स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ रक्षा यात्रा की शुरुआत, बोले- यह धर्मयुद्ध है, राजनीति नहीं
सारांश
Key Takeaways
- यात्रा का उद्देश्य: गाय को राज्य माता का दर्जा दिलाना।
- धार्मिक महत्व: गंगा और गोमती का गाय से संबंध।
- समाज में जागरूकता: गायों के प्रति सम्मान बढ़ाने का प्रयास।
- सभी का स्वागत: श्रद्धा के अनुसार भागीदारी।
- 11 मार्च को लखनऊ में प्रदर्शन: यात्रा का समापन।
वाराणसी, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को अपनी गौ रक्षा यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा 7 मार्च को वाराणसी से आरंभ होकर विभिन्न जिलों से गुजरेगी और 11 मार्च को लखनऊ में एक विशाल धरना प्रदर्शन के साथ समाप्त होगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाय को राज्य माता का दर्जा दिलाना है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार की सुबह अपने आश्रम से गौ रक्षा यात्रा की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने कहा कि गंगा से गोमती की दिशा में यात्रा करना केवल मार्ग का निर्धारण नहीं है, बल्कि यह धर्म और गाय के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम है। गंगा गायमुख से प्रकट होती है और गोमती का नाम भी गाय से संबंधित है।
यात्रा की शुरूआत वे चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन करके करेंगे, जहां वे यात्रा की सफलता की प्रार्थना करेंगे। इसके बाद, संकट मोचन मंदिर में हनुमान जी से गायों की सुरक्षा के लिए आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान जौनपुर में वे जमदग्नि ऋषि के आश्रम का दौरा करेंगे, जिन्होंने गायों और लोगों की रक्षा की थी। राजा कार्तवीर्य द्वारा गायों पर अत्याचार किया गया था, लेकिन परशुराम जी ने उनके संरक्षण में हस्तक्षेप किया था। इसके बाद यात्रा सुलतानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज, लालगंज होते हुए लखनऊ की ओर बढ़ेगी।
शंकराचार्य ने मीडिया से कहा कि यह यात्रा कोई राजनीतिक मुहिम नहीं है। उनका लक्ष्य गाय माता की सुरक्षा करना और समाज में गायों के महत्व को स्थापित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें किसी संगठन या पार्टी का समर्थन नहीं है, यह पूरी तरह से लोगों की भावनाओं और धर्म की रक्षा हेतु है। यात्रा में सभी लोग अपनी श्रद्धा और आस्था के अनुसार भाग लेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि गंगा और गोमती का नाम भी गाय से जुड़ा हुआ है। गंगा की उत्पत्ति गौमुख से होती है और गोमती का अर्थ गाय वाली नदी है। लखनऊ गोमती नदी के किनारे बसा है, इसलिए इस यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि जिस नदी के किनारे गायें रहती हैं, वहां का समाज और संस्कृति मजबूत होती है। इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और गायों के प्रति सम्मान बढ़ाना है।
उन्होंने बताया कि 11 मार्च को लखनऊ से गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शंखनाद होगा और हम अपनी बात को पूरी शक्ति के साथ रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा लोगों को एकजुट करने, गायों के महत्व को समझाने और उनकी सुरक्षा के लिए खड़ा होने का प्रयास है।