26 अगस्त 2026
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पीओके में पाक सेना की बर्बरता के खिलाफ नॉर्वेजियन संसद के बाहर कश्मीरी प्रवासियों का जोरदार प्रदर्शन

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पीओके में पाक सेना की बर्बरता के खिलाफ नॉर्वेजियन संसद के बाहर कश्मीरी प्रवासियों का जोरदार प्रदर्शन

सारांश

पीओके में पाकिस्तानी सेना की कथित बर्बरता के खिलाफ ओस्लो से न्यूयॉर्क तक कश्मीरी प्रवासी सड़कों पर उतर आए हैं। नॉर्वेजियन संसद के बाहर हुआ प्रदर्शन और 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों का संयुक्त राष्ट्र को पत्र — यह संकेत देता है कि पीओके का संकट अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा।

मुख्य बातें

कश्मीरी प्रवासियों ने ओस्लो में नॉर्वेजियन संसद के बाहर पाकिस्तानी सेना की कथित बर्बरता के खिलाफ प्रदर्शन किया।
जेएएसी ने 4 अक्टूबर 2025 के मुजफ्फराबाद समझौते को तत्काल लागू करने की माँग की।
रिपोर्टों के अनुसार पीओके में सैकड़ों लोग मारे गए या घायल हुए हैं; इलाके में कर्फ्यू और संचार ब्लैकआउट जारी है।
इसी सप्ताह न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर भी अमेरिकी कश्मीरी प्रवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर पीओके में हस्तक्षेप की अपील की।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित बर्बरता के खिलाफ नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में कश्मीरी प्रवासियों ने नॉर्वेजियन संसद के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन को तत्काल समाप्त करने और 4 अक्टूबर 2025 के समझौते को लागू करने की माँग की। यह विरोध प्रदर्शन दुनिया भर में कश्मीरी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है।

प्रदर्शन का स्वरूप और माँगें

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए और नागरिक समाज संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने पीओके में तैनात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के ऑपरेशन को तत्काल वापस लेने की माँग रखी। बुधवार को जेएएसी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'सेना द्वारा कश्मीरियों के नरसंहार के खिलाफ नॉर्वेजियन संसद के बाहर जोरदार प्रदर्शन। विदेशों में रहने वाले कश्मीरी माँग करते हैं कि हत्यारी और आतंकवादी सेना को हटाकर जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के साथ 4 अक्टूबर 2025 को हुए समझौते को तुरंत लागू किया जाए।'

जेएएसी ने यह भी चेतावनी दी कि 'अगर शासक फासीवाद जारी रखते हैं, तो हम विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे।'

4 अक्टूबर 2025 के समझौते की पृष्ठभूमि

4 अक्टूबर 2025 का समझौता मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान की संघीय सरकार, पीओके प्रशासन और जेएएसी के प्रतिनिधियों के बीच हुआ था। यह समझौता सितंबर के अंत और अक्टूबर 2025 की शुरुआत में हुई व्यापक अशांति और पूरे इलाके में लागू शटडाउन के बाद अस्तित्व में आया, जिसमें पीओके में कई लोगों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए हैं; इलाके में सख्त नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लागू बताया जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ता विरोध

नॉर्वे का यह प्रदर्शन वैश्विक कश्मीरी प्रवासी समुदाय की बढ़ती सक्रियता का प्रतीक है। इसी सप्ताह अमेरिका के न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर भी कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन किया और पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को रोकने की माँग की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में थामे प्लेकार्डों पर लिखा था — 'हर जान जो गई, उसके लिए हमें न्याय चाहिए', 'कश्मीरियों की हत्या बंद करो' और 'हमारा अधिकार, हमारी आवाज, हमारा भविष्य।'

ब्रिटिश सांसदों की संयुक्त राष्ट्र से अपील

पिछले सप्ताह 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर पीओके की बिगड़ती स्थिति पर हस्तक्षेप की माँग की। पत्र में सांसदों ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों में मौत और घायलों की तादाद की खबरें, बातचीत पर रोक, मनमानी गिरफ्तारियाँ, जरूरी सामान की सप्लाई में रुकावट और शांतिपूर्ण नागरिक व राजनीतिक अभिव्यक्ति पर पाबंदियों ने काफी चिंता पैदा की है।' सांसदों ने यह भी बताया कि उन्हें ब्रिटिश कश्मीरियों से लगातार संदेश मिल रहे हैं जो इलाके में अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।

ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह हिंसा रोकने, दूरदराज के इलाकों में रह रहे लोगों का उनके परिजनों से संपर्क कराने और दवाइयों तथा भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहयोग दे। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर पश्चिमी देशों के जनप्रतिनिधि पीओके के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र से सीधे हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं।

आगे क्या

जेएएसी की चेतावनी और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर नजरें टिकी हैं। यदि पाकिस्तान 4 अक्टूबर 2025 के समझौते को लागू नहीं करता, तो कश्मीरी प्रवासी संगठनों ने और अधिक देशों में प्रदर्शन तेज करने का संकेत दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अमेरिका और ब्रिटेन में एक साथ उठती ये आवाजें बताती हैं कि पीओके का संकट अब कूटनीतिक गलियारों से बाहर निकलकर जन-आंदोलन का रूप ले रहा है। 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों का संयुक्त राष्ट्र को पत्र असाधारण है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय केवल पत्रों तक सीमित रहेगा या ठोस दबाव बनाएगा। 4 अक्टूबर 2025 का समझौता अगर लागू नहीं होता, तो यह पाकिस्तान की संघीय सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है — और कश्मीरी प्रवासी संगठनों की बढ़ती वैश्विक पहुँच इस मुद्दे को और उपेक्षित रहने नहीं देगी।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नॉर्वे में कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन क्यों किया?
कश्मीरी प्रवासियों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित बर्बरता के खिलाफ ओस्लो में नॉर्वेजियन संसद के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने 4 अक्टूबर 2025 के मुजफ्फराबाद समझौते को तत्काल लागू करने और पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन बंद करने की माँग रखी।
4 अक्टूबर 2025 का जेएएसी समझौता क्या है?
यह समझौता मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान की संघीय सरकार, पीओके प्रशासन और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के बीच हुआ था। यह सितंबर-अक्टूबर 2025 में पीओके में हुई व्यापक अशांति, शटडाउन और कई लोगों की मौत के बाद अस्तित्व में आया था।
पीओके में मौजूदा हालात कैसे हैं?
रिपोर्टों के अनुसार पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए या घायल हुए हैं। इलाके में सख्त नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लागू बताया जा रहा है।
ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र को क्यों पत्र लिखा?
70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर पीओके में हिंसा रोकने, संचार बहाल कराने और मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश कश्मीरी अपने इलाके में रह रहे परिजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।
क्या दुनिया के अन्य देशों में भी ऐसे प्रदर्शन हुए हैं?
हाँ, इसी सप्ताह अमेरिका के न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर भी कश्मीरी प्रवासियों ने पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। नॉर्वे और अमेरिका के अलावा ब्रिटेन में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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