पीओके में पाकिस्तानी सेना की क्रूरता के विरोध में ब्रैडफोर्ड में कश्मीरी प्रवासियों का प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
यूनाइटेड किंगडम के ब्रैडफोर्ड शहर में पाकिस्तानी महावाणिज्य दूतावास के बाहर 6 अगस्त को कश्मीरी प्रवासी समुदाय ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई। प्रदर्शनकारियों ने माँग की कि पीओके में चल रहे क्रूर अभियान को तत्काल रोका जाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय हस्तक्षेप करे।
प्रदर्शन का स्वरूप और माँगें
इस विरोध प्रदर्शन में बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे सभी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने सिविल सोसाइटी संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के साथ एकजुटता व्यक्त की। हाथों में थामी तख्तियों पर लिखा था — 'पाकिस्तान क्रूरता बंद करो', 'पाकिस्तान रावलकोट में कश्मीरियों को मारना बंद करो' और 'हम अवामी एक्शन कमेटी के साथ खड़े हैं'। पाकिस्तानी सेना की बर्बरता के खिलाफ नारे भी लगाए गए।
यह प्रदर्शन उस व्यापक लहर का हिस्सा है जिसमें दुनिया भर में पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों के बाहर प्रवासी कश्मीरी समुदाय सड़कों पर उतर रहा है।
पीओके में हिंसा की स्थिति
रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में पिछले कुछ दिनों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। हालाँकि मृतकों की वास्तविक संख्या अभी तक स्पष्ट नहीं है और यह आँकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्र में कम्युनिकेशन ब्लैकआउट के कारण स्वतंत्र सत्यापन भी बाधित है।
गौरतलब है कि पीओके में जारी यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब JAAC जैसे संगठन बिजली दरों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ आंदोलन चला रहे थे, और सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर इन प्रदर्शनों पर बल प्रयोग किया।
ब्रिटिश सांसदों की प्रतिक्रिया
पिछले सप्ताह कई ब्रिटिश सांसदों ने पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई। ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बर्न ने कहा कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की खबरें 'बेहद चिंताजनक' हैं।
बर्न ने संचार बाधा और मानवाधिकारों के उल्लंघन को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताते हुए कहा कि कश्मीर पर ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) ने दो स्पष्ट माँगें रखी हैं।
बर्न ने कहा, "पहली माँग यह है कि लंदन में पाकिस्तान के हाई कमीशन के साथ तुरंत बातचीत की जाए और कहा जाए कि यह सब बंद होना चाहिए। दूसरी माँग यह है कि हम अपने विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से भी मिलें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि वे पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे ऊँचे स्तर पर अपनी बात रख रहे हैं। असल में, जरूरत इस बात की है कि बरसों पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में किए गए वादों का सम्मान किया जाए, लेकिन अभी के लिए हमें हिंसा को रोकने की जरूरत है।"
अंतरराष्ट्रीय दबाव की माँग
ब्रैडफोर्ड का यह प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर बढ़ते उस दबाव की कड़ी है जिसमें प्रवासी कश्मीरी समुदाय पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों के सामने अपनी आवाज़ बुलंद कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन की अनदेखी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के विपरीत है।
आगे यह देखना होगा कि ब्रिटिश सरकार APPG की माँगों पर कितनी तेज़ी से कदम उठाती है और क्या अन्य पश्चिमी देश भी इस मुद्दे पर कूटनीतिक दबाव बनाते हैं।