अयोध्या चढ़ावा घोटाले में SIT जांच की समय-सीमा 15 जुलाई तक बढ़ी, सभी 8 नामजद गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में दान प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा 15 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी है। SIT ने मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया था, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया। इस बीच, मामले में दर्ज एफआईआर के सभी 8 नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
SIT का गठन स्वयं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। 23 जून को SIT के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन गृह विभाग को सौंपा, जिसमें कठोर संस्तुतियाँ की गई थीं।
इन संस्तुतियों के आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई। इस एफआईआर में 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, सभी नामजद अभियुक्त अब न्यायिक हिरासत में हैं।
सरकार का रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि SIT इस प्रकरण में हर पहलू की सघनता और निष्पक्षता से जांच करेगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने हर मंच से यह संदेश दोहराया है कि जांच में किसी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब राममंदिर से जुड़े किसी भी विवाद पर जनभावनाएँ अत्यंत संवेदनशील हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज़ है। समाजवादी पार्टी (सपा) के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) भी इस प्रकरण को लेकर सरकार पर हमलावर है। आलोचकों का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रहा है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्ष के आरोपों को SIT की स्वतंत्र जांच का हवाला देते हुए खारिज करते रहे हैं।
आगे क्या होगा
SIT को अब 15 जुलाई 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। रिपोर्ट में मामले के सभी पहलुओं — वित्तीय अनियमितताओं, जिम्मेदारी-निर्धारण और भविष्य की व्यवस्था — पर विस्तृत संस्तुतियाँ अपेक्षित हैं। पूरे प्रदेश की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यह राममंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकती है।