पीओके में पाक बलों की कथित हिंसा के विरोध में इटली के बोलोन्या में हजारों कश्मीरियों का मार्च
सारांश
मुख्य बातें
इटली के बोलोन्या शहर में 10 अगस्त 2026 को कश्मीरी प्रवासी समुदाय के हजारों लोगों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी बलों की कथित हिंसा के विरोध में एक बड़ा प्रदर्शन मार्च निकाला। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब पीओके में तनाव और अशांति लगातार बढ़ रही है और दुनिया के कई देशों में कश्मीरी प्रवासी समुदाय सड़कों पर उतर रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी बलों के खिलाफ नारे लगाए और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रति एकजुटता प्रकट की। प्रदर्शन के दौरान लोगों के हाथों में तख्तियाँ थीं, जिन पर लिखा था — 'पाकिस्तान बर्बरता बंद करो', 'पाकिस्तान रावलकोट में कश्मीरियों की हत्या बंद करो' और 'हम अवामी एक्शन कमेटी के साथ हैं।' प्रदर्शनकारियों में बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।
जेएएसी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि इटली में कश्मीरियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह पाकिस्तानी बलों की ओर से निहत्थे नागरिकों के कथित 'नरसंहार' के खिलाफ आवाज उठाए। जेएएसी ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी केवल अपने बुनियादी अधिकारों की माँग कर रहे हैं।
मानवाधिकार संस्था के आँकड़े
पीओके स्थित मानवाधिकार दस्तावेजीकरण एवं निगरानी संस्था जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (जेकेएचआरओ) के अनुसार, 5 जून से 5 अगस्त 2026 के बीच क्षेत्र में बढ़ती अशांति के दौरान 93 नागरिकों की मौत दर्ज की गई। ये आँकड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन रहे हैं।
वैश्विक प्रतिक्रिया और ब्रिटेन में प्रदर्शन
पिछले सप्ताह यूनाइटेड किंगडम के ब्रैडफोर्ड शहर में स्थित पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर भी कश्मीरी प्रवासी समुदाय ने प्रदर्शन किया और पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी बलों की कथित कार्रवाई की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने जेएएसी के समर्थन में आवाज उठाई और क्षेत्र में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अभियानों को समाप्त करने की माँग की।
गौरतलब है कि ब्रिटेन के कई सांसदों ने भी पीओके में नागरिकों के खिलाफ कथित कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है। ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बर्न ने कहा कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर असली गोलियों के इस्तेमाल की खबरें 'बेहद चिंताजनक' हैं। वहीं, ब्रिटिश सांसद अदनान हुसैन ने पीओके में नागरिकों की मौत को 'दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी' बताते हुए कहा कि यदि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा अत्यधिक या गैरकानूनी बल का इस्तेमाल किया गया है, तो इसकी पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच होनी चाहिए।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में अशांति थमने का नाम नहीं ले रही और अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। कश्मीरी प्रवासी समुदाय का यह प्रदर्शन यूरोप और ब्रिटेन दोनों में फैल चुका है, जो इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर और अधिक उठाने का संकेत देता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और सरकारों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगी।