3 जुलाई 2026
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राम मंदिर दान घोटाले पर मनोज झा का हमला: 'एसआईटी बड़ी मछलियों को बचाएगी, सुप्रीम कोर्ट निगरानी ज़रूरी'

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राम मंदिर दान घोटाले पर मनोज झा का हमला: 'एसआईटी बड़ी मछलियों को बचाएगी, सुप्रीम कोर्ट निगरानी ज़रूरी'

सारांश

राजद सांसद मनोज झा ने राम मंदिर दान घोटाले की एसआईटी जांच को 'बड़ी मछलियों को बचाने का खेल' बताया और सुप्रीम कोर्ट निगरानी की माँग का समर्थन किया। साथ ही चुनाव आयोग की साख और भागवत के विभाजन-बयान पर भी तीखा हमला बोला।

मुख्य बातें

राजद सांसद मनोज झा ने 3 जुलाई 2026 को राम मंदिर दान प्रकरण की एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल उठाए।
झा ने आरोप लगाया कि एसआईटी 'बड़ी मछलियों को बचाएगी और छोटी मछलियों को पकड़ेगी' ।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के सर्वोच्च न्यायालय निगरानी की माँग वाले पत्र का झा ने समर्थन किया।
प्रधानमंत्री मोदी की इस मामले पर चुप्पी को झा ने 'उचित नहीं' बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बयान पर झा ने कहा — पिछले आयुक्तों ने चुनावी संस्था की 'इमारत कमज़ोर' कर दी।
RSS प्रमुख मोहन भागवत के विभाजन-शरणार्थी बयान को झा ने 'एकांगी साहित्य पर आधारित' करार दिया।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने 3 जुलाई 2026 को राम मंदिर दान प्रकरण में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी असली जिम्मेदारों को बचाते हुए निचले स्तर के लोगों को निशाना बनाएगी। झा ने कांग्रेस की मांग का समर्थन करते हुए इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराए जाने की अपील की।

एसआईटी पर सीधा आरोप

मनोज झा ने कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मैं उनकी बात से सहमत हूं। एसआईटी की जो कार्यशैली मैंने बीते कुछ दिनों में देखी है, तो वो स्पष्ट तौर पर प्रतीत होता है कि बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश की जाएगी और छोटी मछलियों को पकड़ा जाएगा।' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पूरे मामले पर चुप्पी को भी अनुचित करार दिया।

राजनीतिक तंज: 'जो राम का चंदा खाए हैं'

झा ने तीखे राजनीतिक व्यंग्य में कहा, '2024 के चुनाव से पहले और राम मंदिर के उद्घाटन के बाद कई महीनों तक 'जो राम को लाए हैं' गाना चला था। अब 'जो राम का चंदा खाए हैं', इस पर जवाब देना होगा।' यह टिप्पणी सत्तारूढ़ दल पर सीधा निशाना थी, जिसने जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को एक प्रमुख राजनीतिक आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया था।

चुनाव आयोग पर भी उठाई आवाज़

इसी दौरान झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बडगाम में बूथ स्तरीय अधिकारियों से मुलाकात पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मैं उनसे बिल्कुल सहमत हूं, लेकिन आधा ही। नींव तो सचमुच मजबूत थी। सुकुमार सेन नींव रखकर गए थे, लेकिन अब जो इमारत पिछले दो-तीन चुनाव आयुक्तों ने खड़ी कर दी है, वो बहुत कमजोर हो गई है।' उन्होंने चेताया कि कमज़ोर संस्थागत ढाँचा अंततः चुनावी प्रक्रिया की मूल विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है।

भागवत के बयान पर पलटवार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं हैं — झा ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'उन्होंने पार्टीशन लिटरेचर नहीं पढ़ा है। नागपुर मुख्यालय में रखा गया साहित्य एकांगी है। अगर वे व्यापक विभाजन-साहित्य को पढ़ें तो शायद एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में उनकी भूमिका बेहतर होगी।' गौरतलब है कि विभाजन की स्मृतियों और उसके दस्तावेज़ीकरण पर यह बहस समय-समय पर राजनीतिक रंग लेती रही है।

आगे क्या

राम मंदिर दान प्रकरण में विपक्ष की माँग बढ़ती जा रही है कि जांच को सरकार-नियंत्रित एजेंसी के बजाय न्यायिक निगरानी में रखा जाए। सर्वोच्च न्यायालय इस विषय पर किसी याचिका पर सुनवाई करता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान प्रकरण क्या है और एसआईटी क्यों बनाई गई?
राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। विपक्ष का आरोप है कि दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
मनोज झा ने एसआईटी की कार्यशैली पर क्या आरोप लगाए?
राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि एसआईटी की बीते कुछ दिनों की कार्यशैली से स्पष्ट होता है कि 'बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश की जाएगी और छोटी मछलियों को पकड़ा जाएगा।' उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी को भी अनुचित बताया।
क्या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग की जा रही है?
हाँ। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की माँग की है, जिसका मनोज झा ने समर्थन किया है। अभी तक सरकार की ओर से इस माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मनोज झा ने चुनाव आयोग के बारे में क्या कहा?
झा ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया की नींव सुकुमार सेन जैसे शुरुआती आयुक्तों ने मज़बूत रखी थी, लेकिन पिछले दो-तीन चुनाव आयुक्तों ने संस्था की 'इमारत कमज़ोर' कर दी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस पर ध्यान देने की अपील की।
मोहन भागवत के विभाजन-बयान पर झा की क्या प्रतिक्रिया थी?
झा ने कहा कि भागवत ने व्यापक विभाजन-साहित्य नहीं पढ़ा है और संघ मुख्यालय का साहित्य 'एकांगी' है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि भागवत विविध दृष्टिकोणों से लिखे गए विभाजन-साहित्य को पढ़ें तो एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में उनकी भूमिका बेहतर हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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