योगी आदित्यनाथ का कड़ा संदेश: भारत के प्रति अनिष्ठावानों के लिए यह धरती धर्मशाला नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 जून 2026 को लखनऊ में स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिनके हृदय में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है और जो इस देश के संस्कारों का सम्मान करने में असमर्थ हैं, उनके लिए भारत की भूमि धर्मशाला नहीं बन सकती। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्होंने प्रभु श्रीराम से द्रोह किया, उन्हें इस धरती पर कभी स्थान नहीं मिला। मुख्यमंत्री सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में आयोजित 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में रामभक्तों को संबोधित कर रहे थे।
लव जिहाद और लैंड जिहाद पर सीधी चेतावनी
मुख्यमंत्री योगी ने लव जिहाद और लैंड जिहाद के विरुद्ध समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तोड़ने वाली ताकतें जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर समाज को विभाजित करने का प्रयास करती रहेंगी, लेकिन भारत की संत शक्ति समाज को एकसूत्र में बाँधकर देश को आगे ले जाने का संकल्प लेकर चलती है।
उन्होंने केरल उच्च न्यायालय के 2009 और 2011 के उन निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें धार्मिक जनसांख्यिकी बदलने की साजिश पर चिंता जताई गई थी। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2020 में इस संदर्भ में सख्त कानून लाया गया, फिर भी व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खाली भूमि पर जबरन तंबू गाड़ने की प्रथा बंद होनी चाहिए।
श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि 491 वर्षों तक श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्थापित किया कि जहाँ रामलला विराजमान हैं, वही रामजन्मभूमि है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के वक्तव्य के संदर्भ में कहा था कि उनका बयान सुनकर यह अनुभव हुआ कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय होता आया है।
मुख्यमंत्री ने संतों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे श्रेय नहीं चाहते थे, बल्कि भारतीय परंपरा और विरासत में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम को सर्वोच्च आदर्श मानते हुए इस अभियान से जुड़े थे।
रामकथा और जगद्गुरु रामभद्राचार्य का योगदान
नौ दिवसीय रामकथा का वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री ने उनकी साधना और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने चित्रकूट में भारत का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया है और वे स्वयं उसके कुलाधिपति हैं। योगी ने कहा कि इस उम्र में भी वे राष्ट्रमंगल की कामना के साथ प्रभु की कथा को जन-जन तक पहुँचाने में निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने बताया कि जगद्गुरु अब छह माह की एकांतिक साधना के लिए प्रस्थान कर रहे हैं और उन्होंने प्रार्थना की कि यह साधना पर्व राष्ट्र के कल्याण के लिए फलदायी हो।
रामायण के पात्रों से समकालीन संदर्भ
मुख्यमंत्री ने रामायण के पात्रों का उपयोग समकालीन सामाजिक चुनौतियों को समझाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि खर-दूषण, ताड़का, मारीच और सुबाहु ने दंडकारण्य और बस्तर के वनों-नगरों को उजाड़ा था — यह लैंड जिहाद का प्राचीन स्वरूप था। उन्होंने मारीच के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कटाक्ष किया कि मामा-चाचा जब अनुचित व्यवस्था का साथ देते हैं तो कुसंग की ओर ले जाते हैं, जैसे दुर्योधन के मामा शकुनि ने महाभारत कराया।
उन्होंने कहा कि नारी गरिमा की रक्षा का भगवान राम का आदर्श आज के लव जिहाद को रोकने के लिए प्रासंगिक उदाहरण है। मध्यकाल में तुलसीदास ने जन-चेतना जागृत कर उत्तर भारत को एकता के सूत्र में पिरोया था — वही कार्य आज तुलसीपीठाधीश्वर कर रहे हैं।
समापन समारोह का आयोजन
इस अवसर पर विधायक नीरज बोरा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। योगी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि कथा केवल सुनने की नहीं, बल्कि जीवन में अंगीकार करने की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्शों को जीवन का अंश बनाने से व्यक्ति, समाज और देश — तीनों का कल्याण संभव है। आने वाले समय में समाज की सज्जन शक्ति को नकारात्मक ताकतों के विरुद्ध एकजुट और सतर्क रहना होगा।