18 अगस्त 2026
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पीओके में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार: यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल जांच की मांग की

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पीओके में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार: यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल जांच की मांग की

सारांश

पीओके में 5 जून से दर्जनों मौतें और सैकड़ों गिरफ्तारियों की खबरों के बीच यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल निष्पक्ष जांच मिशन भेजने की माँग की है। संचार ब्लैकआउट ने लाखों प्रवासी कश्मीरियों को परिवारों से काट दिया है।

मुख्य बातें

यूकेपीएनपी ने 18 अगस्त को पीओके में पाकिस्तानी सेना के कथित अत्याचारों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा।
5 जून से अब तक दर्जनों नागरिकों की मौत और सैकड़ों की कथित गिरफ्तारी की रिपोर्ट, कई लोग जबरन गायब।
पीओके में मोबाइल, इंटरनेट और संचार सेवाओं पर पाबंदी से लाखों प्रवासी कश्मीरी परिवारों से कटे।
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल निष्पक्ष फैक्ट-फाइंडिंग और मानवाधिकार निगरानी मिशन भेजने की माँग की।
संगठन ने हिरासत में लिए गए सभी लोगों को परिवार, वकील और चिकित्सा सहायता देने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की अपील की।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की खबरें सामने आ रही हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने 18 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना द्वारा आम नागरिकों पर किए जा रहे कथित अत्याचारों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से तत्काल एक मानवाधिकार निगरानी मिशन भेजने की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

यूकेपीएनपी ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा साझा की गई जानकारी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि इस वर्ष 5 जून से अब तक दर्जनों आम नागरिकों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, कथित तौर पर सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। संगठन के अनुसार, कई परिवार अपने उन प्रियजनों की जानकारी माँग रहे हैं जिन्हें विरोध प्रदर्शनों के दौरान जबरन गायब कर दिया गया।

संगठन ने न्यायेत्तर हत्याओं, अपहरण, यातना, गैर-कानूनी हिरासत, अत्यधिक बल प्रयोग और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की माँग की। यूकेपीएनपी ने कहा, 'आपराधिक कार्यों में लिप्त लोगों को भरोसेमंद और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।'

संचार ब्लैकआउट और नागरिक अधिकारों पर असर

यूकेपीएनपी ने पीओके में मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर गहरी चिंता जताई। संगठन ने कहा, 'लगातार पाबंदियों ने पूरे समुदाय को अलग-थलग कर दिया है और लाखों प्रवासी कश्मीरी अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।' संगठन ने इन सेवाओं को तत्काल बहाल करने की माँग की।

इसके अतिरिक्त, यूकेपीएनपी ने ब्लॉक किए गए पासपोर्ट, पहचान दस्तावेज़, सिम कार्ड और बैंक खातों को पुनः सक्रिय करने की भी अपील की। संगठन ने आने-जाने की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को बहाल करने पर जोर दिया।

हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकार

यूकेपीएनपी ने माँग की कि हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों को उनके परिवार, वकील और चिकित्सा सहायता तक पहुँच मिलनी चाहिए। संगठन ने कहा, 'जिन लोगों को केवल अपने बुनियादी अधिकारों का शांतिपूर्ण उपयोग करने के कारण हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।'

संगठन ने यह भी माँग की कि प्रदर्शनकारियों के शव 'तुरंत और बिना किसी शर्त के' परिवारों को सौंपे जाएँ, ताकि वे बिना किसी दबाव या धमकी के अंतिम संस्कार कर सकें।

अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी और यूएन से अपील

यूकेपीएनपी ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य देश है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का हस्ताक्षरकर्ता भी। इसलिए, संगठन के अनुसार, पाकिस्तान पर बुनियादी मानवाधिकारों का सम्मान करने और उनकी रक्षा करने की कानूनी एवं नैतिक जिम्मेदारी है।

संगठन ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह पीओके में तत्काल एक निष्पक्ष फैक्ट-फाइंडिंग और मानवाधिकार निगरानी मिशन भेजे, जो न्यायेत्तर हत्याओं, अत्यधिक बल प्रयोग, अपहरण, मनमानी हिरासत, यातना, संचार बंदी, मीडिया पहुँच पर रोक, सामूहिक सजा और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोपों की जांच कर सके।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में नागरिक असंतोष और विरोध प्रदर्शनों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की पीओके तक पहुँच अब भी सीमित बताई जाती है। यूकेपीएनपी की इस अपील पर वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान का रुख आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संचार ब्लैकआउट और जबरन गुमशुदगी के आरोप मामले को अधिक गंभीर बनाते हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव की असली परीक्षा यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र इस क्षेत्र में स्वतंत्र पहुँच हासिल कर पाएगा, जो ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान ने सीमित रखी है। यूकेपीएनपी की अपील कूटनीतिक दबाव बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है, परंतु जब तक स्वतंत्र सत्यापन नहीं होता, आरोपों और वास्तविकता के बीच की खाई बनी रहेगी। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस तथ्य को नजरअंदाज करती है कि इस क्षेत्र में मीडिया की पहुँच लगभग शून्य है, जो स्वयं में एक बड़ी जवाबदेही की समस्या है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन की ताजा स्थिति क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 5 जून 2026 से दर्जनों नागरिकों की मौत और सैकड़ों की गिरफ्तारी हुई है। कई लोगों को जबरन गायब किए जाने की भी खबरें हैं और संचार सेवाएँ बाधित बताई जाती हैं।
यूकेपीएनपी कौन है और उसने क्या माँगें रखी हैं?
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) एक कश्मीरी राजनीतिक संगठन है जो पीओके में नागरिक अधिकारों की पैरवी करता है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल निष्पक्ष जांच मिशन, संचार सेवाओं की बहाली, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और प्रदर्शनकारियों के शव परिवारों को सौंपने की माँग की है।
पीओके में संचार ब्लैकआउट का असर किस पर पड़ा है?
यूकेपीएनपी के अनुसार, मोबाइल, इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं पर पाबंदी के कारण लाखों प्रवासी कश्मीरी अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। पासपोर्ट, पहचान दस्तावेज़, सिम कार्ड और बैंक खाते भी कथित तौर पर ब्लॉक किए गए हैं।
पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जिम्मेदारी क्या है?
पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य देश है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का हस्ताक्षरकर्ता है। यूकेपीएनपी के अनुसार, इन संधियों के तहत पाकिस्तान पर बुनियादी मानवाधिकारों का सम्मान करने और उनकी रक्षा करने की कानूनी बाध्यता है।
संयुक्त राष्ट्र से क्या अपेक्षा की जा रही है?
यूकेपीएनपी ने यूएन से पीओके में तत्काल एक निष्पक्ष फैक्ट-फाइंडिंग और मानवाधिकार निगरानी मिशन भेजने की अपील की है। इस मिशन से न्यायेत्तर हत्याओं, अपहरण, यातना, मीडिया पहुँच पर रोक और सामूहिक सजा के आरोपों की स्वतंत्र जांच की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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