हामिद अंसारी की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की अपील पर एनडीए का समर्थन, बिहार BJP बोली- स्वागतयोग्य कदम
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा बकरीद के अवसर पर गाय की कुर्बानी न देने और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की अपील के बाद नई दिल्ली में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई नेताओं ने 26 मई को अंसारी के इस बयान का खुलकर समर्थन किया है।
बिहार भाजपा का स्वागत
बिहार भाजपा (BJP) अध्यक्ष संजय सरावगी ने अंसारी के बयान का स्वागत करते हुए कहा, 'गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना ही चाहिए। हजारों वर्षों से भारत की सनातन संस्कृति में गौ पूजा होती रही है। गाय हमारी माता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक गौ माता दूध, घी, गोबर और गोमूत्र के रूप में मनुष्य की सेवा करती है। गौ हत्या बंद होनी चाहिए और गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलना चाहिए।'
गौरतलब है कि बाघ फिलहाल भारत का राष्ट्रीय पशु है और गाय को यह दर्जा दिलाने की माँग कई हिंदुत्ववादी संगठनों की ओर से लंबे समय से उठती रही है।
बिहार के मंत्रियों की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, 'हामिद अंसारी इस देश के पूर्व उपराष्ट्रपति रहे हैं। देश में गौ हत्या बड़े पैमाने पर होती रही है, लेकिन अब लोग जागरूक हो रहे हैं। गौ पशुधन हमारी गांवों की अर्थव्यवस्था का आधार है। गांवों की अर्थव्यवस्था पशुपालन पर निर्भर करती है। गौ हत्या दुखदायी है। जो लोग गौ हत्या करते हैं, उन्हें स्वयं ही इसे रोक देना चाहिए।'
बिहार सरकार के एक अन्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने अंसारी के बयान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, 'हामिद साहब को ऊपरवाले ने सद्बुद्धि दी है। उनकी तरफ से ऐसा बयान आना प्रसन्न करने वाला है।'
संविधान और कुर्बानी पर सवाल
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस विषय पर संवैधानिक पहलू उठाते हुए कहा, 'यह उनका निजी मत है। जिस संविधान से देश चल रहा है और जिसे बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने तैयार किया, उसके तहत पशु कुर्बानी पर पाबंदी है या नहीं, इस पर गंभीरता से काम होना चाहिए।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब बकरीद को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में संवेदनशील चर्चाएं चल रही हैं। कई राज्यों में गौरक्षा को लेकर सख्त कानून पहले से लागू हैं।
विपक्ष का नजरिया
कुछ विपक्षी दलों ने, आलोचकों का कहना है, इस पूरे मुद्दे को सांप्रदायिक एजेंडे से जोड़कर देखा है और इसे बकरीद से पहले की राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश बताया है। हालाँकि, इन दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे क्या
हामिद अंसारी की इस अपील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की पुरानी माँग को एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस माँग पर कोई नीतिगत कदम उठाती है या यह बहस केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है।