पीओके में कम्युनिकेशन ब्लैकआउट पर ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने विदेश सचिव यवेट कूपर को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी तनाव और कथित कम्युनिकेशन ब्लैकआउट को लेकर ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने 7 जून 2026 को ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर को औपचारिक पत्र लिखकर गहरी चिंता व्यक्त की है। पत्र में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर लॉकडाउन, इंटरनेट व मोबाइल सेवाओं में रुकावट और बातचीत के टूटने से इलाके के लोगों की बाहरी दुनिया से संपर्क करने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
पत्र में क्या कहा गया
सांसद इमरान हुसैन ने अपने पत्र में लिखा कि ब्रिटेन के कई नागरिकों ने उनसे संपर्क कर बताया है कि वे पीओके में अपने परिजनों और प्रियजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे। उन्होंने कहा, 'इससे ब्रिटिश कश्मीरियों में काफी चिंता और परेशानी हुई है, जिनमें से कई अपने परिवारों की भलाई और सुरक्षा को लेकर स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं।'
पत्र में ब्रिटिश नागरिकों की कथित गिरफ्तारी, संचार पर रोक और अधिकारियों तथा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत टूटने की रिपोर्टों का भी उल्लेख किया गया है।
संचार पाबंदियों पर विशेष चिंता
हुसैन ने पत्र में रेखांकित किया कि 'संवेदनशील और राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण माहौल में कम्युनिकेशन पर कोई भी रोक अनिश्चितता बढ़ाने, भरोसा कम करने और तनाव को और गहरा करने का खतरा पैदा करती है।' उन्होंने कहा कि बड़े लॉकडाउन के हिस्से के रूप में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं में रुकावट की रिपोर्टें, पुलिसिंग, सुरक्षा और जनता के विरोध के अधिकार से जुड़ी चिंताओं को और पुख्ता करती हैं।
बातचीत और संयम की अपील
सांसद ने ज़ोर देकर कहा कि 'इस स्थिति को शांतिपूर्ण बातचीत, संयम और चिंता जताने वालों के साथ सार्थक संवाद से सुलझाया जाना चाहिए।' उन्होंने शांतिपूर्वक एकत्र होने के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बातचीत तक पहुँच को स्थिरता एवं जनविश्वास बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताया।
आगे क्या होगा
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब पीओके में नागरिक असंतोष, गवर्नेंस विवाद और बुनियादी मानवाधिकारों को लेकर तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। विदेश सचिव यवेट कूपर की प्रतिक्रिया और ब्रिटिश सरकार का रुख इस मामले में अहम होगा। विश्लेषकों के अनुसार, यदि ब्रिटेन कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाता है तो यह पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने में सहायक हो सकता है।