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राम मंदिर चंदा चोरी: हन्नान मोल्लाह की माँग — सुप्रीम कोर्ट निगरानी में हो जाँच, PM मोदी दें इस्तीफा

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राम मंदिर चंदा चोरी: हन्नान मोल्लाह की माँग — सुप्रीम कोर्ट निगरानी में हो जाँच, PM मोदी दें इस्तीफा

सारांश

माकपा नेता हन्नान मोल्लाह ने राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जाँच और PM मोदी के इस्तीफे की माँग की। उनका कहना है कि राम के नाम पर धन और सत्ता अर्जित करने वाले सच्चे भक्त नहीं, बल्कि धर्म और देश के विरोधी हैं।

मुख्य बातें

माकपा नेता हन्नान मोल्लाह ने 4 जुलाई 2026 को राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जाँच की माँग की।
मोल्लाह ने PM नरेंद्र मोदी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए माफी और इस्तीफे की अपील की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा जाँच समिति केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर असली जिम्मेदारों को बचाएगी।
गुजरात एटीएस द्वारा 8 संदिग्धों की गिरफ्तारी पर निष्पक्ष जाँच की माँग; BJP और RSS से जुड़े लोगों की भूमिका जाँचने का आग्रह।
इंडिया ब्लॉक के मुख्य न्यायाधीश को पत्र का समर्थन; SIR प्रक्रिया से मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप।
उमर अब्दुल्ला के भारत-पाकिस्तान संवाद बयान का समर्थन; हथियारों की बजाय बातचीत को स्थायी समाधान बताया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता हन्नान मोल्लाह ने 4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माँग की कि इस पूरे मामले की जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राम के नाम का उपयोग कर धन कमाने और सत्ता हासिल करने वाले लोग वास्तविक भक्त नहीं, बल्कि धर्म और देश के विरोधी हैं।

मुख्य आरोप और माँगें

मोल्लाह ने कहा कि जो लोग स्वयं को राम का ठेकेदार बताते हैं, वे सच्चे अर्थों में राम भक्त नहीं हैं। उनके अनुसार, 'सच्चा भक्त भगवान से डरता है और गलत कार्य नहीं करता, जबकि ये लोग भगवान के नाम पर जनता को लड़ाकर धन और सत्ता अर्जित कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा जाँच समिति से कोई बड़ी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है और केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर असली जिम्मेदारों को बचाया जाएगा।

मोल्लाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए माफी माँगने और इस्तीफा देने की माँग की। उनका तर्क था कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की नियुक्तियाँ केंद्र सरकार के स्तर पर हुई हैं, इसलिए इस घोटाले की जिम्मेदारी सरकार से अलग नहीं की जा सकती।

चंदा दुरुपयोग का इतिहास

मोल्लाह ने कहा कि ईंट संग्रह अभियान के दौर से ही धन के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनके अनुसार जमीन की खरीद, निर्माण कार्यों और अन्य प्रक्रियाओं में भी अनियमितताएँ हुईं। यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या के कुछ संतों ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और समाजवादी पार्टी पर राम मंदिर को बदनाम करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। मोल्लाह ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जो घटनाएँ सार्वजनिक रूप से सामने आ चुकी हैं, उन्हें उजागर करना बदनाम करना नहीं है।

गुजरात एटीएस गिरफ्तारी और सांप्रदायिक आरोप

गुजरात एटीएस द्वारा आतंकवादी संगठन से जुड़े कथित 8 संदिग्धों की गिरफ्तारी पर मोल्लाह ने कहा कि हाल के महीनों में कई राज्यों से ऐसी खबरें सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मुस्लिम पहचान का भेष धारण कर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई। उनके अनुसार इन मामलों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और यदि किसी समुदाय को बदनाम करने की साजिश है तो उसे भी सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने माँग की कि ऐसे मामलों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जाँच हो।

चुनावी पारदर्शिता और मुख्य न्यायाधीश को पत्र

इंडिया ब्लॉक द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश को चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर पत्र लिखे जाने पर मोल्लाह ने कहा कि BJP सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर आरोप लगाया कि इसके जरिए बड़ी संख्या में विपक्षी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विवाद चल रहे हैं।

भारत-पाकिस्तान संवाद पर रुख

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भारत-पाकिस्तान बातचीत संबंधी बयान का समर्थन करते हुए मोल्लाह ने कहा कि पड़ोसी देशों को बदला नहीं जा सकता, इसलिए संवाद ही एकमात्र स्थायी समाधान है। उनके अनुसार हथियारों से कोई दीर्घकालिक हल नहीं निकलेगा और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को बैठकर बातचीत करनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि विपक्ष की ये माँगें संसद और अदालत में किस रूप में आगे बढ़ती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब तक कोई ठोस जाँच नहीं हुई। मोल्लाह की माँग में दम इसलिए है क्योंकि ट्रस्ट की नियुक्तियाँ सरकार ने की हैं — यानी सरकार और ट्रस्ट एक-दूसरे की जाँच नहीं कर सकते। बिना सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के, यह जाँच उसी पैटर्न का हिस्सा बनने का जोखिम उठाती है जहाँ प्रक्रिया दिखती है, पर जवाबदेही नहीं।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हन्नान मोल्लाह ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले में क्या माँग की है?
माकपा नेता हन्नान मोल्लाह ने माँग की है कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जाँच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि मौजूदा जाँच समिति केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर असली जिम्मेदारों को बचाएगी।
मोल्लाह ने PM मोदी से इस्तीफे की माँग क्यों की?
मोल्लाह का तर्क है कि राम मंदिर ट्रस्ट की नियुक्तियाँ केंद्र सरकार के स्तर पर हुई हैं, इसलिए ट्रस्ट में हुई अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी PM मोदी पर भी बनती है। उन्होंने मोदी से माफी माँगने और इस्तीफा देने की अपील की।
गुजरात एटीएस गिरफ्तारियों पर मोल्लाह का क्या कहना है?
मोल्लाह ने कहा कि गुजरात एटीएस द्वारा 8 संदिग्धों की गिरफ्तारी समेत ऐसे मामलों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मुस्लिम पहचान का भेष धारण कर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई और BJP-RSS से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए।
इंडिया ब्लॉक ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र क्यों लिखा?
इंडिया ब्लॉक ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि BJP सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और SIR प्रक्रिया के जरिए विपक्षी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। मोल्लाह ने इस पत्र का समर्थन करते हुए कहा कि अदालत ही अंतिम संवैधानिक संस्था है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर मोल्लाह का क्या रुख है?
मोल्लाह ने जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला के संवाद संबंधी बयान का समर्थन किया और कहा कि हथियारों से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। उनके अनुसार दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को बैठकर बातचीत करनी चाहिए क्योंकि पड़ोसी देशों को बदला नहीं जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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