23 सितंबर 2026
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जयराम रमेश का वार: 'हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के विरुद्ध', महाराष्ट्र समिति से जज के इस्तीफे पर कांग्रेस का हमला

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जयराम रमेश का वार: 'हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के विरुद्ध', महाराष्ट्र समिति से जज के इस्तीफे पर कांग्रेस का हमला

सारांश

महाराष्ट्र UCC समिति से एक पूर्व हाईकोर्ट जज के इस्तीफे ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के जयराम रमेश ने 21वें विधि आयोग की उसी रिपोर्ट को सामने रखा जो मोदी सरकार ने खुद कमीशन की थी — और जिसने यूसीसी को 'न आवश्यक, न वांछनीय' बताया था। अब चार BJP राज्यों में अलग-अलग यूसीसी लागू हैं, और सवाल है: क्या यह सुधार है या चुनावी रणनीति?

मुख्य बातें

महाराष्ट्र में यूसीसी मसौदा समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज ने इस्तीफा दिया, जिससे समिति के कामकाज पर सवाल उठे।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 23 सितंबर 2026 को कहा कि हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के विरुद्ध है।
21वें विधि आयोग ने 31 अगस्त 2018 को अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यूसीसी बनाना 'न आवश्यक है और न ही वांछनीय।' पिछले तीन वर्षों में उत्तराखंड (27 जनवरी 2025), गुजरात (24 मार्च 2026), असम (27 मई 2026) और मध्य प्रदेश (21 जुलाई 2026) में अलग-अलग यूसीसी विधेयक पारित।
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले सभी NDA शासित राज्यों में यूसीसी लागू होगा।
कांग्रेस ने यूसीसी को कानूनी सुधार नहीं बल्कि 'विभाजन और ध्यान भटकाने का औजार' बताया।

कांग्रेस महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने 23 सितंबर 2026 को एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि हर राज्य का अपना अलग यूसीसी बनाना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है और यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीतिक चाल मात्र है।

इस्तीफे ने क्यों उठाए सवाल

महाराष्ट्र में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज ने इस्तीफा दे दिया है। रमेश ने कहा कि इस इस्तीफे ने समिति के कामकाज और उसकी स्वायत्तता को लेकर गंभीर चिंताएं उजागर की हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी परिस्थिति की कल्पना की थी जिसमें हर राज्य अपना अलग-अलग यूसीसी बनाए — और उनका जवाब था: 'बिल्कुल नहीं।'

उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माताओं ने कभी यह नहीं सोचा था कि राज्य किसी राजनीतिक दल की रणनीति के अनुरूप एक-दूसरे से होड़ करते हुए अलग-अलग यूसीसी बनाएंगे।

विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला

रमेश ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने ही यूसीसी के प्रश्न को विस्तृत अध्ययन के लिए विधि आयोग को सौंपा था। आयोग ने व्यापक शोध के बाद 31 अगस्त 2018 को अपना परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) प्रकाशित किया था। उस पेपर के पृष्ठ 7, पैराग्राफ 1.15 में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 'इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।' आयोग ने अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में विद्यमान भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।

रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने उसी आयोग की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया जिसे उसने स्वयं यह जिम्मेदारी सौंपी थी — 'क्योंकि तथ्य उसके राजनीतिक एजेंडे से मेल नहीं खाते थे।'

राज्यों में यूसीसी की होड़

कांग्रेस नेता ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में BJP शासित राज्यों ने यूसीसी के अपने-अपने संस्करण पारित कराए हैं। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू हो गया। इसके बाद गुजरात में 24 मार्च 2026, असम में 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश में 21 जुलाई 2026 को विधानसभा में विधेयक पारित किए गए।

रमेश ने यह भी रेखांकित किया कि ये राज्यस्तरीय यूसीसी आपस में एकसमान भी नहीं हैं — इनमें अलग-अलग प्रावधान, भिन्न दंड-व्यवस्था और कई प्रकार की छूटें हैं। उनके अनुसार, उत्तराखंड का यूसीसी कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को अभी भी जीवित रखे हुए है और कानून का पालन करने वाले निवासियों के लिए भी व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न कर रहा है।

2029 चुनाव से पहले एनडीए का लक्ष्य

रमेश ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए (NDA) शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि एनडीए के घटक दलों की आवाज को दबा दिया गया है।

कांग्रेस के अनुसार, मोदी सरकार के लिए यूसीसी कोई कानूनी सुधार नहीं, बल्कि 'विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का औजार' है जो समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने का साधन है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश भर में यूसीसी के केंद्रीय बनाम राज्यस्तरीय क्रियान्वयन पर संवैधानिक बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसकी धार राजनीतिक है — और वह धार दोधारी है। 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर उन्होंने मोदी सरकार को उसी दस्तावेज से घेरा है जो उसने स्वयं कमीशन किया था; यह रणनीतिक रूप से चतुर है। लेकिन असली संवैधानिक प्रश्न — क्या राज्यों के पास यूसीसी बनाने की विधायी क्षमता है — अभी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, और इस पर कांग्रेस का मौन उतना ही उल्लेखनीय है जितना BJP की जल्दबाजी। चार BJP राज्यों में चार अलग-अलग यूसीसी का अस्तित्व यही साबित करता है कि यह 'समान' संहिता कम और 'राज्यवार प्रयोग' अधिक है — जो संघवाद की दृष्टि से भी पेचीदा सवाल उठाता है। महाराष्ट्र समिति से पूर्व जज का इस्तीफा इस पूरी प्रक्रिया की संस्थागत विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, और इसे महज विपक्षी राजनीति कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र यूसीसी समिति से पूर्व जज ने इस्तीफा क्यों दिया?
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के विशिष्ट कारण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन कांग्रेस ने इसे समिति के कामकाज और स्वायत्तता पर गंभीर चिंताओं का संकेत बताया है।
जयराम रमेश ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला क्यों दिया?
21वें विधि आयोग ने 31 अगस्त 2018 को अपने परामर्श पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि यूसीसी बनाना 'न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।' रमेश ने यह रेखांकित करने के लिए इस रिपोर्ट का हवाला दिया कि मोदी सरकार ने 17 जून 2016 को स्वयं यह प्रश्न आयोग को सौंपा था और फिर उसकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया।
किन BJP शासित राज्यों में यूसीसी लागू हुआ है?
उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। इसके बाद गुजरात (24 मार्च 2026), असम (27 मई 2026) और मध्य प्रदेश (21 जुलाई 2026) में विधानसभाओं ने यूसीसी विधेयक पारित किए। कांग्रेस के अनुसार इन चारों राज्यों के यूसीसी में प्रावधान, दंड और छूट अलग-अलग हैं।
कांग्रेस यूसीसी को संविधान की भावना के खिलाफ क्यों मानती है?
कांग्रेस का तर्क है कि संविधान निर्माताओं ने कभी यह परिकल्पना नहीं की थी कि राज्य अपने-अपने यूसीसी बनाएंगे। जयराम रमेश के अनुसार, हर राज्य का अलग यूसीसी 'समान' नागरिक संहिता की अवधारणा को ही खंडित करता है और यह डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान-निर्माण की मूल भावना के विरुद्ध है।
2029 लोकसभा चुनाव से पहले NDA का यूसीसी को लेकर क्या लक्ष्य है?
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। कांग्रेस ने इस घोषणा को कानूनी सुधार नहीं बल्कि चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति बताते हुए आलोचना की है।
राष्ट्र प्रेस
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