पीओके में पाक सेना की बर्बरता के खिलाफ लंदन में कश्मीरी प्रवासियों का जोरदार प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
लंदन स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर 6 जुलाई को यूनाइटेड किंगडम में बसे कश्मीरी प्रवासी समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए वहाँ मानवाधिकार बहाल करने की माँग की। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब पीओके से लगातार तनाव और दमन की रिपोर्टें सामने आ रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई नागरिकों के मारे जाने और घायल होने का दावा किया गया है। क्षेत्र में कर्फ्यू, कड़ी पाबंदियाँ और संचार सेवाएँ बंद होने की भी खबरें हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि लंदन में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन कर समिति के समर्थन में आवाज़ उठाई और निर्दोष कश्मीरियों के खिलाफ कथित हिंसा का विरोध किया।
समिति ने स्पष्ट किया, 'ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी अपने कश्मीरी भाइयों के साथ मजबूती से खड़े हैं और उनका समर्थन जारी रखेंगे।' समिति ने यह भी कहा कि यह प्रदर्शन उन लोगों के लिए संदेश है जो बल प्रयोग के जरिए जन आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
पीटीआई ब्रिटेन इकाई का आरोप
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ब्रिटेन इकाई ने भी एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बड़ी संख्या में प्रवासी कश्मीरियों ने पीओके में राज्य बलों की कथित कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। पार्टी ने आरोप लगाया कि अब तक कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, सैकड़ों घायल हुए हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है — जिनमें आंदोलन के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर भी शामिल हैं।
ब्रिटिश सांसद की अपील
ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से पीओके में तत्काल लॉकडाउन हटाने, संचार सेवाएँ बहाल करने और शांतिपूर्ण वार्ता शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा, 'इस पूरी प्रक्रिया में कश्मीरियों के मानवाधिकारों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।'
हुसैन ने एक्स पर साझा किए गए संदेश में बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने पीओके की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने ब्रिटेन के विदेश सचिव को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है, विदेश कार्यालय के मंत्रियों के साथ बैठक की माँग की है और ब्रिटिश संसद में एक अर्ली डे मोशन भी पेश किया है, जिसे विभिन्न सांसदों का समर्थन मिल रहा है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि पीओके में जन-आंदोलन और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच टकराव की यह पहली घटना नहीं है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र में नागरिक असंतोष को बार-बार बल प्रयोग से दबाती आई है। लंदन में यह प्रदर्शन दर्शाता है कि पीओके का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी जोर पकड़ रहा है।
आगे की स्थिति
ब्रिटिश संसद में अर्ली डे मोशन पर समर्थन जुटने के साथ, यह मामला आने वाले दिनों में यूके की विदेश नीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है। प्रवासी कश्मीरी समुदाय ने संकेत दिया है कि जब तक पीओके में स्थिति सामान्य नहीं होती, विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।