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राम जन्मभूमि दान विवाद: एसआईटी रिपोर्ट के बाद 8 नामजद आरोपियों पर एफआईआर, देवेशाचार महाराज ने की सराहना

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राम जन्मभूमि दान विवाद: एसआईटी रिपोर्ट के बाद 8 नामजद आरोपियों पर एफआईआर, देवेशाचार महाराज ने की सराहना

सारांश

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र दान विवाद में एसआईटी की रिपोर्ट के बाद 8 नामजद आरोपियों पर एफआईआर दर्ज हुई। देवेशाचार महाराज ने कार्रवाई का स्वागत करते हुए कठोर दंड की माँग की और कहा कि यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था।

मुख्य बातें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में 8 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध 25 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की गई।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत और कठोर संस्तुतियाँ दिए जाने के बाद यह कार्रवाई हुई।
देवेशाचार महाराज ने एफआईआर का स्वागत किया और कहा कि यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था।
महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माँग की कि दोषियों को ऐसा दंड दिया जाए जो भविष्य के लिए उदाहरण बने।
महाराज ने इस प्रकरण को सनातन समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया और निष्पक्ष जांच जारी रहने का विश्वास जताया।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के दान प्रकरण में 25 जून 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है। तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किए जाने और कठोर संस्तुतियाँ दिए जाने के बाद यह मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने जांच पूरी करने के उपरांत अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी। मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद दोषियों के विरुद्ध औपचारिक कार्रवाई प्रारंभ हुई।

देवेशाचार महाराज की प्रतिक्रिया

एफआईआर दर्ज होने पर देवेशाचार महाराज ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यह कार्रवाई बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों पर आरोप लगे थे, उन्हें तत्काल हिरासत में लेकर गहन जांच-पड़ताल की जानी चाहिए थी।' महाराज ने यह भी स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरुआत से ही प्रदेशवासियों और सनातन समाज को आश्वस्त किया था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी।

कठोर दंड की माँग

देवेशाचार महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माँग की कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए उदाहरण बन सके। उन्होंने कहा कि रामभक्तों, सनातन समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में विश्वासघात करने वालों को ऐसा दंड मिलना चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

सनातन समाज के लिए चिंताजनक संकेत

इस पूरे प्रकरण को सनातन समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए देवेशाचार महाराज ने कहा कि यह घटना विशेष रूप से इसलिए भी दुखद है क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं एक संत हैं और उनके कार्यकाल में इस प्रकार के आरोप सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।

आगे क्या होगा

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियों पर यह दबाव होगा कि नामजद आरोपियों से पूछताछ कर मामले को तार्किक अंजाम तक पहुँचाया जाए। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या अज्ञात आरोपियों की पहचान भी शीघ्र की जाती है और क्या दान राशि की वसूली के लिए कोई कदम उठाए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली परीक्षा आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी और दान राशि की वसूली में होगी। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस तेज़ है। गौरतलब है कि स्वयं मुख्यमंत्री के संत होने के बावजूद उनके कार्यकाल में इस प्रकार के आरोप सामने आना सरकार की निगरानी तंत्र पर सवाल उठाता है। बिना समयबद्ध और सार्वजनिक जवाबदेही के, यह कार्रवाई केवल कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह सकती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम जन्मभूमि दान विवाद में एफआईआर किसके विरुद्ध दर्ज हुई है?
एफआईआर में 8 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों को शामिल किया गया है। यह कार्रवाई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं की संस्तुति के आधार पर की गई है।
एसआईटी का गठन क्यों किया गया था?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई।
देवेशाचार महाराज ने इस कार्रवाई पर क्या कहा?
देवेशाचार महाराज ने एफआईआर दर्ज होने का स्वागत किया और कहा कि यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने माँग की कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसे ऐसा कठोर दंड मिले जो भविष्य में धार्मिक आस्था से खिलवाड़ रोकने का उदाहरण बने।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस मामले में क्या भूमिका रही है?
देवेशाचार महाराज के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री के संज्ञान में एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ हुई।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई अपेक्षित है?
एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों द्वारा नामजद आरोपियों से पूछताछ और अज्ञात आरोपियों की पहचान अपेक्षित है। देवेशाचार महाराज ने उम्मीद जताई है कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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