अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: 8 नामजद आरोपियों पर पहली एफआईआर, एसआईटी रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में 25 जून 2026 को राम मंदिर दान प्रकरण में पहली एफआईआर (अपराध संख्या 90/2026) दर्ज की गई, जिसमें 8 नामजद आरोपियों सहित अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज हुआ, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कठोर संस्तुतियों के ठीक बाद की गई कार्रवाई है।
किन आरोपियों पर दर्ज हुई एफआईआर
एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया है। इनके अलावा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी अभियुक्त बनाया गया है।
आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गुरुवार देर रात तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, हालांकि आरोपियों से पूछताछ जारी बताई जा रही है।
एसआईटी जांच और प्रारंभिक रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को लखनऊ मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था और निर्धारित समयावधि में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। गत मंगलवार को एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने टीम के दो अन्य सदस्यों के साथ शासन को प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें कठोर संस्तुतियां की गई हैं।
इसी रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई अमल में लाई गई। मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से 'दूध का दूध और पानी का पानी' होकर रहेगा और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
यह प्रकरण जून 2026 के पहले सप्ताह में उस समय सार्वजनिक चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने मंदिर परिसर में प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया के ज़रिए प्रतिक्रिया देते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
विपक्ष के आरोपों के जवाब में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक स्पष्टीकरण जारी कर दान-प्रबंधन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया और किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया। बावजूद इसके मामला राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बना रहा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
आरोपों के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने निष्पक्ष जांच की माँग तेज कर दी थी। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े वित्तीय प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता की माँग पहले से उठती रही है। गौरतलब है कि मंदिर ट्रस्ट ने स्वयं विशेष जांच का अनुरोध किया था, जो इस प्रकरण की गंभीरता को रेखांकित करता है।
एसआईटी की विस्तृत अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। जांच के अगले चरण में गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।