पीओके में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार: यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की खबरें सामने आ रही हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने 18 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना द्वारा आम नागरिकों पर किए जा रहे कथित अत्याचारों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से तत्काल एक मानवाधिकार निगरानी मिशन भेजने की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
यूकेपीएनपी ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा साझा की गई जानकारी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि इस वर्ष 5 जून से अब तक दर्जनों आम नागरिकों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, कथित तौर पर सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। संगठन के अनुसार, कई परिवार अपने उन प्रियजनों की जानकारी माँग रहे हैं जिन्हें विरोध प्रदर्शनों के दौरान जबरन गायब कर दिया गया।
संगठन ने न्यायेत्तर हत्याओं, अपहरण, यातना, गैर-कानूनी हिरासत, अत्यधिक बल प्रयोग और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की माँग की। यूकेपीएनपी ने कहा, 'आपराधिक कार्यों में लिप्त लोगों को भरोसेमंद और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।'
संचार ब्लैकआउट और नागरिक अधिकारों पर असर
यूकेपीएनपी ने पीओके में मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर गहरी चिंता जताई। संगठन ने कहा, 'लगातार पाबंदियों ने पूरे समुदाय को अलग-थलग कर दिया है और लाखों प्रवासी कश्मीरी अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।' संगठन ने इन सेवाओं को तत्काल बहाल करने की माँग की।
इसके अतिरिक्त, यूकेपीएनपी ने ब्लॉक किए गए पासपोर्ट, पहचान दस्तावेज़, सिम कार्ड और बैंक खातों को पुनः सक्रिय करने की भी अपील की। संगठन ने आने-जाने की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को बहाल करने पर जोर दिया।
हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकार
यूकेपीएनपी ने माँग की कि हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों को उनके परिवार, वकील और चिकित्सा सहायता तक पहुँच मिलनी चाहिए। संगठन ने कहा, 'जिन लोगों को केवल अपने बुनियादी अधिकारों का शांतिपूर्ण उपयोग करने के कारण हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।'
संगठन ने यह भी माँग की कि प्रदर्शनकारियों के शव 'तुरंत और बिना किसी शर्त के' परिवारों को सौंपे जाएँ, ताकि वे बिना किसी दबाव या धमकी के अंतिम संस्कार कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी और यूएन से अपील
यूकेपीएनपी ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य देश है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का हस्ताक्षरकर्ता भी। इसलिए, संगठन के अनुसार, पाकिस्तान पर बुनियादी मानवाधिकारों का सम्मान करने और उनकी रक्षा करने की कानूनी एवं नैतिक जिम्मेदारी है।
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह पीओके में तत्काल एक निष्पक्ष फैक्ट-फाइंडिंग और मानवाधिकार निगरानी मिशन भेजे, जो न्यायेत्तर हत्याओं, अत्यधिक बल प्रयोग, अपहरण, मनमानी हिरासत, यातना, संचार बंदी, मीडिया पहुँच पर रोक, सामूहिक सजा और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोपों की जांच कर सके।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में नागरिक असंतोष और विरोध प्रदर्शनों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की पीओके तक पहुँच अब भी सीमित बताई जाती है। यूकेपीएनपी की इस अपील पर वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान का रुख आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगा।