गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे केंद्र सरकार: इकबाल अंसारी ने किया मदनी के बयान का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने 21 मई को जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की उस माँग का खुलकर समर्थन किया, जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने की अपील की गई थी। अंसारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाय की कुर्बानी को अल्लाह और पैगंबर ने मना किया है, और यह मुद्दा देश के कानून एवं सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़ा है।
इकबाल अंसारी का बयान
अंसारी ने बातचीत में कहा, 'यह मुद्दा हमारे देश और हमारे देश के कानूनों से जुड़ा है। हम गायों का सम्मान करते हैं, और पूरा देश उनका सम्मान करता है।' उन्होंने आगे कहा कि हिंदू धर्म में गाय को 'गौ माता' का दर्जा प्राप्त है और यह सभी के सम्मान की अधिकारी है। उनके अनुसार, 'अगर हमारा हिंदू पड़ोसी गाय को गौ माता कहता है, तो हमारा भी यही फर्ज बनता है।'
अंसारी ने यह भी कहा कि गाय की कुर्बानी को लेकर कोई लिखित धार्मिक अनिवार्यता नहीं है और ऐसा होना भी नहीं चाहिए। उन्होंने इस्लामी संदर्भ देते हुए कहा कि 'अल्लाह के रसूल ने बताया है कि गाय का दूध फायदेमंद और घी दवा है।'
बकरीद और प्रतिबंधित पशुओं पर अपील
अंसारी ने बकरीद के अवसर पर समाज से अपील की कि जिन पशुओं की कुर्बानी पर प्रतिबंध है, उनकी बलि न दी जाए। उन्होंने गर्मी के मौसम का हवाला देते हुए सरकार और नागरिकों से आग्रह किया कि गायों के लिए पर्याप्त चारे और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
आर्य संत वरुण दास महाराज की प्रतिक्रिया
आर्य संत वरुण दास महाराज ने इस बयान का स्वागत करते हुए कहा कि भारत के मुसलमानों को स्वयं आगे आकर इस कदम का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'भारत की धरती पर गाय के खून की एक बूंद भी नहीं गिरनी चाहिए।'
वरुण दास महाराज ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए 1857 की क्रांति का उल्लेख किया, जब मंगल पांडे को ज्ञात हुआ था कि बंदूकों के कारतूसों पर गाय और सुअर की चर्बी लगी है, जिससे विद्रोह की लहर उठी थी। उन्होंने कहा कि धर्मशास्त्रों के अनुसार गाय पृथ्वी का ही एक रूप है और वह केवल हिंदुओं की नहीं, बल्कि 'विश्व माता' है।
केंद्र सरकार से माँग
इकबाल अंसारी ने केंद्र सरकार से औपचारिक माँग की है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। गौरतलब है कि फिलहाल बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। यह माँग ऐसे समय में आई है जब गोरक्षा और पशु कल्याण से जुड़े विषय राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान रखते हैं। अंसारी जैसे मुस्लिम नेता का इस माँग के पक्ष में खड़ा होना इसे सामाजिक सद्भाव के नज़रिए से भी महत्वपूर्ण बनाता है।