27 जुलाई 2026
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मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा 2025: हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचे भक्त, इंतजामों की सराहना

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मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा 2025: हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचे भक्त, इंतजामों की सराहना

सारांश

सावन की शुरुआत से पहले ही मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर कांवड़ियों का आना शुरू हो गया है। हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर आए भक्तों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की तारीफ की। 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलने वाली इस 13 दिवसीय यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर 27 जुलाई 2025 से कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचने लगे हैं।
कांवड़ यात्रा आधिकारिक रूप से 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त (सावन शिवरात्रि) तक चलेगी — कुल 13 दिन ।
भक्त आदेश ने 23 जुलाई को हरिद्वार से जल एकत्र किया और 13 अगस्त को मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।
राजस्थान के भक्त दीपक हर की पौड़ी से जल लेकर मेरठ के अघोरनाथ मंदिर जा रहे हैं।
जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व लॉजिस्टिक्स के व्यापक प्रबंध किए हैं, भक्तों ने इंतजामों की सराहना की।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 27 जुलाई 2025 को सालाना कांवड़ यात्रा ने गति पकड़ ली है — भगवान शिव के हज़ारों भक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर जिले में पहुंचने लगे हैं। उत्तर भारत के सबसे विशाल धार्मिक आयोजनों में शुमार इस यात्रा के दौरान कांवड़िए मुजफ्फरनगर से होते हुए विभिन्न शिव मंदिरों की ओर बढ़ रहे हैं।

शिव चौक पर उमड़ी भक्तों की भीड़

कलात्मक ढंग से सजाई गई कांवड़ें मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर पहुंचने लगी हैं, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। स्थानीय युवतियों ने आने वाले कांवड़ियों का स्वागत किया और उनकी कांवड़ों की अनूठी सज्जा की प्रशंसा की। मेरठ जिले के निवासी कांवड़िया भोले अपनी सजी हुई कांवड़ और पवित्र गंगाजल लेकर शिव चौक पहुंचे, जहाँ उनका विशेष स्वागत किया गया।

भक्तों की प्रतिक्रिया

शिव भक्त आदेश ने बताया, '23 जुलाई को हमने पवित्र जल इकट्ठा किया था। हम 10 अगस्त तक अपने इलाके में पहुंच जाएंगे और 13 अगस्त को अपने मंदिर में गंगाजल चढ़ाएंगे। कांवड़ यात्रा के लिए किए गए इंतजाम बहुत अच्छे हैं और हमें कोई परेशानी नहीं हुई।'

राजस्थान के निवासी भक्त दीपक ने कहा, 'मैंने हरिद्वार में हर की पौड़ी से पवित्र जल एकत्र किया और इसे मेरठ के काली पलटन स्थित अघोरनाथ मंदिर ले जा रहा हूं। यहाँ सब कुछ बेहद सुव्यवस्थित है।'

प्रशासन की तैयारियाँ

जिला प्रशासन और पुलिस ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के व्यापक प्रबंध किए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर उत्तर भारत भर के शिव मंदिरों की ओर निकल रहे हैं।

यात्रा का कार्यक्रम

कांवड़ यात्रा आधिकारिक रूप से 30 जुलाई को सावन के पवित्र महीने के पहले दिन से शुरू होगी और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के अवसर पर समाप्त होगी। इस साल की यात्रा कुल 13 दिनों तक चलेगी।

गौरतलब है कि सावन शिवरात्रि कांवड़ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब कांवड़िए शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित कर जलाभिषेक करते हैं। इस वर्ष यह पवित्र अनुष्ठान 11 अगस्त को संपन्न होगा, जो यात्रा के समापन और भक्तों की धार्मिक विधियों की पूर्णता का प्रतीक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और मुजफ्फरनगर जैसे संवेदनशील जिले में सुचारू प्रबंधन की अहमियत और भी बढ़ जाती है। भक्तों की सकारात्मक प्रतिक्रिया प्रशासन के लिए राहत की बात है, लेकिन असली परीक्षा 30 जुलाई के बाद भीड़ के चरम पर होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लाखों कांवड़ियों के एक साथ निकलने पर यातायात, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था कितनी टिकाऊ साबित होती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांवड़ यात्रा 2025 कब से कब तक चलेगी?
कांवड़ यात्रा 2025 आधिकारिक रूप से 30 जुलाई को सावन के पहले दिन शुरू होगी और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि पर समाप्त होगी। इस वर्ष यात्रा कुल 13 दिनों की होगी।
कांवड़ यात्रा में भक्त गंगाजल कहाँ से लेते हैं?
अधिकांश कांवड़िए हरिद्वार की हर की पौड़ी, ऋषिकेश और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल एकत्र करते हैं। इसके बाद वे इसे पैदल या अन्य माध्यमों से उत्तर भारत के विभिन्न शिव मंदिरों तक पहुंचाते हैं।
सावन शिवरात्रि 2025 कब है और इसका क्या महत्व है?
सावन शिवरात्रि 2025 में 11 अगस्त को पड़ रही है। यह कांवड़ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है, जब कांवड़िए शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर जलाभिषेक करते हैं और अपनी धार्मिक विधियाँ पूर्ण करते हैं।
मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
जिला प्रशासन और पुलिस ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के व्यापक प्रबंध किए हैं। आने वाले भक्तों ने इन इंतजामों की सराहना की है और किसी परेशानी की शिकायत नहीं की।
कांवड़ यात्रा में कितने भक्त शामिल होते हैं?
कांवड़ यात्रा उत्तर भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस वर्ष लाखों भक्तों के हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर उत्तर भारत भर के शिव मंदिरों तक पहुंचने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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