13 जुलाई 2026
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राजद सांसद मनोज झा का केंद्र पर हमला: राम मंदिर चंदा विवाद, चुनाव आयोग और यूसीसी पर उठाए सवाल

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राजद सांसद मनोज झा का केंद्र पर हमला: राम मंदिर चंदा विवाद, चुनाव आयोग और यूसीसी पर उठाए सवाल

सारांश

राजद सांसद मनोज झा ने एक साथ कई मोर्चों पर केंद्र को घेरा — राम मंदिर चंदा विवाद में निष्पक्ष जाँच की माँग, चुनाव आयोग की घटती साख पर चिंता, यूसीसी की जगह समान रोजगार नीति की दरकार, और बांकीपुर उपचुनाव पर BJP पर तीखा व्यंग्य।

मुख्य बातें

राजद सांसद मनोज झा ने 13 जुलाई को राम मंदिर चंदा विवाद, चुनाव आयोग और यूसीसी पर BJP व केंद्र सरकार को घेरा।
झा ने माँग की कि राम मंदिर चंदा मामले में सर्वोच्च न्यायालय सभी प्रभावशाली नामों को सार्वजनिक करे, न कि केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई हो।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर चिंता जताते हुए कहा कि आम नागरिक का संस्था पर भरोसा पहले जैसा नहीं रहा।
यूसीसी से पहले अनुच्छेद 39 के तहत समान रोजगार नीति लागू करने की माँग रखी।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में BJP के उम्मीदवार चयन पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने 13 जुलाई को पटना में राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव सहित कई मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को घेरा। उनका आरोप था कि सरकार जनता की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने में लगी है।

राम मंदिर चंदा विवाद: आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई पर मनोज झा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह स्थिति उत्पन्न कैसे हुई। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राम मंदिर को केंद्र में रखकर व्यापक राजनीतिक अभियान चलाया गया और 'जो राम को लाए हैं' जैसे नारे दिए गए।

झा ने स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ का है। उन्होंने माँग की कि यदि न्यायालय इस मामले में पहल करे तो सभी संलिप्त नाम — चाहे वे कितने भी प्रभावशाली हों — सार्वजनिक होने चाहिए। उनके अनुसार, केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई और बड़े लोगों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं है।

चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी की नई पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा चुनाव आयोग को 'लोकतंत्र की आत्मा' कहे जाने के संदर्भ में झा ने कहा कि उस टिप्पणी को उसके मूल परिप्रेक्ष्य में समझा जाना चाहिए। उनके अनुसार, डॉ. सिंह के कार्यकाल में संस्था की विश्वसनीयता बनी हुई थी और उस दौर में भी सवाल उठते थे, लेकिन उनका जवाब अहंकार या राजनीतिक बयानबाजी से नहीं दिया जाता था।

झा ने चिंता जताई कि आज आम नागरिक का चुनाव आयोग पर भरोसा पहले जैसा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है और इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

यूसीसी पर BJP को घेरा, समान रोजगार नीति की माँग

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान के संदर्भ में झा ने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी वास्तव में कोई ठोस काम नहीं कर रही, बल्कि राजनीतिक स्वांग रच रही है।

उन्होंने तर्क दिया कि देश में आय की बढ़ती असमानता, गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और परीक्षा पत्र लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा नहीं हो रही, जबकि इनका सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ता है। झा ने संविधान के अनुच्छेद 39 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह आय और संपत्ति की असमानता कम करे — और यह दायित्व अनुच्छेद 44 (यूसीसी) से पहले का है। उन्होंने माँग की कि सरकार सबसे पहले पूरे देश में समान रोजगार नीति (यूनिफॉर्म एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी) लागू करे।

बांकीपुर उपचुनाव पर BJP पर व्यंग्य

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर झा ने BJP पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष से जुड़ा है, इसलिए उनकी सक्रियता स्वाभाविक है। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि जिस उम्मीदवार को दूसरी बार टिकट मिला है, वह नामांकन के अंतिम क्षणों तक बरकरार रहे और अंतिम समय पर कोई नया उम्मीदवार सामने न आ जाए।

आगे क्या

राम मंदिर चंदा मामले में सर्वोच्च न्यायालय की अगली सुनवाई और बांकीपुर उपचुनाव की नामांकन प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। झा के बयान से स्पष्ट है कि विपक्ष इन मुद्दों को आगामी राजनीतिक विमर्श में केंद्रीय बनाए रखने की रणनीति पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विपक्ष को यह भी बताना होगा कि वह सत्ता में रहते हुए संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर कितना सजग रहा। यूसीसी की जगह समान रोजगार नीति की माँग एक नई बहस की शुरुआत कर सकती है, लेकिन यह विमर्श तब तक सीमित रहेगा जब तक विपक्ष के पास इसका ठोस खाका न हो। बांकीपुर उपचुनाव पर व्यंग्य राजनीतिक है, पर असली परीक्षा मैदान में होगी।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज झा ने राम मंदिर चंदा विवाद पर क्या कहा?
राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ का है। उन्होंने माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय की पहल पर सभी संलिप्त प्रभावशाली नाम सार्वजनिक हों और केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई न हो।
झा ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर क्या चिंता जताई?
मनोज झा ने कहा कि आज आम नागरिक का चुनाव आयोग पर भरोसा पहले जैसा नहीं रहा। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी की पुस्तक के हवाले से कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में संस्था की विश्वसनीयता बेहतर थी और सवालों का जवाब अहंकार से नहीं दिया जाता था।
राजद सांसद ने यूसीसी पर क्या रुख अपनाया?
मनोज झा ने यूसीसी को राजनीतिक स्वांग बताया और कहा कि सरकार को पहले संविधान के अनुच्छेद 39 के तहत आय-संपत्ति की असमानता दूर करनी चाहिए। उन्होंने पूरे देश में समान रोजगार नीति लागू करने को प्राथमिकता देने की माँग रखी।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर झा ने क्या कहा?
झा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि बांकीपुर BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष से जुड़ा क्षेत्र है, इसलिए उनकी सक्रियता स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि वे प्रार्थना करते हैं कि BJP का चुना हुआ उम्मीदवार नामांकन के अंतिम क्षण तक बरकरार रहे।
मनोज झा ने सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप क्यों लगाया?
झा का कहना था कि बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी और परीक्षा पत्र लीक जैसे असली मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही, जबकि इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। उनके अनुसार, BJP यूसीसी जैसे विषयों को उठाकर इन समस्याओं से ध्यान हटाती है।
राष्ट्र प्रेस
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