10 जुलाई 2026
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असम यूसीसी विधेयक पर ओवैसी का तीखा हमला: 'यह लैंगिक न्याय से कोसों दूर, किसी को नहीं चाहिए यह कानून'

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असम यूसीसी विधेयक पर ओवैसी का तीखा हमला: 'यह लैंगिक न्याय से कोसों दूर, किसी को नहीं चाहिए यह कानून'

सारांश

असम में BJP सरकार का यूसीसी विधेयक पेश होते ही AIMIM प्रमुख ओवैसी ने एक्स पर हमला बोला — 'यह न समान है, न न्यायपूर्ण।' आदिवासियों को छूट और वसीयत के प्रावधानों पर उठे सवाल इस बिल की असली परीक्षा बन गए हैं।

मुख्य बातें

असम विधानसभा में BJP सरकार ने 25 मई 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर विधेयक को 'लैंगिक न्याय से कोसों दूर' और 'थोपा गया कानून' बताया।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी जनजातीय समुदायों को बाहर रखकर अनुच्छेद 29 की भावना का उल्लंघन करता है।
विधेयक में वसीयत के प्रावधान पर ओवैसी ने कहा कि इससे बेटियाँ विरासत के उचित हिस्से से वंचित हो सकती हैं।
कांग्रेस विधायकों जॉय प्रकाश दास और रेकिबुद्दीन अहमद ने भी जोरदार विरोध का ऐलान किया।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 25 मई 2026 को असम में पेश किए गए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह कानून न तो वास्तव में 'समान' है और न ही लैंगिक न्याय की कसौटी पर खरा उतरता है। असम विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा सोमवार को पेश किए गए इस विधेयक ने विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है।

ओवैसी का एक्स पर हमला

ओवैसी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह संहिता 'बिल्कुल भी समान नहीं है', क्योंकि यह जनजातीय समुदायों को यूसीसी के दायरे से पूरी तरह बाहर रखती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अनुच्छेद 29 के तहत हर समुदाय को अपनी संस्कृति की रक्षा का अधिकार है, तो केवल आदिवासियों की स्वायत्तता को ही संरक्षण क्यों दिया जा रहा है। ओवैसी ने यह भी कहा कि संविधान सभा ने कभी किसी अनिवार्य यूसीसी की कल्पना नहीं की थी।

विरासत कानून पर ओवैसी की आपत्ति

ओवैसी ने विरासत के प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस्लामी कानून में कोई भी वारिस को विरासत से वंचित नहीं कर सकता और न ही ऐसी वसीयत लिखी जा सकती है जिससे संपत्ति केवल एक बेटे को मिले या बेटी को उसके उचित हिस्से से महरूम किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित यूसीसी किसी को भी इस प्रकार की वसीयत लिखने की अनुमति देता है, जिससे बेटियाँ उनके वाजिब हक से वंचित हो सकती हैं। ओवैसी ने इसे 'लैंगिक न्याय से कोसों दूर' करार दिया।

कांग्रेस विधायकों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने सवाल किया कि यदि यूसीसी वास्तव में लाभकारी है, तो फिर आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर क्यों रखा जा रहा है। एक अन्य कांग्रेस विधायक रेकिबुद्दीन अहमद ने इसे 'पूर्व-नियोजित चाल' बताते हुए कहा कि कांग्रेस इसका 'जोरदार विरोध' करेगी। अहमद ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक विशेष समुदाय को समाप्त करने की योजना का हिस्सा है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है और केंद्र सरकार पर भी इस दिशा में कदम उठाने का दबाव है। असम में यूसीसी विधेयक का पारित होना या न होना आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बीच विधानसभा में इस पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया निर्णायक रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह जनजातीय समुदायों को पूरी तरह छूट दे, यह तर्क कमज़ोर पड़ता है। ओवैसी की वसीयत वाली आपत्ति महज राजनीतिक नहीं है; अगर प्रावधान वाकई बेटियों के हिस्से को कमज़ोर करता है, तो यह लैंगिक न्याय का नहीं, उसके विपरीत का कदम होगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड के यूसीसी पर भी इसी तरह के सवाल उठे थे, पर उनका ठोस जवाब अभी तक नहीं मिला। असम सरकार के लिए असली परीक्षा यह है कि वह इन वैधानिक और सामाजिक सवालों का जवाब विधानसभा में दे — केवल बहुमत के बल पर नहीं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम यूसीसी विधेयक क्या है और इसे कब पेश किया गया?
असम यूसीसी विधेयक एक समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव है, जिसे असम विधानसभा में BJP सरकार ने 25 मई 2026 को पेश किया। यह विधेयक विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एकसमान बनाने का प्रयास करता है।
ओवैसी ने असम यूसीसी का विरोध क्यों किया?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दो मुख्य आधारों पर विरोध किया — पहला, जनजातीय समुदायों को यूसीसी से बाहर रखना इसे 'असमान' बनाता है; दूसरा, वसीयत के प्रावधान बेटियों को उनके उचित विरासत हिस्से से वंचित कर सकते हैं, जो लैंगिक न्याय के विरुद्ध है।
आदिवासियों को असम यूसीसी से बाहर क्यों रखा गया है?
विधेयक में जनजातीय समुदायों को यूसीसी के दायरे से छूट दी गई है। आलोचकों का कहना है कि यदि यह कानून सभी के लिए लाभकारी है, तो आदिवासियों को इससे अलग रखना इसकी 'समानता' पर सवाल खड़ा करता है।
कांग्रेस का असम यूसीसी विधेयक पर क्या रुख है?
कांग्रेस ने विधेयक का जोरदार विरोध करने का ऐलान किया है। विधायक जॉय प्रकाश दास ने आदिवासी छूट पर सवाल उठाए, जबकि विधायक रेकिबुद्दीन अहमद ने इसे 'पूर्व-नियोजित चाल' और एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की योजना बताया।
असम यूसीसी विधेयक का राष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
उत्तराखंड के बाद असम यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन सकता है, जिससे केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय यूसीसी लाने का दबाव बढ़ेगा। विपक्ष के तीखे विरोध और आदिवासी छूट के विवाद के बीच यह मुद्दा आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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