मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा 2025: हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचे भक्त, इंतजामों की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 27 जुलाई 2025 को सालाना कांवड़ यात्रा ने गति पकड़ ली है — भगवान शिव के हज़ारों भक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर जिले में पहुंचने लगे हैं। उत्तर भारत के सबसे विशाल धार्मिक आयोजनों में शुमार इस यात्रा के दौरान कांवड़िए मुजफ्फरनगर से होते हुए विभिन्न शिव मंदिरों की ओर बढ़ रहे हैं।
शिव चौक पर उमड़ी भक्तों की भीड़
कलात्मक ढंग से सजाई गई कांवड़ें मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर पहुंचने लगी हैं, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। स्थानीय युवतियों ने आने वाले कांवड़ियों का स्वागत किया और उनकी कांवड़ों की अनूठी सज्जा की प्रशंसा की। मेरठ जिले के निवासी कांवड़िया भोले अपनी सजी हुई कांवड़ और पवित्र गंगाजल लेकर शिव चौक पहुंचे, जहाँ उनका विशेष स्वागत किया गया।
भक्तों की प्रतिक्रिया
शिव भक्त आदेश ने बताया, '23 जुलाई को हमने पवित्र जल इकट्ठा किया था। हम 10 अगस्त तक अपने इलाके में पहुंच जाएंगे और 13 अगस्त को अपने मंदिर में गंगाजल चढ़ाएंगे। कांवड़ यात्रा के लिए किए गए इंतजाम बहुत अच्छे हैं और हमें कोई परेशानी नहीं हुई।'
राजस्थान के निवासी भक्त दीपक ने कहा, 'मैंने हरिद्वार में हर की पौड़ी से पवित्र जल एकत्र किया और इसे मेरठ के काली पलटन स्थित अघोरनाथ मंदिर ले जा रहा हूं। यहाँ सब कुछ बेहद सुव्यवस्थित है।'
प्रशासन की तैयारियाँ
जिला प्रशासन और पुलिस ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के व्यापक प्रबंध किए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर उत्तर भारत भर के शिव मंदिरों की ओर निकल रहे हैं।
यात्रा का कार्यक्रम
कांवड़ यात्रा आधिकारिक रूप से 30 जुलाई को सावन के पवित्र महीने के पहले दिन से शुरू होगी और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के अवसर पर समाप्त होगी। इस साल की यात्रा कुल 13 दिनों तक चलेगी।
गौरतलब है कि सावन शिवरात्रि कांवड़ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब कांवड़िए शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित कर जलाभिषेक करते हैं। इस वर्ष यह पवित्र अनुष्ठान 11 अगस्त को संपन्न होगा, जो यात्रा के समापन और भक्तों की धार्मिक विधियों की पूर्णता का प्रतीक होगा।