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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का UP सरकार पर आरोप: गोशालाओं का 4 माह का CCTV फुटेज करें सार्वजनिक

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का UP सरकार पर आरोप: गोशालाओं का 4 माह का CCTV फुटेज करें सार्वजनिक

सारांश

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 81 दिनों की 'गो विशिष्ट यात्रा' के बाद UP सरकार को सीधी चुनौती दी है — गोशालाओं का 4 माह का CCTV फुटेज सार्वजनिक करो, वरना गोभक्त खुद ज़मीनी सच्चाई दस्तावेज़ करेंगे। सरकारी विज्ञापनों में 12 लाख गायों की देखभाल के दावों पर उन्होंने सीधा सवाल उठाया है।

मुख्य बातें

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 26 जुलाई को वाराणसी में उत्तर प्रदेश सरकार पर गो संरक्षण की वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाया।
उनकी 81 दिनों की 'गो विशिष्ट यात्रा' सफलतापूर्वक संपन्न हुई; यात्रा के बाद यह विवाद सामने आया।
सरकार पर आरोप — 26 जुलाई के अखबारी विज्ञापनों में 12 लाख गायों की देखभाल के दावे वास्तविकता से परे बताए गए।
कथित तौर पर गोरक्षा संकल्प सभा में भागीदारी रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर समर्थकों को घरों में नजरबंद किया।
माँग: गो आश्रय केंद्रों का पिछले 4 महीनों का CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा गोभक्त स्वयं दस्तावेजीकरण करेंगे।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 26 जुलाई को वाराणसी में मीडिया से बातचीत करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए — उनका कहना है कि सरकार गो संरक्षण की वास्तविक स्थिति को विज्ञापनों की आड़ में छुपा रही है और उनकी 'गो विशिष्ट यात्रा' के समर्थकों को उनके घरों में नजरबंद करवाया गया। उन्होंने सरकार से प्रदेश के गो आश्रय केंद्रों का पिछले चार महीनों का सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की माँग की है।

81 दिनों की यात्रा और उसके बाद का घटनाक्रम

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उनकी 81 दिनों तक चली 'गो विशिष्ट यात्रा' सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। उन्होंने यात्रा में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह यात्रा गो संरक्षण की ज़मीनी स्थिति को उजागर करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।

गौरतलब है कि यात्रा की समाप्ति के ठीक बाद ही सरकार और शंकराचार्य के बीच वाकयुद्ध तेज हो गया, जो अब सार्वजनिक जवाबदेही की माँग तक पहुँच गया है।

सरकारी विज्ञापनों पर आरोप

शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 जुलाई को समाचार पत्रों में ऐसे विज्ञापन प्रकाशित कराए, जिनमें कथित तौर पर वास्तविकता से परे तथ्य प्रस्तुत किए गए। उन्होंने कहा कि इन विज्ञापनों में दावा किया गया है कि प्रदेश की लगभग 12 लाख गायों की बेहतर तरीके से देखभाल की जा रही है — एक दावा जिसे उन्होंने अपनी यात्रा के अनुभव के आधार पर चुनौती दी।

उनका कहना है कि एक ओर सरकार विज्ञापनों के माध्यम से गो संरक्षण की सकारात्मक तस्वीर पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी सच्चाई को सामने आने से रोका जा रहा है।

समर्थकों को नजरबंद करने का आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी गोरक्षा संकल्प सभा में लोगों की भागीदारी रोकने के लिए कई स्थानों पर पुलिस ने समर्थकों को उनके घरों में ही नजरबंद किया। उन्होंने इस घटनाक्रम को सार्वजनिक करने की माँग करते हुए कहा कि मीडिया को इसे जनता तक पहुँचाना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण नीति को लेकर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों में बहस पहले से ही तेज है।

CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की माँग

शंकराचार्य ने सरकार के सामने स्पष्ट शर्त रखी — यदि गो आश्रय केंद्रों का पिछले चार महीनों का सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक नहीं किया गया, तो वे अपने गोभक्तों की टोली से अपील करेंगे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की गोशालाओं की तस्वीरें और तथ्य एकत्र कर जनता के सामने वास्तविक स्थिति प्रस्तुत करें।

इस माँग को धार्मिक नेतृत्व द्वारा सरकारी पारदर्शिता पर दबाव बनाने की एक असामान्य लेकिन सुविचारित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से शंकराचार्य के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सरकार सीसीटीवी फुटेज जारी नहीं करती, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार गोभक्त स्वयं दस्तावेजीकरण अभियान शुरू करेंगे, जो इस विवाद को और व्यापक रूप दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गोशालाओं में मवेशियों की दुर्दशा की खबरें भी लगातार आती रही हैं। सरकारी विज्ञापनों में '12 लाख गायों की बेहतर देखभाल' का दावा और उसी दिन शंकराचार्य का खंडन — यह टकराव बताता है कि नीति और क्रियान्वयन के बीच की खाई अब धार्मिक नेतृत्व के लिए भी असहनीय हो चुकी है। CCTV फुटेज की माँग एक सटीक और सत्यापन-योग्य परीक्षण है; सरकार इसे नकारती है तो सवाल और गहरे होंगे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने UP सरकार से क्या माँग की है?
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से प्रदेश के गो आश्रय केंद्रों का पिछले चार महीनों का CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की माँग की है। उनका कहना है कि इससे गोशालाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और सरकारी दावों की सच्चाई जनता जान सकेगी।
'गो विशिष्ट यात्रा' क्या थी और यह कितने दिनों तक चली?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा आयोजित 'गो विशिष्ट यात्रा' 81 दिनों तक चली और 26 जुलाई से पहले सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह यात्रा गो संरक्षण की ज़मीनी स्थिति को उजागर करने के उद्देश्य से निकाली गई थी।
शंकराचार्य ने सरकारी विज्ञापनों पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि 26 जुलाई को प्रकाशित सरकारी विज्ञापनों में दावा किया गया कि प्रदेश की लगभग 12 लाख गायों की बेहतर देखभाल हो रही है, जो कथित तौर पर वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनका कहना है कि इन विज्ञापनों के जरिए जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
समर्थकों को नजरबंद करने का आरोप क्या है?
शंकराचार्य के अनुसार, उनकी गोरक्षा संकल्प सभा में लोगों की भागीदारी रोकने के लिए कई स्थानों पर पुलिस ने समर्थकों को उनके घरों में ही नजरबंद किया। यह आरोप अभी तक सरकार द्वारा न स्वीकार किया गया है और न ही खंडन किया गया है।
यदि सरकार CCTV फुटेज जारी नहीं करती तो क्या होगा?
शंकराचार्य ने कहा है कि वे अपने गोभक्तों की टोली से अपील करेंगे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के गो आश्रय केंद्रों की तस्वीरें और तथ्य एकत्र कर जनता के सामने वास्तविक स्थिति प्रस्तुत करें। इससे यह विवाद राज्यव्यापी जन-दस्तावेजीकरण अभियान का रूप ले सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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