एसआईटी, सरकार और ट्रस्ट कथित तौर पर मिले हुए हैं और असली कार्रवाई तभी मानी जाएगी जब बड़ी मछलियों पर एफआईआर दर्ज होगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों पर आरोप हैं, वे अब तक ट्रस्ट से इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे।

निर्दलीय सांसद का कड़ा बयान

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने तीखे शब्दों में कहा, 'जो राम को लाए हैं, वही राम को खा रहे हैं। इतने दिनों से चढ़ावे का गबन हो रहा था। इससे स्पष्ट है कि यह संगठित अपराध है।' उन्होंने एफआईआर में देरी को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर के प्रति देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी है। विपक्ष की माँग है कि एसआईटी जाँच का दायरा बढ़ाया जाए और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी पूछताछ हो। अब यह देखना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार और एसआईटी इन सवालों का जवाब किस रूप में देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील है। विपक्ष का 'छोटी-बड़ी मछली' वाला तर्क इसलिए असरदार है क्योंकि एसआईटी के गठन और एफआईआर के बीच की देरी अभी तक स्पष्ट नहीं हुई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी, जिनकी देखरेख में यह सब कथित तौर पर हुआ, अभी तक जाँच के दायरे से बाहर क्यों हैं। जब तक सरकार इस पारदर्शिता के अंतर को नहीं भरती, तब तक यह मामला भाजपा की 'राम राजनीति' के लिए एक असुविधाजनक प्रश्नचिह्न बना रहेगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान प्रकरण में एफआईआर किस पर और क्यों दर्ज हुई?
राम मंदिर के दान प्रकरण में 8 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिन पर चढ़ावे में गबन का आरोप है। विपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई बेहद देरी से हुई और इसमें केवल निचले स्तर के लोगों को ही शामिल किया गया है।
विपक्ष एसआईटी पर सवाल क्यों उठा रहा है?
विपक्षी नेताओं का तर्क है कि एसआईटी गठित होने के बावजूद उसकी रिपोर्ट पर समय से अमल नहीं हुआ और एफआईआर भी एसआईटी की जगह अन्य माध्यम से दर्ज कराई गई। सपा नेता तेज नारायण पांडे ने तो एसआईटी, सरकार और ट्रस्ट को कथित तौर पर एक-दूसरे का साथी बताया।
चंपत राय का इस विवाद से क्या संबंध है?
चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी हैं। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने कहा कि उनकी देखरेख में सारा काम होता है, इसलिए जिम्मेदारी उन पर भी आनी चाहिए।
इस मामले में कितने रुपये के गबन का आरोप है?
टीका राम जूली के अनुसार यह कथित तौर पर लगभग ₹200 करोड़ के गबन का मामला है। इसके अलावा उन्होंने पहले भी लाखों की जमीन को करोड़ों में ट्रस्ट के भीतर बेचे जाने का आरोप लगाया, जिसका अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
समाजवादी पार्टी ने इस मामले को पहले कब उठाया था?
सपा नेता तेज नारायण पांडे के अनुसार, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राम मंदिर ट्रस्ट में गड़बड़ी हो रही है और 140 करोड़ लोगों की आस्था के साथ धोखा किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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