पीओके में पाक सेना की बर्बरता के खिलाफ नॉर्वेजियन संसद के बाहर कश्मीरी प्रवासियों का जोरदार प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित बर्बरता के खिलाफ नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में कश्मीरी प्रवासियों ने नॉर्वेजियन संसद के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन को तत्काल समाप्त करने और 4 अक्टूबर 2025 के समझौते को लागू करने की माँग की। यह विरोध प्रदर्शन दुनिया भर में कश्मीरी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है।
प्रदर्शन का स्वरूप और माँगें
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए और नागरिक समाज संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने पीओके में तैनात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के ऑपरेशन को तत्काल वापस लेने की माँग रखी। बुधवार को जेएएसी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'सेना द्वारा कश्मीरियों के नरसंहार के खिलाफ नॉर्वेजियन संसद के बाहर जोरदार प्रदर्शन। विदेशों में रहने वाले कश्मीरी माँग करते हैं कि हत्यारी और आतंकवादी सेना को हटाकर जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के साथ 4 अक्टूबर 2025 को हुए समझौते को तुरंत लागू किया जाए।'
जेएएसी ने यह भी चेतावनी दी कि 'अगर शासक फासीवाद जारी रखते हैं, तो हम विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे।'
4 अक्टूबर 2025 के समझौते की पृष्ठभूमि
4 अक्टूबर 2025 का समझौता मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान की संघीय सरकार, पीओके प्रशासन और जेएएसी के प्रतिनिधियों के बीच हुआ था। यह समझौता सितंबर के अंत और अक्टूबर 2025 की शुरुआत में हुई व्यापक अशांति और पूरे इलाके में लागू शटडाउन के बाद अस्तित्व में आया, जिसमें पीओके में कई लोगों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए हैं; इलाके में सख्त नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लागू बताया जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ता विरोध
नॉर्वे का यह प्रदर्शन वैश्विक कश्मीरी प्रवासी समुदाय की बढ़ती सक्रियता का प्रतीक है। इसी सप्ताह अमेरिका के न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर भी कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन किया और पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को रोकने की माँग की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में थामे प्लेकार्डों पर लिखा था — 'हर जान जो गई, उसके लिए हमें न्याय चाहिए', 'कश्मीरियों की हत्या बंद करो' और 'हमारा अधिकार, हमारी आवाज, हमारा भविष्य।'
ब्रिटिश सांसदों की संयुक्त राष्ट्र से अपील
पिछले सप्ताह 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर पीओके की बिगड़ती स्थिति पर हस्तक्षेप की माँग की। पत्र में सांसदों ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों में मौत और घायलों की तादाद की खबरें, बातचीत पर रोक, मनमानी गिरफ्तारियाँ, जरूरी सामान की सप्लाई में रुकावट और शांतिपूर्ण नागरिक व राजनीतिक अभिव्यक्ति पर पाबंदियों ने काफी चिंता पैदा की है।' सांसदों ने यह भी बताया कि उन्हें ब्रिटिश कश्मीरियों से लगातार संदेश मिल रहे हैं जो इलाके में अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।
ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह हिंसा रोकने, दूरदराज के इलाकों में रह रहे लोगों का उनके परिजनों से संपर्क कराने और दवाइयों तथा भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहयोग दे। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर पश्चिमी देशों के जनप्रतिनिधि पीओके के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र से सीधे हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं।
आगे क्या
जेएएसी की चेतावनी और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर नजरें टिकी हैं। यदि पाकिस्तान 4 अक्टूबर 2025 के समझौते को लागू नहीं करता, तो कश्मीरी प्रवासी संगठनों ने और अधिक देशों में प्रदर्शन तेज करने का संकेत दिया है।