मध्य प्रदेश में यूसीसी नीति जनता के सुझावों से बनेगी: सीएम मोहन यादव का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की प्रक्रिया में राज्य सरकार ने जनभागीदारी को केंद्र में रखा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 13 जून को जिला कलेक्टर्स के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में स्पष्ट किया कि यूसीसी की नीति का निर्धारण जनसामान्य के सुझावों के आधार पर किया जाएगा। यह बैठक समान नागरिक संहिता जागरूकता अभियान की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी।
जागरूकता अभियान का दायरा
मुख्यमंत्री यादव ने सभी जिलों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्राम स्तर तक नागरिकों को अपना अभिमत देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। स्कूल-कॉलेजों में गतिविधियाँ संचालित करने, सामाजिक-व्यापारिक संस्थाओं और बार काउंसिल में चर्चा सत्र आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।
ग्राम स्तर पर भागीदारी
ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों को यूसीसी विषय पर चर्चा प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष ग्राम सभा की बैठक भी आयोजित की जा सकती है। शासकीय अधिकारी और कर्मचारी भी इस प्रक्रिया में अपने सुझाव दे सकते हैं।
सुझाव देने की प्रक्रिया
सीएम यादव ने बताया कि यूसीसी पर सुझाव देने के लिए एक विशेष वेबसाइट का विमोचन किया गया है और सुझाव देने की अंतिम तिथि 22 जून निर्धारित की गई है। वेबसाइट पर फॉर्म में केवल नाम, लिंग, धर्म, संभाग, जिला, पता और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। कुल 12 प्रश्नों का उत्तर 'हाँ' या 'न' में देना है, और मोबाइल ओटीपी से सत्यापन के बाद सुझाव स्वीकार हो जाएगा।
महिला एवं सामाजिक संगठनों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों, महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई ताकि यूसीसी के उद्देश्य और प्रक्रिया की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला प्रमुख राज्य बन सकता है।