तटरक्षक बल का जहाज निर्माण उद्योग के साथ एक दिवसीय सम्मेलन, दूरस्थ समुद्री क्षमता विस्तार पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल ने 10 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित तटरक्षक मुख्यालय में देश के प्रमुख जहाज निर्माण संस्थानों के साथ एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया। 'एक्सटेंडिंग कैपेबिलिटी फॉर डिस्टेंट होराइजन्स' विषयक इस सम्मेलन में भविष्य के बहुउद्देश्यीय तटरक्षक पोतों के लिए आधुनिक तकनीकी मानक विकसित करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। यह आयोजन हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती समुद्री चुनौतियों के बीच स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को नई दिशा देने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्मेलन का उद्घाटन और भागीदारी
सम्मेलन का उद्घाटन भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने किया। इसमें देश के प्रमुख शिपयार्डों — गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, एल एंड टी शिपबिल्डिंग — के साथ-साथ टीएआई इंजीनियर्स, सीटेक सॉल्यूशंस, कॉन्सेप्टिया और एसईडीएस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारतीय तटरक्षक बल के नौसैनिक वास्तुकार और तकनीकी अधिकारी भी इस चर्चा में शामिल रहे।
मुख्य एजेंडा: क्षमता मानकों का निर्धारण
सम्मेलन का केंद्रीय उद्देश्य भविष्य में तटरक्षक बल के लिए निर्मित होने वाले विशेष भूमिका वाले समुद्री प्लेटफॉर्म और बहुउद्देश्यीय पोतों के लिए स्पष्ट, मापनीय और आधुनिक तकनीकी मानक तैयार करना था। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सामान्य गुणात्मक आवश्यकताओं को ठोस क्षमता मानकों में रूपांतरित किया जाए, ताकि प्रस्ताव अनुरोध दस्तावेज (RFP) अधिक प्रभावी बन सकें। आधुनिक जहाज डिजाइन अवधारणाओं, डिजिटल सत्यापन प्रणालियों और नवीनतम तकनीकों के एकीकरण पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
समुद्री सुरक्षा की बदलती चुनौतियाँ
विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का दायरा तेज़ी से विस्तृत हो रहा है। समुद्री अपराध, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, खोज एवं बचाव अभियानों तथा आपदा राहत कार्यों जैसी बहुआयामी चुनौतियों से निपटने के लिए तटरक्षक बल को अधिक सक्षम, लचीले और तकनीकी रूप से उन्नत पोतों की आवश्यकता होगी। गौरतलब है कि दूरदराज के समुद्री क्षेत्रों में परिचालन बढ़ने के साथ मौजूदा पोतों की सीमाएँ स्पष्ट होती जा रही हैं।
आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी जहाज निर्माण
सम्मेलन में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। भाग लेने वाले संस्थानों ने भविष्य के प्लेटफॉर्मों के लिए अपने तकनीकी अनुभव और सुझाव साझा किए। भारतीय तटरक्षक बल का मानना है कि उद्योग और बल के बीच प्रारंभिक स्तर पर यह तकनीकी समन्वय भविष्य की परियोजनाओं को अधिक कुशल और समयबद्ध बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
आगे की राह
इस सम्मेलन से प्राप्त सुझावों और तकनीकी इनपुट के आधार पर तटरक्षक बल भविष्य के पोतों के लिए RFP दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। स्वदेशी तकनीक, उन्नत डिजाइन और उद्योग के साथ घनिष्ठ साझेदारी के माध्यम से ऐसे आधुनिक समुद्री प्लेटफॉर्म विकसित करने की योजना है, जो आने वाले वर्षों में देश की समुद्री सीमाओं की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।