बकरीद पर बड़े जानवरों की कुर्बानी से परहेज पर विचार, गाय को माता मानने का सम्मान: मुश्ताक मलिक
सारांश
मुख्य बातें
तहरीक मुस्लिम शबान के अध्यक्ष मुश्ताक मलिक ने 4 जून को हैदराबाद में कहा कि उनका संगठन इस वर्ष बकरीद पर मुसलमानों से बड़े जानवरों की कुर्बानी से परहेज करने की अपील पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह बयान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे मौलानाओं पर प्रतिक्रिया दी थी।
योगी के बयान पर प्रतिक्रिया
मलिक ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई गाय को माता मानता है तो यह उसकी आस्था का विषय है, इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।’ उनके अनुसार किसी को माता या पिता कहना व्यक्तिगत विश्वास का मामला है और उसका आदर किया जाना चाहिए।
गौरक्षा के नाम पर हिंसा का आरोप
मलिक ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में गौरक्षा के नाम पर हिंसा और अवैध गतिविधियों की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि बैल, भैंस और अन्य बड़े पशुओं के परिवहन या व्यापार को लेकर भी विवाद और हमले देखने को मिलते हैं, जिससे किसानों और पशु व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पशु व्यापार में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम किसान भी शामिल हैं। उनके कथित आरोप के अनुसार, ‘जानवर बेचने के बाद कुछ ही किलोमीटर दूर ट्रक रोक लिए जाते हैं और गौरक्षकों, बजरंग दल या अन्य नामों पर गुंडागर्दी की जाती है। प्रशासन और सरकार भी इन तत्वों को संरक्षण दे रही है।’
कुर्बानी पर संगठन की रणनीति
मलिक ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए उनकी संस्था बकरीद के दौरान बड़े जानवरों की कुर्बानी के पूर्ण बहिष्कार के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस मुद्दे पर सभी मुस्लिम संगठनों, उलेमा और समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
धार्मिक तर्क और आगे की राह
उन्होंने कहा कि इस्लाम में कुर्बानी एक धार्मिक परंपरा है, लेकिन किसी विशेष पशु की कुर्बानी को अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य नहीं माना जाता। इसी कारण संगठन इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श कर रहा है। यदि सर्वसम्मति बनती है, तो मुसलमानों से बड़े जानवरों की कुर्बानी से परहेज करने की औपचारिक अपील की जा सकती है।
मलिक के अनुसार, समुदाय के हितों, मौजूदा परिस्थितियों और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लिया जाएगा। संगठन की आगामी बैठकों के बाद ही इस प्रस्ताव की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।